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#rajasthanturism #jhalawar #mahukamahal #jaipur #mahal #rajputhistory #gagronfort #adventure #tranding #honted #07travelwithsk मऊ बोरदा ,भीमसागर डैम ,झालावाड-़ स्थित मऊ का महल राजस्थान इतिहास का ही एक अंश है जिसे इतनी तवज्जो नहीं मिली जिस वजह से यह पूरा खंडहर हो चुका था जिसका सरकार ने पुनर्निर्माण करवाया और उसको अपनी पहचान दिलाई मऊ की स्थापना 1478 ई में गागरोन के राजा अचलदास खींची के पुत्र धीरज देव ने की थी और इसे राजधानी बनाया इसके अंतर्गत 1400 गांव आते थे मऊ का महल तीन खंडों में विभाजित है जैसे मोती महल बादल महल और रानी जी का चहबचो कहा जाता है मऊ राज्य के के इतिहास में एक लड़ाई हुई थी जिसका वर्णन ज्यादा देखने सुनने को नहीं मिलता यह लड़ाई मामा और भांजे के बीच हुई जिसकी वजह एक घोड़ा बना यह राजस्थानी में सबसे अजीब वजह बनी लड़ाई की हुआ इस तरह की राजा भगवत सिंह खींची के दरबार में एक घोड़ा जिसका नाम नैनसुख था नैनसुख राजा भगवत सिंह के साथ साथ पूरे राजे को प्रिय था वह मऊ राज्य की शान था रक्षाबंधन पर उनके भांजे अपनी मां के साथ राखी बांधने आए थे उसी दौरान उन्हें नैनसुख के बारे में पता चला उसकी काबिलियत के बारे में और प्रशंसा सुनकर उसे अपने साथ ले जाने का मन बना लिया और उन्होंने राजा के सामने घोड़ा उपहार में देने की बात की जिस पर राजा ने उन्हें मना कर दिया क्योंकि वह घोड़ा उन्हें बेहद प्रिय था जिसे वह किसी भी कीमत पर अपने से दूर नहीं कर सकते थे परंतु उनके भांजे ज़िद पर अड गए इस मामले को सुलझाने के लिए राजा भगवत सिंह खींची ने उन्हें अपना आधा राज्य देने का वादा किया मगर उनके भांजे इस बात पर भी नहीं माने और नैन सुख को साथ ले जाने की ज़िद पर अड़े रहे और अंततः यह मामा भांजे की लड़ाई का कारण बनी जिसमें काफी विनाश हुआ, लड़ाई में खींची वंश तबाह हो गया और मऊ का महल उजाड़ हो गया भगवत सिंह की रानियों में से एक रानी अपने पीहर में थी जो की खरचीपुर में था जिस वजह से खींची वंश के पूर्वज खिलचीपुर में पाए जाते हैं मऊ राज्य के के दो बड़े शहर छोटा रायपुर और बढ़ा रायपुर समय के साथ समाप्त हो गए और मिट्टी में मिल गए ऐसे ही कुछ और तथ्य है जैसे यहां एक और जोहर किया गया जो की राजपूत रानियों द्वारा बारूद के ढेर पर बैठकर किया गया और मऊ राज्य में 99 मस्जिद बनाई गई थी अगर एक और बन जाती तो मक्का मदीना बन सकता था मऊ राज्य मैं धन के अपार भंडार थे जिस वजह से अभी तक भी लोग यहां उन भंडारों की खोज में लगे है