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जाट राजाराम ने अकबर के मकबरे से बेशकीमती सोना, हीरे-जवाहरात लूट कर उनकी हड्डियां जला दी! 📌You can join us other social media 👇👇👇 💎INSTAGRAM👉 / gyanvikvlogs 💎FB Page Link 👉 / gyanvikvlogs राजाराम को औरंगजेब की अधीनता पसंद नहीं थी. वो अपने कुल और रियासत के सरदार गोकुल जाट का बदला लेना चाहते थे. गोकुल जाट को औरंगजेब ने बड़ी दर्दनाक मौत दी थी. पंद्रह सालों बाद जब वो सीधे औरंगजेब से न टकरा सके और न ही उनके पास इतनी बड़ी सेना थी, तो उन्होंने औरंगजेब के कई अधिकारियों को सीधे युद्ध में हराया और गुस्से में आगरा के बाहरी इलाके में बने अकबर के मकबरे सिकंदरा पर धावा बोल दिया. उन्होंने मकबरे को लूटा और अकबर की हड्डियों को खोदकर उनमें आग लगा दी. इस घटना से ही आप समझ सकते हैं कि वो कमजोर जरूर थे. लेकिन बदले की भयानक आग उनके सीने में जल रही थी. हालांकि ऐसी आग लाखों दिलों में औरंगजेब राज में धधक रही थी, लेकिन राजाराम जैसी हिम्मत हर सीने में नहीं थी! विष्णु शर्मा की किताब ‘इतिहास के 50 वायरल सच’ में विस्तार से इस घटना के के बारे में लिखा गया है. राजाराम भरतपुर जिले की रियासत सिनसिनी के रहने वाले थे, भरतपुर का किला बनने से पहले सिनसिनी में ही दुर्ग हुआ करता था. मिर्जा राजा जयसिंह से युद्ध में जब गोकुल जाट का भाई मारा गया तो उसने अपनी राजधानी मथुरा के पास महावन में बना ली. 1669 में उसने मथुरा और सादाबाद छावनी जैसे इलाकों पर कब्जा कर लिया, मुगल फौजदार अब्दुल नवी मारा गया. 5 महीने तक गोकुल जाट ने मुगलों की राजधानी आगरा के इतने करीब के इलाकों में अपनी बादशाहत कायम कर ली, जो औरंगजेब को बर्दाश्त न हुआ. उसने मथुरा में नया फौजदार ज्यादा सेना के साथ भेजा, नाम था- हसन अली. आगरा के फौजदार अमानुल्ला को भी उसकी मदद के लिए लगाया. ब्रह्मदेव सिसौदिया को भी मदद के लिए भेजा गया. इतना ही नहीं उन दिनों औरंगजेब भी दिल्ली से जाट विद्रोह को दबाने के लिए खुद बड़ी सेना के साथ चल पड़ा. तिलपत के युद्ध में गोकुल की हार हुई, वो बंदी बना लिए गए. 1 जनवरी 1670 को आगरा कोतवाली में गोकुल जाट और उदय सिंह को फांसी पर लटका दिया गया! #AkbarTomb #Sikandra #Gyanvikvlogs #HeritageofAgra #HistoryofAgra #अकबर_का_मकबरा #अकबर_की_कब्र #AkabarKaMakbara #JatRajaRam #Historicalmonuments #HistoticalPlaces #Gyanviknewvideo