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#bihargeography #बिहारकाभूगोल #geography #bihargk #BPSC #ssc #railway #bank #factandtheory बिहार के भौतिक भूगोल और क्षेत्रीय विभाजन: एक विस्तृत ब्रीफिंग यह दस्तावेज़ बिहार के भौतिक भूगोल, क्षेत्रीय विविधताओं, प्रमुख पहाड़ियों और विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्रों का एक व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। यह विवरण पूर्णतः उपलब्ध स्रोतों पर आधारित है। 1. उत्तर गंगा के मैदान का क्षेत्रीय विभाजन क्षेत्रीय विविधता के आधार पर उत्तर गंगा के मैदान को चार मुख्य भागों में विभाजित किया गया है: क्षेत्र मुख्य विशेषताएँ विस्तार/जिले भाबर क्षेत्र 10 किमी चौड़ी संकीर्ण पट्टी; रेत और गाद का जमाव। पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, सुपौल, मधुबनी, अररिया और किशनगंज। बंगर क्षेत्र पुराने जलोढ़ (आलूवियल) मिट्टी का जमाव; बाढ़ मुक्त क्षेत्र। बिहार का उत्तर-पश्चिमी भाग। खादर क्षेत्र नए जलोढ़ का जमाव; प्रतिवर्ष बाढ़ द्वारा लाई गई सिल्ट से निर्मित। पश्चिम में गंडक से लेकर पूर्व में कोसी तक (उत्तर और उत्तर-पूर्वी मैदान)। चौर (मन) नदियों और बारिश द्वारा निर्मित निम्न-तल वाले क्षेत्र और गोखुर (Oxbow) झीलें। लखनी चौर, सुंदरपुर चौर, टटेरिया चौर, मधुपुर मन, सरैया मन आदि। -------------------------------------------------------------------------------- 2. दक्षिण बिहार का मैदान यह मैदान उत्तर बिहार के मैदान से छोटा है और गंगा के दक्षिण से छोटा नागपुर पठार के उत्तर तक फैला है। आकृति और विस्तार: यह त्रिकोणीय आकार का है, जो पश्चिम में चौड़ा और पूर्व में संकरा है। इसकी सीमा उत्तर-पूर्व में राजमहल पहाड़ियों और उत्तर-पश्चिम में कैमूर पठार द्वारा निर्धारित होती है। ढलान: इसकी ढलान दक्षिण से उत्तर (गंगा की ओर) है, लेकिन उत्तर बिहार के मैदान की तुलना में यह ढलान अधिक तीव्र है। प्रकृति: यह क्षेत्र अपेक्षाकृत स्थिर है और कुछ सीमित क्षेत्रों को छोड़कर बाढ़ के लिए प्रवण (prone) नहीं है। यह मैदान कर्मनाशा, सोन, पुनपुन, फल्गु और कियूल जैसी नदियों के अवसादों से बना है। -------------------------------------------------------------------------------- 3. दक्षिण बिहार के विशिष्ट उप-क्षेत्र ताल क्षेत्र परिभाषा: यह एक प्याले के आकार का निम्न भूमि क्षेत्र है जो मानसून के दौरान जलमग्न हो जाता है। विस्तार: पटना से मोकामा तक (फतुहा से लखीसराय)। इसकी चौड़ाई लगभग 25 किमी है। महत्वपूर्ण तथ्य: इसे "बिहार की बीमारी" के रूप में भी जाना जाता है। यहाँ पुनपुन, पैमार और फल्गु जैसी नदियाँ गंगा के ऊंचे तट के कारण सीधे नहीं मिल पातीं और समानांतर बहते हुए विशाल जल निकाय बनाती हैं। मध्य दक्षिण बिहार मैदान (मगध मैदान) सीमाएँ: उत्तर में गंगा, पूर्व में ताल क्षेत्र, दक्षिण में पहाड़ी क्षेत्र और पश्चिम में सोन नदी। उप-विभाग: गंगा का बाढ़ मैदान, गंगा तट के समानांतर निम्न भूमि, पुराने अवसाद का मैदान और पठार के किनारे की ऊँची भूमि। चन्दन और कियूल मैदान चन्दन मैदान: बिहार के बांका और भागलपुर जिलों को कवर करता है। इसका उत्तरी भाग उपजाऊ है जबकि दक्षिणी भाग जंगलदार और उबड़-खाबड़ है। कियूल मैदान: चन्दन मैदान के पश्चिम में स्थित है। यहाँ खड़गपुर पहाड़ियाँ, कियूल और मन नदी के बीच जल विभाजक का कार्य करती हैं। शाहाबाद मैदान यह दक्षिण बिहार के सबसे पश्चिमी हिस्से में स्थित एक विशाल निम्नभूमि है, जो गंगा, सोन और कर्मनाशा नदियों तथा कैमूर पठार से घिरी है। -------------------------------------------------------------------------------- 4. प्रमुख पहाड़ियाँ और चोटी की ऊँचाई बिहार की पहाड़ियों को उनके स्थान और विशेषताओं के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है: क्षेत्रीय वितरण गया क्षेत्र: रामशिला (214 मीटर), कटारी, ब्रह्मयोनि और प्रेतशिला पहाड़ियाँ। यहाँ की चट्टानें पत्तेदार ग्नाइस और क्रिस्टलीय प्रकार की हैं। राजगीर/नालंदा क्षेत्र: वैभवगिरी (380 मीटर), विपुलगिरी, रत्नगिरी, उदयगिरी और सोनागिरी। यह क्षेत्र प्राचीन राजगृह नगर को घेरे हुए है। मुंगेर और जमुई: खड़गपुर पहाड़ियाँ (510 मीटर), गिद्धेश्वर और चकाई पठार। यहाँ गर्म जल के स्रोत (कचू में) पाए जाते हैं। प्रमुख चोटियों की ऊँचाई (तालिका) चोटी/पहाड़ी ऊँचाई (मीटर में) सोमेश्वर पहाड़ी 880 दुर्वासा रही पहाड़ी 661 शृंगिरिखी पहाड़ी 555 महाबार पहाड़ी 549 सतपहरी पहाड़ी 542 खड़गपुर पहाड़ी 510 महेर पहाड़ी 482 राजगीर पहाड़ी 466 -------------------------------------------------------------------------------- 5. बिहार के 10 भौगोलिक क्षेत्र प्रो. इनायत अहमद और प्रो. राम प्रवेश सिंह के अनुसार, बिहार को 10 विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्रों में वर्गीकृत किया गया है: 1. तराई क्षेत्र: उत्तर-पश्चिमी और उत्तर-पूर्वी सीमा पर स्थित। भारी वर्षा, दलदली भूमि और घने जंगलों (धान, जूट, गन्ना) के लिए प्रसिद्ध। 2. घाघरा-गंडक दोआब: सारण, सिवान, गोपालगंज में स्थित। चीनी उद्योग का प्रमुख केंद्र। 3. गंडक-कोसी क्षेत्र: मध्य उत्तर बिहार। चीनी, फल प्रसंस्करण और डेयरी उद्योग (बरौनी केंद्र) का समर्थन करता है। 4. कोसी-महानंदा क्षेत्र: उत्तर-पूर्वी बिहार। अत्यधिक वर्षा और बाढ़ के कारण विकास सीमित। 5. कर्मनाशा-गंगा दोआब: भोजपुर, कैमूर, बक्सर। सिंचाई नहर आधारित चावल की खेती। 6. सोन-कियूल दोआब: दक्षिण बिहार के मध्य जिले। सूखे की समस्या, रेशम, सीमेंट और हस्तशिल्प उद्योग। 7. पूर्व-केन्द्रीय बिहार मैदान: भागलपुर (रेशम), मुंगेर (तंबाकू और डेयरी) और बांका। 8. गंगा-दियारा क्षेत्र: गंगा के किनारों पर स्थित। रबी और सब्जी की फसलों के लिए अत्यधिक उपजाऊ। 9. कैमूर पठार: पत्थर, पाइराइट (अमझोर) और चूना पत्थर (बंजुरी सीमेंट उद्योग) के लिए प्रसिद्ध। 10. अभ्रक (Mica) क्षेत्र: मुंगेर, जमुई, गया और नवादा। अभ्रक और बालथर मिट्टी की उपस्थिति।