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कार्तिक मास रो धर्म | भक्ति स्वर – कुमकुम सोनी | Kartik Maas Bhajan #kartikbhajan #kartikmaas #kumkumsoni #krishnabhajan #rajasthani #traditional #culturalheritage कार्तिक मास रो धर्म — एक पारंपरिक राजस्थानी लोक भजन, जिसमें कार्तिक मास के पवित्र नियम, स्नान, दान और भक्ति का महत्व बड़े ही भावपूर्ण शब्दों में गाया गया है। इस भजन में राधा, गोपियों और ठाकुर जी के प्रति आस्था, प्रेम और समर्पण की भावना झलकती है। कार्तिक मास के दौरान यह गीत घर-घर में गाया जाता है — स्नान, दीपदान और तुलसी पूजन की पवित्रता को समर्पित। भक्ति स्वर – कुमकुम सोनी एक शांत, सौम्य और आस्थामयी प्रस्तुति, जो आपको कार्तिक माह की दिव्यता का अनुभव कराएगी। Music - Indramani Sharma 🌕 About Kartik Maas: हिंदू धर्म में कार्तिक मास को सबसे पवित्र महीना माना गया है। इस महीने में प्रभात स्नान, दीपदान, तुलसी पूजन और भगवान विष्णु की आराधना से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। “Kartik Maas Ro Dharm” is a soulful Rajasthani devotional bhajan sung by Kumkum Soni, describing the sacred rituals and dharma of the holy month of Kartik — bathing, fasting, and offering devotion to Lord Krishna and Tulsi Devi. A musical tribute to the timeless tradition of Kartik Maas and the glory of faith that unites generations. Lyrics 🎵 कार्तिक नहास्या भगवान आसोज उतरिया बहनों, कार्तिक लाग्यो, शरद पूनम को उगयो चांद । कार्तिक नहास्या भगवान ॥ मैं थाने पूछा, म्हारा श्री ओ ठाकुर जी, कार्तिक को धर्म बताय । कार्तिक नहास्या भगवान ॥ कार्तिक न्हाया राधा, माड़ा हो जास्यो, ओळमो देसी थारी मां । कार्तिक नहास्या भगवान ॥ चालो ए राधा रुक्मण, जोशी घर चालो तो, कार्तिक रो धर्म बताय । कार्तिक नहास्या भगवान ॥ सात सहेलियां ने राधा, साथ लीजो, गंगा रो करीजो सीनान । कार्तिक नहास्या भगवान ॥ सोना चांदी रा राधा, कलश मंगाओ तो, रेशम री डोर बंटाय । कार्तिक नहास्या भगवान ॥ एक महीने राधा, अन्न मत खायजो तो, तिसु ही करिजो निगौट । कार्तिक नहास्या भगवान ॥ गंगा के धोरे, राधा विप्र जिमाओ तो, सोना को टक्को दिजो दान । कार्तिक नहास्या भगवान ॥ सोलह सौ गौ ने, राधा दान दिजो तो, सोलह सौ ने चुनड़ी ओढ़ाय । कार्तिक नहास्या भगवान ॥ इतरा जोशीजी रा बेटा, झूठा मत बोलो तो, कोई नहीं न्हावेली संसार । कार्तिक नहास्या भगवान ॥ लाओ ए राधा रुक्मण, पोथी पाना तो, कार्तिक को धर्म बताय । कार्तिक नहास्या भगवान ॥ घर के आंगणिये, राधा कुंड खुदावो तो, बिको ही करजो स्नान । कार्तिक नहास्या भगवान ॥ तांबा पीतल रा राधा, कलश मंगाओ तो, सुत्तो ही डोर बंटाय । कार्तिक नहास्या भगवान ॥ एक महीने राधा, एक बेला जीमो तो, ग्यारस करिजो निगोट । कार्तिक नहास्या भगवान ॥ घर के आंगणिये, राधा विप्र जिमाओ तो, तांबा को टक्को दीजो दान । कार्तिक नहास्या भगवान ॥ एक गौ ने राधा, दान दीजो तो, एक ने चुनड़ी ओढ़ाय । कार्तिक नहास्या भगवान ॥ अबकी जोशीजी रा बेटा, साच बोलिया तो, अबकी न्हावेली सब संसार । कार्तिक नहास्या भगवान ॥ कार्तिक न्हायोरो फल होय, कार्तिक नहास्या भगवान ॥ Kartik Maas Ro Dharm Kartik Maas Bhajan Kumkum Soni Bhajan Rajasthani Bhajan Marwadi Bhajan Kartik Maas Ro Geet Kartik Bhakti Song Tulsi Pujan Bhajan Kartik Snan Bhajan Radhaji Bhajan Rukman Bhajan Ganga Snan Bhajan Rajasthani Folk Bhajan Devotional Song Rajasthan Kartik Maas Ro Dharma Kartik Mahima Bhajan Kartik Maas Ro Dharam Song Kartik Maas Ki Mahima Kartik Month Bhajan Kartik Aarti