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ज्यादा पूजा करने वाले लोग दुखी क्यों रहते हैं | श्रीकृष्ण का कठोर सत्य | krishna vani ------ आज के समय में बहुत से लोग रोज़ पूजा-पाठ करते हैं, मंदिर जाते हैं, भजन सुनते हैं और मंत्र जपते हैं, फिर भी उनके जीवन में शांति नहीं होती। बाहर से वे बहुत धार्मिक दिखाई देते हैं, लेकिन भीतर से बेचैन, दुखी और परेशान रहते हैं। यह वीडियो इसी गहरे सवाल पर आधारित है – “ज्यादा पूजा करने वाले लोग दुखी क्यों रहते हैं?” और इसका उत्तर हमें श्रीकृष्ण की शिक्षाओं में मिलता है। श्रीकृष्ण बताते हैं कि दुख का कारण बाहर की परिस्थितियाँ नहीं होतीं, बल्कि हमारी सोच और दृष्टिकोण होता है। हम पूजा को एक उपाय समझ लेते हैं, लेकिन अपनी आदतों, स्वभाव और व्यवहार को बदलने की कोशिश नहीं करते। हम चाहते हैं कि भगवान हमारी समस्याएँ हटा दें, लेकिन हम अपने भीतर के क्रोध, ईर्ष्या, लालच और अहंकार को छोड़ने के लिए तैयार नहीं होते। इसी वजह से पूजा करने के बाद भी मन शांत नहीं होता। अक्सर लोग पूजा को सौदे की तरह करते हैं – “मैं यह करूँगा, तो भगवान मुझे वह देंगे।” यह भक्ति नहीं, बल्कि अपेक्षा है। जब हमारी अपेक्षाएँ पूरी नहीं होतीं, तो हम सबसे पहले भगवान से ही शिकायत करने लगते हैं। श्रीकृष्ण कहते हैं कि जो भगवान को पाने के लिए पूजा करता है, वह कभी दुखी नहीं होता, लेकिन जो भगवान से कुछ पाने के लिए पूजा करता है, वह हमेशा दुखी रहता है। इस वीडियो में बताया गया है कि सच्ची पूजा मंदिर में नहीं, बल्कि हमारे व्यवहार में दिखाई देनी चाहिए। जब हम दूसरों को माफ करना सीखते हैं, जब हम तुलना छोड़ देते हैं, जब हम बिना अपेक्षा के कर्म करते हैं, तभी असली शांति मिलती है। पूजा का असली अर्थ है – स्वयं को समझना और अपने भीतर परिवर्तन लाना। श्रीकृष्ण की वाणी हमें सिखाती है कि मन ही हमारा सबसे बड़ा मित्र भी है और सबसे बड़ा शत्रु भी। अगर मन अशांत है, तो कितनी भी पूजा कर लो, दुख नहीं जाएगा। लेकिन अगर मन शांत है, तो बिना किसी विशेष पूजा के भी जीवन आनंद से भर सकता है। यह वीडियो उन सभी लोगों के लिए है जो भक्ति तो करते हैं, लेकिन जीवन में संतोष और शांति नहीं महसूस करते। यह आपको सोचने पर मजबूर करेगा कि कहीं आप भी पूजा को सिर्फ एक आदत या दिखावा तो नहीं बना चुके हैं। श्रीकृष्ण की यह गहरी सीख आपको अपने भीतर झाँकने का अवसर देगी और बताएगी कि असली भक्ति बाहर नहीं, भीतर शुरू होती है। अगर आप सच में शांति चाहते हैं, तो इस वीडियो को पूरा देखें और श्रीकृष्ण की वाणी को सिर्फ सुनें नहीं, बल्कि अपने जीवन में उतारने की कोशिश करें। यही इस वीडियो का असली संदेश है – पूजा से नहीं, सोच से बदलती है ज़िंदगी।