У нас вы можете посмотреть бесплатно DAY 6 श्रीमद् भागवत कथा आचार्य सर्वेश कुमार शुक्ल जी или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
Если кнопки скачивания не
загрузились
НАЖМИТЕ ЗДЕСЬ или обновите страницу
Если возникают проблемы со скачиванием видео, пожалуйста напишите в поддержку по адресу внизу
страницы.
Спасибо за использование сервиса ClipSaver.ru
आप श्रवण कर रहे हैं गुरुकुल में दिनांक - 04 से 10 फरवरी 2026 तक आयोजित अष्टोत्तरशत श्रीमद्भागवतमहापुराण पारायण एवं श्रीमद् भागवत कथा || कथा व्यास - आचार्य सर्वेश शुक्ल जी महाराज तीर्थ नैमिषारण्य || संयोजक - श्री बृजनंदन शास्त्री जी ( बृजेश जी ) आयोजक - आत्मानन्द संस्कृत शिक्षण संस्थान नैमिषारण्य || सम्पर्क सूत्र - 8887822528, 7317239682 || आगामी कार्यक्रम ( 12 वां वार्षिकोत्सव ) सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार दिनांक 11 फरवरी 2026 दिन बुधवार...मुख्य यजमान [12:01 pm, 5/2/2026] Alok Kumar Mishra: श्रीमती मीनाक्षी हिमांशु बागड़ी जी - हैदराबाद, श्रीमती प्रियंका दीप शाह - मुम्बई, श्रीमती तारा द्वारिका प्रसाद सोमानी - सूरत, श्री भगवती मदन लाल चाण्डक - कोलकाता, श्रीमती प्रभा पंकज तोष्णीवाल - कोलकाता, श्रीमती नेहा देवकीनंदन काबरा- बैंगलोर, श्रीमती रुचिका सिद्धार्थ फोमरा - कोलकाता, श्री भगवती गोपीकिशन मोदड़ा- कोलकाता, श्री राज कुमार मोहता - दिल्ली, श्रीमती पुष्पा देवी मोहता - दिल्ली श्रीमती मीनाक्षी हिमांशु बागड़ी जी - हैदराबाद, श्रीमती प्रियंका दीप शाह - मुम्बई, श्रीमती तारा द्वारिका प्रसाद सोमानी - सूरत, श्री भगवती मदन लाल चाण्डक - कोलकाता, श्रीमती प्रभा पंकज तोष्णीवाल - कोलकाता, श्रीमती नेहा देवकीनंदन काबरा- बैंगलोर, श्रीमती रुचिका सिद्धार्थ फोमरा - कोलकाता, श्री भगवती गोपीकिशन मोदड़ा- कोलकाता, श्री राज कुमार मोहता - दिल्ली, श्रीमती पुष्पा देवी मोहता - दिल्ली श्रीमती गीता वीरेंद्र वाजपेई - केसरीगंज सीतापुर, स्वर्गीय श्री रामकिशन दीक्षित - खद्दीपुर चैनसिंह हरदोई, श्री रोहित मिश्र - तेरवा मनिकापुर, श्री जैपाल मिश्र - तेरवा मनिकापुर, श्री विनीत कुमार मिश्र- लखनऊ, श्री श्रुतरंजन मिश्र - लखनऊ, श्रीमती अलका मिश्रा - लखनऊ, श्री प्रदीप शुक्ला - लखनऊ, श्री करुणाशंकर अवस्थी - लखनऊ, श्री रामगोपाल सोमानी - सूरत, श्री सियाराम मिश्र - सीतापुर, स्वर्गीया सियावती मिश्रा - सीतापुर, स्वर्गीय शाश्वत मिश्र - लखनऊ, स्वर्गीय गिरिजा शंकर शुक्ल - पतौंजा, स्वर्गीया रामदुलारी शुक्ला - पतौंजा, स्वर्गीय राम नरेश शुक्ल - पतौंजा, स्वर्गीय बच्चूलाल यज्ञसेनी - बिसवां, स्वर्गीय राम कली कंचन सिंह - बिराहिमपुर, स्वर्गीया गिरीश कुमारी - सखौरा, स्वर्गीय सोबरन लाल मिश्र - सिधौली, श्री राम कुमार मिश्र - सिधौली, स्वर्गीय प्रभूदयाल - हरदोई, स्वर्गीय प्यारेलाल - हरदोई, स्वर्गीया कौशल्या देवी - हरदोई, स्वर्गीया रामपती - ठाकुर नगर नैमिषारण्य, स्वर्गीया कान्ती देवी - अन्दौली, स्वर्गीय अंशू वैश्य - ठाकुर नगर नैमिषारण्य, श्रीमती सीताबाई धनराज जी लाखोटिया - मालेगांव, श्री बाबूलाल जी जाजू - दिल्ली, श्री राकेश कुमार जाजू - दिल्ली, श्री हनुमान मालमालू - मुम्बई, श्रीमती संपत देवी - मुम्बई, श्री प्रदीप सोनाल पुंगलिया- मुम्बई, श्रीमती विमला गिरी - सीतापुर, श्रीमती सीता भंवरलाल जी किंजड़ा- मुम्बई, श्री महावीर जी मालेगांव - विशाखापत्तनम, श्री नन्दन जी राठी- गुजरात, श्रीमती वंदना पाण्डेय - लखनऊ, श्रीमती प्रेमलता - लखनऊ, श्री संजीव बाजपेई - लखनऊ, श्री गणेश अवस्थी - लखनऊ, श्रीमती पूनम गिरी - सीतापुर सहित 108 यजमान परिकर पोथी यजमान बनकर भगवान की अमृतमयी कथा रसास्वादन कर भगवद्भक्ति का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। भागवत महापुराण के पाठ का यजमान बनने के लाभ 1. परम आध्यात्मिक लाभ श्रीमद्भागवत को भगवान श्रीकृष्ण की कथा-रूप अमृतधारा माना गया है। श्रद्धा से श्रवण-पाठ कराने पर भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की वृद्धि होती है। शास्त्रों में कहा गया है कि इससे पापों का क्षय और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। 2. मन और जीवन पर प्रभाव कथा-श्रवण से मन की शांति, सकारात्मक सोच और संतोष बढ़ता है। श्रीकृष्ण की लीलाओं व भक्तों की कथाओं से धैर्य, करुणा और धर्मपालन की प्रेरणा मिलती है। परिवार में सद्भाव और आध्यात्मिक वातावरण बनता है।3. पारिवारिक व सामाजिक कल्याण यजमान बनने से घर में मंगल, सुख-समृद्धि और शांति की कामना की जाती है। समाज में धार्मिक सम्मान और सेवा-भाव की प्रतिष्ठा बढ़ती है। सामूहिक कथा से सत्संग और सांस्कृतिक एकता मजबूत होती है। 4. शास्त्रीय महिमा श्रीमद्भागवत को कलियुग का प्रमुख धर्मग्रंथ कहा गया है, जिसका श्रवण ही भक्ति का सरल साधन माना गया है। सप्ताह या नियत पाठ कराने वाले यजमान को विशेष पुण्य प्राप्त होने का वर्णन मिलता है।