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बजरंग कवच: हर बाधा से मुक्ति | Powerful Bajrang Kavach | Tuesday Hanuman Bhajan आज मंगलवार को सुनें | बजरंग कवचम् | Bajrang Kavach | शत्रु-भय-रोग-संकट नाश एवं सर्व प्रकार से रक्षा नमस्कार दोस्तों! आज मंगलवार के शुभ अवसर पर श्रवण करें श्री "बजरंग कवचम्" (Bajrang Kavacham)। यह कवच परम शक्तिशाली है जो आपके जीवन से हर प्रकार के शत्रु-भय, रोग, शोक और संकट का नाश करता है। हनुमान जी की असीम कृपा पाने के लिए इस कवच का नित्य पाठ करें या इसे श्रद्धापूर्वक सुनें। इस कवच के लाभ: नकारात्मक ऊर्जा और नजर दोष से रक्षा। शत्रुओं पर विजय और भय से मुक्ति। मानसिक शांति और आत्मविश्वास में वृद्धि। असाध्य रोगों और कष्टों का निवारण। Singer: Prabhat Kumar Lyrics: Traditional Label: @ChantingUniverse अगर आपको यह वीडियो पसंद आया हो, तो कृपया इसे Like करें, Comment में "जय श्री राम" लिखें और हमारे चैनल को Subscribe करना न भूलें। 🙏 Topics covered in this Video: Bajrang Kavach, Bajrang Kavacham, Hanuman Kavach, Tuesday Special Bhajan, Bajrang Kavach Lyrics, Powerful Hanuman Mantra, Bajrang Bali Kavach, Mangalwar Special, Hanuman Bhajan 2026, Raksha Kavach, शत्रु नाश कवच, Bajrang Kavacha Benefit, Bajrang Kavach Path, संकट मोचन हनुमान, Hanuman Raksha Kavach, Shri Bajrang Kavach, Shri Bajrang Kavacham, बजरंग कवच, बजरंग कवचम्, श्री बजरंग कवच, श्री बजरंग कवचम्, मंगलवार स्पेशल, #BajrangKavach #HanumanJi #MangalwarSpecial #BajrangBali #HanumanBhajan #SpiritualIndia #JayShreeRam #sankatmochanjaihanuman Lyrics (Shri Bajrang Kavach): || अथ श्री बजरंग कवचम् || ॐ नमो हनुमते नित्यं रामकार्यैकसाधिने । संकटानां विनाशाय कवचं संप्रवक्ष्यते ॥ १॥ लङ्कादहनकर्तारं भीमवेगपराक्रमम् । स्मरतां सर्वदा नृणां भयशोकविनाशनम् ॥२॥ यत्र यत्र स्थितो वीर तत्र सिद्धिः प्रतिष्ठिता । विघ्ना नश्यन्ति तत्रैव हनूमत् स्मरणाद्ध्रुवम् ॥३॥ शत्रवः परिहीयन्ते दुष्टबुद्ध्या समागता । हनुमद्भावसंपन्ने साधके न प्रसीदति ॥ ४ ॥ ग्रहदोषा विनश्यन्ति कालदोषा न बाधका । यस्य चित्ते स्थितो नित्यं वायुपुत्रो महाबल ॥५॥ अरण्ये रणमध्ये च गृहे वा संकटाकुले । स्मरणादेव वीरस्य रक्षां लभते मानवः ॥ ६ ॥ अमङ्गलं विनश्येत क्लेशः सन्ताप एव च । यत्र जप्तं हनूमन्नाम तत्र सौख्यं स्थिरं भवेत् ॥७॥ दुर्बुद्धिः क्षीयते शीघ्रं भयमोहौ प्रणश्यत । तेज: साहसयुक्तश्च भवत्येव न संशय ॥८॥ न च मन्त्रबलं न्यूनं न च साधनहीनता । यत्र भक्त्या पठेत् कवचं स सिद्धिमवाप्नुयात् ॥९॥ रामनामसमायुक्तं हनूमद्भक्तिवर्धनम् । एतत् कवचमज्ञात्वा साधना न फलप्रदा ॥१०॥ इदं विजयकवचं गुह्यं भक्त्या समाचरेत् । हनुमत् कृपया नित्यं सर्वकार्येषु सिद्धिदम् ॥११॥ || श्री बजरंग कवचम् संपूर्णम् || ११ पाठ