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हज़रत उमर (रज़ि.) की हत्या 644 ईस्वी में मदीना में एक फ़ारसी गुलाम अबू लुलु फिरोज़ (Piruz Nahavandi) ने की थी. उसने सुबह की नमाज़ के दौरान हज़रत उमर पर दोधारी खंजर से हमला किया, जब वे मदीना में नमाज़ पढ़ा रहे थे। इस हमले में वे गंभीर रूप से घायल हो गए और तीन दिन बाद उनकी मृत्यु हो गई, जिसके बाद उन्हें पैगंबर मुहम्मद (PBUH) के बगल में दफनाया गया. हमलावर: अबू लुलु फिरोज़ (एक फ़ारसी गुलाम, जो ईसाई था). कैसे: नमाज़ (फ़ज्र) के दौरान, खंजर से पीछे से वार किया. स्थान: मदीना, मस्जिद-ए-नबवी. कारण: यह माना जाता है कि वह व्यक्तिगत दुश्मनी या फ़ारस की हार का बदला लेने के लिए यह हमला किया. हज़रत उमर रज़ि. ने अपने कातिल को माफ कर दिया था और अपनी वफात से पहले छह लोगों की एक समिति (शूरा) बनाई थी जो अगले खलीफा का चुनाव कर सके.