У нас вы можете посмотреть бесплатно अनहलक जैतान साधना।। सबसे आसान जिन्न साधना।। или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
Если кнопки скачивания не
загрузились
НАЖМИТЕ ЗДЕСЬ или обновите страницу
Если возникают проблемы со скачиванием видео, пожалуйста напишите в поддержку по адресу внизу
страницы.
Спасибо за использование сервиса ClipSaver.ru
अनहलक जैतान साधना।। सबसे आसान जिन्न साधना।।(@sachebhagat ) Your queries: जैतान जिन साधना जिन साधना जिन्न साधना सत्य ज्ञान साधना परी साधना मंत्र और साधना नेक जिन्न साधना नापाक जिन साधना साधना भूत साधना हाफिज जिन्न साधना मसानी मेलडी साधना मंत्र साधना तंत्र साधना लाल परी साधना तीन दिन की जिन्न साधना जिन्न साधना मंत्र विधि देवता प्रत्यक्ष दर्शन कराने वाली साधना मसानी मेलडी साधना तंत्र संस्थान पवित्र जिन्न अनहलक जैतान की जबरदस्त साधना ।। ज़िन्दगी के साथ भी और जिन्दगी के बाद भी।। ईच्छा पूर्ण होने वाली साधना Description: अनहलक जैतान साधना एक सूफी और तांत्रिक परंपराओं से जुड़ी रहस्यमय साधना है, जो परमात्मा के साथ आत्मा की एकता को महसूस करने से संबंधित है। यह साधना विशेष रूप से सूफी संत मंसूर अल-हल्लाज के कथन "अनल-हक" मैं ही सत्य हूँसे प्रेरित है। अनहलक जैतान साधना का महत्व 1. अहंकार और द्वैत से मुक्ति – साधक स्वयं को ईश्वर से अलग नहीं बल्कि उसी का अंश मानता है। 2. परम चेतना से जुड़ाव – यह साधना आत्मा को उच्च आध्यात्मिक अवस्था तक ले जाने में सहायक होती है। 3. निर्भयता और समर्पण – साधक अपने अस्तित्व को पूरी तरह से ईश्वरीय शक्ति के अधीन कर देता है। अनहलक जैतान साधना की प्रक्रिया चेतावनी: यह साधना अत्यंत गूढ़ और शक्तिशाली मानी जाती है। बिना उचित मार्गदर्शन के इसे करना जोखिम भरा हो सकता है। 1. मंत्र जप: "अनल-हक" का निरंतर जप किया जाता है। इसका अर्थ है – "मैं ही सत्य हूँ" या "मुझमें ही परम सत्य है।" 2. ध्यान एवं एकाग्रता: साधक शांत स्थान पर बैठकर अपनी चेतना को ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जोड़ने का प्रयास करता है। श्वास-प्रश्वास की गति को नियंत्रित करते हुए "अनल-हक" मंत्र का मानसिक जप करता है। 3. स्वरूप ध्यान: साधक स्वयं को प्रकाश स्वरूप के रूप में अनुभव करने का अभ्यास करता है। यह ध्यान धीरे-धीरे अहंकार को मिटाकर आत्मा को परमात्मा से जोड़ने में सहायक होता है। 4. समर्पण भाव: साधक सभी सांसारिक इच्छाओं और सीमाओं से ऊपर उठने की कोशिश करता है। स्वयं को पूर्ण रूप से ब्रह्मांडीय शक्ति के समक्ष समर्पित कर देता है। क्या यह साधना खतरनाक हो सकती है? हाँ, यदि सही मार्गदर्शन और मानसिक संतुलन के बिना की जाए तो यह व्यक्ति को अहंकार, मानसिक असंतुलन, या समाज से अलगाव की ओर ले जा सकती है। इतिहास में मंसूर अल-हल्लाज को "अनल-हक" कहने के कारण मृत्युदंड दिया गया था, क्योंकि यह विचार पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं के विरुद्ध माना गया था। क्या इस साधना को कोई भी कर सकता है? यह साधना गूढ़ रहस्यों से जुड़ी है और केवल उच्च कोटि के साधकों के लिए उपयुक्त मानी जाती है। बिना योग्य गुरु के इसे करना सही नहीं है। यदि आप इस साधना के बारे में अधिक जानना चाहते हैं या इसे करने की इच्छा रखते हैं, तो किसी अनुभवी संत, सूफी, या तांत्रिक गुरु से मार्गदर्शन लेना अनिवार्य है। For contact wts app only 🙏🙏🙏 6230727290