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इस अध्याय में श्रीमद भागवत महापुराण की करुणा और वैराग्य की धारा और भी गहरी हो जाती है। यहाँ विदुर और उद्धव के बीच हुआ संवाद प्रस्तुत है, जो भगवान श्रीकृष्ण के पृथ्वी से प्रस्थान के पश्चात घटित होता है। यह संवाद केवल इतिहास नहीं, बल्कि भक्ति, ज्ञान और शरणागति का सजीव पाठ है। विदुर श्रद्धा और विनय के साथ उद्धव से भगवान श्रीकृष्ण की अंतिम लीलाओं, उनके उपदेशों और उनके प्रस्थान के रहस्यों के विषय में पूछते हैं। उद्धव, जो भगवान के अत्यंत प्रिय सेवक हैं, वियोग की पीड़ा से भरे हुए भी स्थिर चित्त से भगवान की महिमा का वर्णन करते हैं। उद्धव बताते हैं कि भगवान ने अपनी लीला पूर्ण कर ली थी और जीवों को भक्ति का मार्ग दिखाकर अपने परम धाम को प्रस्थान कर गए। वे यह भी समझाते हैं कि भगवान का प्रस्थान सामान्य मृत्यु नहीं है, बल्कि एक दिव्य लीला है, जो अज्ञानग्रस्त जीवों के कल्याण के लिए हुई। यह अध्याय हमें सिखाता है कि सच्चा ज्ञान वही है जो भक्त के हृदय में विनय, वैराग्य और भगवान के प्रति अखंड स्मरण उत्पन्न करे। विदुर और उद्धव का यह संवाद हर साधक को यह प्रेरणा देता है कि जीवन की प्रत्येक परिस्थिति में भगवान की शरण ही परम आश्रय है। 🪔 “भगवान की लीला को समझना ही जीवन की सच्ची सिद्धि है।” 🙏 Support the Seva If you like the video, please: 👍 Like 💬 Comment 🔔 Subscribe 🔗 Share this video with others searching for spiritual wisdom. Your support helps divine knowledge reach more souls. 00:00 Lecture 05:50 Discussion 19:15 Summary #श्रीमदभागवतमहापुराण #स्कंध3अध्याय4 #विदुर #उद्धव #भागवतसंवाद #भगवद्भक्ति #वैराग्य #सनातनधर्म