У нас вы можете посмотреть бесплатно पांडव हिमाले चालिया|| Pandav Himalaya Chaliya || Chotu Singh Rawna || Parmen || Devotional song или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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LIKE | SHARE | COMMENT | SUBSCRIBE Swar Swaroopa Production And Chotu Singh Rawna Presents Pandav Himalay Chaliya Which is Sung by Chotu Singh Rawna.and the lyrics of this new song are penned by Himself. The Video is directed by Dharmveer Singh Nandra .And the melodious music you are enjoying is done by Music Parmen at Arrow Music Jaipur. Enjoy and stay connected with us.... Spacial Thanks to Modern Marwar Jodhpur इस भजन का टाइटल (पांडव हिमाले चालिया ) सायद पुराने किसी भजन का है पर मैंने इस भजन को नहींसुना हुआ था बस पाण्डवों का जीकर आते ही मेरे पिता जी एक लाइन गाते थे पांडव हिमाले जाये गल गया मैंने काफ़ी समय इस भजन को खोजा पर मुझे कही मिला नहीं तो मैंने ही उस टाइटल को लेके ख़ुद अपनी लिखावट से पूरा भजन बना दिया अब इसभजन को सुनके मुझे मेरे पिताजी के गाये शब्द और उनकी स्मृतियाँ मन को शांति देती है और में हमेशा भीगी आखों से पिताजी केलिए भगवान से प्रार्थना करता हु 🎵 गाने का सार (Description): यह गीत महाभारत के उस अध्याय पर आधारित है, जब पांडवों ने अपना संपूर्ण वैभव — महल, राज्य, धन, और परिवार — त्याग कर मोक्ष की खोज में हिमालय की ओर प्रस्थान किया। यह यात्रा सिर्फ शरीर की नहीं, आत्मा की भी परीक्षा थी। उनके साथ एक कुत्ता भी था, जो प्रतीक था धर्म का। यात्रा के दौरान सबसे पहले द्रौपदी गिरीं — क्योंकि वह अर्जुन को सबसे अधिक प्रिय मानती थीं। फिर सहदेव गिरे — जिन्हें अपने ज्ञान पर अभिमान था। इसके बाद नकुल गिरे — जिन्हें अपनी सुंदरता पर गर्व था। अर्जुन भी गिरे — क्योंकि उन्होंने युद्ध में दिया अपना वचन निभा नहीं सके। भीम — जिन्होंने अपनी ताकत पर घमंड किया, अंततः गिर पड़े। अंत में केवल युधिष्ठिर ही बचे, जिन्होंने धर्म (कुत्ते के रूप में) का साथ कभी नहीं छोड़ा। जब इन्द्र उन्हें स्वर्ग ले जाने आए और कुत्ते को छोड़ने को कहा, तो युधिष्ठिर ने मना कर दिया। यह देखकर इन्द्र प्रसन्न हुए और बताया कि वह कुत्ता स्वयं धर्मराज थे। युधिष्ठिर सत्य, निष्ठा और धर्म के प्रतीक बनकर स्वर्ग को प्राप्त हुए। यह गीत एक आध्यात्मिक संदेश है — कि अंत में न वैभव साथ जाता है, न शक्ति, केवल धर्म और कर्म ही आत्मा को मुक्ति दिलाते हैं।