У нас вы можете посмотреть бесплатно पोटो हो शहीद दिवस || सेरेंगसिया घाटी || 1-2 जनवरी 1838 || Vlog-3 или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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1 जनवरी 1838 का दिन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रारंभिक और गौरवशाली बलिदानों में अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी दिन वीर पोटो हो और उनके साथियों को अंग्रेज़ी हुकूमत द्वारा फांसी दी गई, क्योंकि उन्होंने अन्याय, शोषण और विदेशी शासन के विरुद्ध आवाज़ उठाई थी। 20 नवंबर 1837 में पोटो हो के नेतृत्व में सेरेंगसिया घाटी में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी गई थी। पोटो हो और उनके समूह को कुचलने के ब्रिटिश कंपनी ने कैप्टन आर्मस्ट्रांग को 400 फायरमैन, 60 घुड़सवार और 2 बंदूकों की टुकड़ी सौंपी गई थी। अंग्रेजों की सहायता के लिए सरायकेला के जमींदार ने अपने 200 पाइक (सिपाही) भी भेजे थे। 8 दिसंबर 1837 को पोटो हो, नारा हो, पांडुआ हो, बाड़ाय हो और बोड़ो हो सहित 79 साथियों को गिरफ्तार कर लिया गया था। पोटो हो एक निर्भीक, स्वाभिमानी और जननायक थे। वे अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों, भारी कर वसूली और भारतीयों पर हो रहे अत्याचारों के प्रबल विरोधी थे। उन्होंने ग्रामीण जनता और युवाओं को संगठित कर स्वतंत्रता, न्याय और आत्मसम्मान के लिए संघर्ष किया। अंग्रेज़ शासकों ने पोटो हो और उनके साथियों सजा देने के लिए त्वरित और अन्यायपूर्ण मुकदमा चलाया तथा 1 जनवरी 1838 को उन्हें फांसी पर चढ़ा दिया। उनका उद्देश्य डर फैलाना था, लेकिन यह बलिदान जनता के मन में स्वतंत्रता की आग को और प्रज्वलित कर गया। पोटो हो और उनके साथियों की शहादत ने यह सिद्ध कर दिया कि भारत की आज़ादी केवल 1857 से नहीं, बल्कि उससे भी पहले अनेक गुमनाम वीरों के संघर्ष और बलिदानों से सींची गई है। उनका जीवन आज भी हमें अन्याय के विरुद्ध खड़े होने, सत्य के मार्ग पर चलने और देश के लिए त्याग करने की प्रेरणा देता है।