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भारत के इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं जो केवल शासक नहीं, बल्कि एक युग होते हैं। ऐसा ही एक नाम है— श्री छत्रपति शिवाजी महाराज। एक ऐसा योद्धा जिसने पहाड़ों से उठकर एक साम्राज्य की नींव रखी… जिसने गुलामी नहीं, बल्कि स्वराज्य का सपना देखा। 🌄 बाल्यकाल और प्रेरणा 19 फरवरी 1630… महाराष्ट्र के शिवनेरी किले में जन्म हुआ एक ऐसे बालक का, जो आगे चलकर इतिहास बदल देगा। उनके पिता थे—शहाजी भोंसले, और माता—माता जिजाबाई, जिनकी कहानियों और संस्कारों ने शिवाजी के मन में धर्म, न्याय और मातृभूमि के लिए प्रेम भर दिया। गुरु दादोजी कोंडदेव के संरक्षण में शिवाजी को युद्धकला, प्रशासन और नीति का प्रशिक्षण मिला। 🏹 स्वराज्य का संकल्प किशोरावस्था में ही शिवाजी ने एक सपना देखा— हिंदवी स्वराज्य। एक ऐसा राज्य जहाँ जनता सुरक्षित हो, किसानों पर अत्याचार न हों, और न्याय सर्वोपरि हो। उन्होंने तोरणा, राजगढ़ और कोंढाणा जैसे दुर्गों पर अधिकार कर अपनी शक्ति का विस्तार शुरू किया। ⚔️ युद्धनीति और वीरता शिवाजी महाराज युद्ध के मैदान में अद्वितीय थे। उन्होंने गनिमी कावा नामक युद्धनीति अपनाई— तेज़ आक्रमण, अचानक हमला और पहाड़ी रास्तों का चतुर उपयोग। 1659 में अफ़ज़ल ख़ान के साथ प्रतापगढ़ की ऐतिहासिक भेंट… और उनकी वीरता की गूंज पूरे दक्कन में फैल गई। 🚢 नौसेना और सुरक्षा शिवाजी महाराज ने भारत की पहली संगठित नौसेनाओं में से एक का निर्माण किया। कोंकण तट की रक्षा के लिए समुद्री दुर्ग बनाए गए— जैसे सिंधुदुर्ग और विजयदुर्ग। 🏛️ शासन व्यवस्था शिवाजी केवल योद्धा नहीं थे— वे एक दूरदर्शी प्रशासक भी थे। उन्होंने अष्टप्रधान परिषद बनाई— जो राज्य के आठ प्रमुख विभागों का संचालन करती थी। किसानों की रक्षा, न्यायपूर्ण कर व्यवस्था और धार्मिक सहिष्णुता उनके शासन की पहचान थी। 👑 राज्याभिषेक 1674… रायगढ़ दुर्ग पर शिवाजी महाराज का भव्य राज्याभिषेक हुआ। वे बने— छत्रपति। यह केवल एक ताज पहनना नहीं था— यह स्वतंत्रता की घोषणा थी। 🕊️ अंतिम समय और अमर विरासत 3 अप्रैल 1680… रायगढ़ में शिवाजी महाराज का निधन हुआ। लेकिन उनका विचार अमर हो गया। स्वराज्य की लौ जल चुकी थी— जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रही। ✨ समापन आज भी उनका नाम सुनते ही साहस, सम्मान और स्वतंत्रता की भावना जाग उठती है। जय भवानी! जय शिवाजी!