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🕉️ *शिवस्वरूप-वर्णन-स्तोत्रम्* (शिवरात्रि-विशेषम्) --- मंगलाचरणम् ॐ नमः शिवाय। नमः शिवाय शान्ताय सच्चिदानन्दरूपिणे। नमोऽस्तु नीलकण्ठाय विश्वमङ्गलमूर्तये॥ --- १. करुणामयः करुणासिन्धुः शम्भुः स जगदेकबान्धवः। अनाथनाथो दीनार्त-परित्राण-तत्परः॥ भक्तवत्सल ईशानः कृपया परिपालयेत्, शिवरात्रौ स्मृतो नित्यं हृदि भक्तेः प्रकाशकः॥ --- २. वैराग्यस्वरूपः भस्माङ्गरागी दिग्वासाः नागहारविभूषणः। निष्कामः निर्लेपभावः योगिनां योगिवल्लभः॥ श्मशानवासो विरक्तात्मा मायातीतो निरामयः, संसारभयभञ्जनः स शिवः परमेश्वरः॥ --- ३. ज्ञानस्वरूपः त्रिनेत्रधारी ज्ञानाग्निः अज्ञानतिमिरापहः। चन्द्रशेखरः शान्तात्मा प्रणवस्वरूपधृक्॥ वेदवेद्यः परं तत्त्वं चिन्मात्रं विश्वकारणम्, हृदि बोधयते नित्यं “शिवोऽहम्” इति भावनम्॥ --- ४. शक्तिसहितः अर्धनारीश्वरः देवः शक्त्यैक्यपरिपूर्णकः। शिवः शक्त्या युक्तो यः सृष्टिस्थितिलयकारणम्॥ ताण्डवेन प्रबोधयति जीवनस्य रहस्यकम्, लीलया धारयत्येव त्रैलोक्यस्य संचालनम्॥ --- ५. कालातीतः कालकालो महाकालः कालबन्धविमोचकः। मृत्युंजयो भयत्राता संसारार्णवतारकः॥ शिवरात्रौ यः स्मरेद् भक्त्या निश्चलमानसः, तस्य जन्ममरणभयम् नश्येत् शिवप्रसादतः॥ --- समर्पणम् त्वमेव माता च पिता त्वमेव। त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव। त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव। त्वमेव सर्वं मम देवदेव॥ हर हर महादेव॥ ॐ नमः शिवाय॥