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नवग्रह पूजन और हवन कुंडली में नौ ग्रहों (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु) के अशुभ प्रभावों को कम करने और उनके सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने के लिए किया जाने वाला एक शक्तिशाली वैदिक अनुष्ठान है। यह पूजा जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सफलता लाने के लिए की जाती है। मुख्य विवरण: उद्देश्य: ग्रहों के असंतुलन को दूर करना और ज्योतिषीय समस्याओं का निवारण। सामग्री: नवग्रह समिधा (लकड़ी), हवन सामग्री, घी, कलश, नवग्रह यंत्र, और नौ प्रकार के अनाज। विधि: गणेश पूजन के बाद नवग्रहों का आह्वान, मंत्र जाप, और समिधा की आहुति (आहुति ॐ मंत्र के साथ)। प्रमुख मंत्र: "ॐ आ कृष्णेन रजसा वर्तमानो..."। नवग्रह पूजा और हवन की विधि: तैयारी: घर या मंदिर के पूजा स्थल को साफ करें और नवग्रह यंत्र या प्रतिमा स्थापित करें। गणेश वंदना: पूजा की शुरुआत भगवान गणेश के पूजन से करें। संकल्प: दाहिने हाथ में जल और अक्षत लेकर पूजा का उद्देश्य (मनोकामना) का उच्चारण करें। ग्रह स्थापना और मंत्र जाप: नवग्रहों के मंत्रों का पाठ करें और उनकी मूर्तियों या यन्त्र पर फूल और अक्षत अर्पित करें। हवन (यज्ञ): अग्नि प्रज्वलित करें और प्रत्येक ग्रह की समिधा व हवन सामग्री को घी में डुबोकर आहुति दें (प्रत्येक ग्रह के लिए विशिष्ट मंत्र का उपयोग करें)। पूर्णाहुति: अंत में, पूर्ण आहुति के साथ आरती करें और शांति पाठ करें। नवग्रहों की समिधा (लकड़ी): सूर्य: आक (Arka) चंद्र: पलाश (Palash) मंगल: खदिर (Khadir) बुध: अपामार्ग (Apamarga) गुरु: पीपल (Pipal) शुक्र: उदुम्बर (Udumbara) शनि: शमी (Shami) राहु: दूर्वा (Durva) केतु: कुश (Kusha) महत्व और लाभ: नकारात्मक ऊर्जा कम करना: यह अनुष्ठान ग्रहों के दोष को शांत करता है और जीवन में आ रही बाधाओं को दूर करता है। समृद्धि और स्वास्थ्य: इससे परिवार में सुख-शांति, बेहतर स्वास्थ्य और सफलता आती है। आध्यात्मिक विकास: यह घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। अनुष्ठान को विधि-विधान से संपन्न करने के लिए एक कुशल पंडित की सलाह लेना उत्तम माना जाता है। त्र्यंबकेश्वर मंदिर में नवग्रह ... नवग्रह पूजन और हवन (नौ ग्रहों की पूजा) वैदिक ज्योतिष में ग्रहों के नकारात्मक प्रभावों को कम करने और सुख-समृद्धि पाने का अनुष्ठान है। यह सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु को शांत करने के लिए मंत्रों और हवन सामग्री के साथ किया जाता है। मुख्य मंत्र "ॐ ब्रह्मामुरारि..." से सभी ग्रहों की शांति की प्रार्थना की जाती है। नवग्रह पूजन और हवन: मुख्य विवरण (Hindi) उद्देश्य: ग्रहों के प्रतिकूल गोचर से होने वाले कष्टों से मुक्ति, करियर में सफलता, स्वास्थ्य और पारिवारिक सुख। पूजन विधि: शुद्धिकरण: स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें। गणेश पूजा: किसी भी पूजा से पहले भगवान गणेश का आह्वान करें। स्थापना: नवग्रह यंत्र या 9 ग्रहों की मूर्तियों की स्थापना करें। मंत्र उच्चारण: नवग्रह स्तोत्र का पाठ करें। नवग्रह मंत्र (हिंदी में): "ॐ ब्रह्मा मुरारी त्रिपुराकारी भानु शशि भूमि सुतो बुधश्च। गुरुश्च शुक्र शनि राहु केतवः सर्वे ग्रहा शांति करा भवंतु।।" अर्थ: ब्रह्मा, विष्णु और महेश (त्रिदेव) सभी ग्रहों (सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु, केतु) को शांत करें। हवन सामग्री: हवन में गेहूं (सूर्य), चावल (चंद्र), लाल दाल (मंगल), हरी मूंग (बुध), चना दाल (गुरु), सफेद बीन्स (शुक्र), काले तिल (शनि), उड़द दाल (राहु), और कुलथी (केतु) का प्रयोग किया जाता है। सर्वोत्तम समय: मुख्य रूप से मंगलवार, शनिवार, या गुरुवार को या किसी भी शुभ दिन। नवग्रह कथा (संक्षेप में): पौराणिक कथाओं के अनुसार, ऋषि कालवा कुष्ठ रोग से पीड़ित थे और उन्होंने नवग्रहों की आराधना की थी। बाद में शिव जी ने ग्रहों को श्राप से मुक्त कर,