У нас вы можете посмотреть бесплатно मोती डूंगरी गणेश मंदिर के चमत्कार की कहानी Moti Dungri Ganesh Ji Temple или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
Если кнопки скачивания не
загрузились
НАЖМИТЕ ЗДЕСЬ или обновите страницу
Если возникают проблемы со скачиванием видео, пожалуйста напишите в поддержку по адресу внизу
страницы.
Спасибо за использование сервиса ClipSaver.ru
सभी देवतओं में सवर्प्रथम पूजे जाने वाले महादेव पुत्र भगवन गणेश आदिदेव हैं जिन्होंने हर युग में अलग अवतार लिया। और धार्मिक नगरी जयपुर राजस्थान में स्थित यह गणेश मंदिर एक बहुत प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है मोती डूंगरी मंदिर जयपुर, राजस्थान में मोती डूंगरी पहाड़ी और मोती डूंगरी के किले के तल पर स्थित है। कहा जाता है कि मंदिर में स्थापित भगवान गणेश का प्रतीक पांच सौ साल से अधिक पुराना कहा जाता है, यहां दाहिनी सूंड वाले गणेशजी की विशाल प्रतिमा है जिसपर सिंदूर का चोला चढ़ाकर भव्य श्रंगार किया जाता है। इतिहासकार बताते हैं कि यहां स्थापित गणेश प्रतिमा जयपुर नरेश माधोसिंह प्रथम की पटरानी के पीहर मावली से 1761 ई. में लाई गई थी। मावली में यह प्रतिमा गुजरात से लाई गई थी। जयपुर के नगर सेठ पल्लीवाल यह मूर्ति लेकर आए थे और उन्हीं की देखरेख में मोती डूंगरी की तलहटी में गणेशजी का मंदिर बनवाया गया था। यह तो हम जानते है कि गुलाबी शहर- जयपुर एक प्रमुख पर्यटक आकर्षणों में से एक है। देश हर कोने से लोग भगवान गणेश को अपना सम्मान और प्रसाद समर्पित करने के लिए यहां आते हैं। प्रत्येक बुधवार को भगवान गणेश की बहुत ही अलग तरीके से पूजा की जाती है हर बुधवार को यहां मोती डूंगरी गणेश का मेला लगता है और जेएलमार्ग पर दूर तक वाहनों की कतारें लग जाती हैं। मोती डूंगरी गणेशजी के प्रति यहां के लोगों में श्रद्धा है। जेएलमार्ग से एमडी रोड पर स्थित यह मंदिर लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यह दो मंजिला भवन के बीच का जगमोहन ऊपर छत तक है तथा जगमोहन के चारों ओर दो मंजिला बरामदे हैं। माना जाता है कि नए वाहन की पूजा मोती डूंगरी गणेश मंदिर में की जाए तो वाहन शुभ होता है। भगवान गणेश का मोती डूंगरी मंदिर अपनी दिव्य शक्ति के लिए प्रसिद्ध है। यहां साल भर सैलानियों और पर्यटकों का तांता लगा रहता है। गणेश चतुर्थी, कृष्ण जन्माष्टमी, अन्नकूट और पौष बड़ा जैसे त्योहारों पर यह मंदिर आकर्षण का केंद्र होता है। शहर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का स्वाद लेने के लिए विद्वान और वास्तुकार यहां आते हैं। हजारों भक्त उत्सव की तैयारी में भाग लेते हैं और भगवान गणेश को अपना सम्मान देते हैं।