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ज़कात और हमारी मनमानी ज़कात के असली हक़दार कौन हैं?#pleasesubscribe #trendingvideo #islamicvideo हदीस: हज़रत अब्दुल्लाह इब्न उमर रज़ि. से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया: “बुनियाल इस्लामु अला ख़म्स…” तरजुमा: इस्लाम की बुनियाद पाँच चीज़ों पर है: 1. अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं और मुहम्मद ﷺ अल्लाह के रसूल हैं 2. नमाज़ क़ायम करना 3. ज़कात देना 4. हज करना 5. रमज़ान के रोज़े रखना 📚 हवाला: सहीह बुख़ारी हदीस 8, सहीह मुस्लिम हदीस 16 ⸻ 2️⃣ ज़कात न देने वालों के लिए सख़्त सज़ा हदीस: हज़रत अबू हुरैरा रज़ि. से रिवायत है कि नबी ﷺ ने फ़रमाया: “जिसे अल्लाह ने माल दिया और उसने उसकी ज़कात अदा नहीं की…” तरजुमा: जिसे अल्लाह ने माल दिया और वह उसकी ज़कात नहीं देता, क़यामत के दिन उसका माल गंजे साँप की शक्ल में उसके गले में डाल दिया जाएगा। 📚 हवाला: सहीह बुख़ारी हदीस 1403 ⸻ 3️⃣ ज़कात देने से माल कम नहीं होता हदीस: “मा नक़सत सदक़तुन मिन माल” तरजुमा: सदक़ा (ज़कात) देने से माल कम नहीं होता। 📚 हवाला: सहीह मुस्लिम हदीस 2588 ⸻ 4️⃣ ज़कात गरीबों का हक़ है हदीस: जब नबी ﷺ ने मुआज़ इब्न जाबल रज़ि. को यमन भेजा तो फ़रमाया: “उनके अमीरों से लिया जाएगा और उनके ग़रीबों को दिया जाएगा।” 📚 हवाला: सहीह बुख़ारी हदीस 1395 ⸻ 5️⃣ क़यामत के दिन ज़कात का सवाब हदीस: “हर इंसान क़यामत के दिन अपने सदक़े के साए में होगा।” 📚 हवाला: मुस्नद अहमद ⸻ ✅ ख़ुलासा (Summary): ज़कात के बारे में हदीसों से पता चलता है कि: 1. ज़कात इस्लाम का अहम स्तंभ है। 2. ज़कात न देने वालों के लिए सख़्त अज़ाब की चेतावनी है। 3. ज़कात देने से माल पाक और बरकत वाला हो जाता है। 4. ज़कात गरीबों और जरूरतमंदों का हक़ है। 5. ज़कात देने वालों को क़यामत के दिन बड़ा सवाब मिलेगा। ⸻ अगर आप चाहें तो मैं ज़कात पर 10 बेहतरीन हदीसें अरबी, हिंदी तरजुमा और हवाले के साथ भी तैयार कर सकता हूँ — जो खुतबा, बयान या YouTube वीडियो के लिए बहुत काम आएँगी। [5:58 PM, 3/8/2026] Anaya Decoration: ज़कात को तीन-तीन लोगों में बाँटना ज़रूरी है — ऐसा क़ुरआन या सही हदीस में कोई पाबंदी नहीं है। ज़कात एक व्यक्ति को भी दी जा सकती है और कई लोगों में भी बाँटी जा सकती है। क़ुरआन ने सिर्फ़ जिन लोगों को ज़कात दी जा सकती है उनके आठ प्रकार बताए हैं। ⸻ 1️⃣ क़ुरआन में ज़कात के हक़दार अल्लाह तआला ने क़ुरआन में फ़रमाया: “इन्नमस्सदकातु लिल्फ़ुक़राइ वल मसाकीनी वल आमिलीन अलेहा वल मुअल्लफ़ति क़ुलूबुहुम व फ़िर्रिक़ाबि वल ग़ारिमीन व फ़ी सबीलिल्लाह व इब्निस्सबील” तरजुमा: ज़कात तो सिर्फ़ इन लोगों के लिए है: 1. फ़क़ीर 2. मिस्कीन (बहुत ग़रीब) 3. ज़कात वसूल करने वाले 4. जिनके दिलों को इस्लाम की तरफ़ लाना हो 5. ग़ुलामों को आज़ाद कराने में 6. क़र्ज़दार 7. अल्लाह के रास्ते में 8. मुसाफ़िर 📖 हवाला: क़ुरआन सूरह तौबा 9:60 ⸻ 2️⃣ एक व्यक्ति को भी ज़कात दी जा सकती है हदीस में आता है कि नबी ﷺ ने फ़रमाया: “ज़कात अमीरों से ली जाएगी और ग़रीबों को दी जाएगी।” 📚 हवाला: सहीह बुख़ारी हदीस 1395 इस हदीस से पता चलता है कि ज़कात ज़रूरतमंद को दी जाती है, चाहे वह एक व्यक्ति हो या कई लोग। ⸻ 3️⃣ उलमा की राय बहुत से इस्लामी विद्वानों ने कहा है: • ज़कात एक ही ग़रीब को भी दी जा सकती है • या कई ग़रीबों में बाँटी जा सकती है जैसे फ़ुक़हा (इस्लामी विद्वान) ने लिखा है कि ज़रूरत के हिसाब से ज़कात देना बेहतर है। 📚 हवाला: फ़त्हुल बारी, अल‑मुग़नी ⸻ ✅ ख़ुलासा: • ज़कात को तीन लोगों में बाँटना ज़रूरी नहीं है। • ज़कात एक व्यक्ति को भी दी जा सकती है। • ज़कात कई ग़रीबों में भी बाँटी जा सकती है। • क़ुरआन ने सिर्फ़ 8 प्रकार के लोगों को ज़कात का हक़दार बताया है। 1. ज़कात और हमारी मनमानी | क़ुरआन और हदीस की रोशनी में सच क्या है? 2. क्या हम अपनी मर्ज़ी से ज़कात देते हैं? | क़ुरआन और हदीस का हुक्म 3. ज़कात सही लोगों को दे रहे हैं या अपनी मनमानी कर रहे हैं? 4. ज़कात का सही तरीका क्या है? | क़ुरआन और हदीस की रोशनी में 5. ज़कात किसे देनी चाहिए? | हमारी मनमानी या इस्लाम का हुक्म 6. ज़कात में गलती न करें | क़ुरआन और हदीस की महत्वपूर्ण बात 7. ज़कात के असली हक़दार कौन हैं? | इस्लामी हुक्म समझिए 8. ज़कात और हमारी मनमानी | एक अहम इस्लामी चर्चा