У нас вы можете посмотреть бесплатно Monday MARK मंडे मार्क STAPLER स्टेपलर March 09, 2026 Hindi или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
Если кнопки скачивания не
загрузились
НАЖМИТЕ ЗДЕСЬ или обновите страницу
Если возникают проблемы со скачиванием видео, пожалуйста напишите в поддержку по адресу внизу
страницы.
Спасибо за использование сервиса ClipSaver.ru
@RajeevManiarMakeyourMARK मंडे मार्क "स्टेपलर" एक बार ऑफिस में एक जूनियर एग्जीक्यूटिव अपने पहले क्लाइंट के लिए प्रेजेंटेशन की तैयारी कर रहा था। उसने बहुत अच्छी स्लाइड्स बनाई थीं, डिलीवरी की रिहर्सल में उसने हफ्तों बिताए थे, और बोर्डरूम के लिए हैंडआउट्स प्रिंट किए थे। सब कुछ परफेक्ट था - लेकिन आखिर वख्त में एक मुसीबत आ गई। जब वह 8 पेज के हैंडआउट्स को स्टेपल कर रहा था, तो ऑफिस का स्टेपलर अचानक टूट गया। स्प्रिंग जाम हो गई, और पेपर्स स्टेपल नहीं हो सके। मीटिंग से पहले उसके पास सिर्फ 5 मिनट बचे थे, और उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे, क्योंकि उसके पास कोई विकल्प नहीं था। उसे डर था कि अगर उसने हैंडआउट्स नहीं बांटे, तो इससे उसकी क्रेडिबिलिटी खराब हो जाएगी। तभी, ऑफिस असिस्टेंट को उसकी प्रॉब्लम दिखी। उसने उसे अपने टेबल के ड्रॉअर में से उसको स्टेपलर दिया। उसने मुस्कुराते हुए कहा। "यह मेरे पास सालों से है," एग्जीक्यूटिव ने जल्दी से इसका इस्तेमाल किया, हर सेट को बड़े अच्छे तरिके से स्टेपल किया, और कॉन्फिडेंस के साथ बोर्डरूम में चला गया। स्टेपलर ने उसका समय और पैसा बचाया था। हम में से ज़्यादातर लोग लगभग हर दिन स्टेपलर का इस्तेमाल करते हैं। स्टेपलर के पीछे की कहानी दिलचस्प है। 18वीं सदी में, फ्रांस के राजा लुई XV को एक प्रॉब्लम का सामना करना पड़ा। उनके डॉक्यूमेंट्स जमा हो रहे थे, और ढीले कागज़ों के खो जाने या उनके साथ छेड़छाड़ होने का खतरा था। इस चुनौती को हल करने के लिए एक कारीगर को बुलाया गया। उसने पहला स्टेपलर बनाया—हर स्टेपल सोने का बना था। उस पर शाही मुहर खुदी हुई थी। इसका इस्तेमाल राजा के डॉक्यूमेंट्स को हमेशा के लिए एक साथ बांधने के लिए किया जाता था। यह सिर्फ़ एक टूल नहीं था; यह ताकत और टिकाऊपन का प्रतीक था। सालों बाद, 19वीं सदी में, जब कागज़ आम आदमी की ज़रूरत बन गया, तो जॉर्ज मैकगिल को भी ऐसी ही प्रॉब्लम का सामना करना पड़ा। उन्होंने 1866 में एक मुड़ने वाली पीतल की पिन का पेटेंट कराया, और 1867 तक, उन्होंने एक काम करने वाला स्टेपलर बना लिया था जो कागज़ में स्टेपल कर सकता था। उनके इस आविष्कार को 1876 में फिलाडेल्फिया में सेंटेनियल एग्ज़िबिशन में दिखाया गया, जिससे मॉडर्न स्टेपलर का जन्म हुआ। दोस्तों, आज, 9 मार्च को "स्टेपलर फिलिंग डे" के तौर पर मनाया जाता है। असली कीमत इस बात से नहीं मापी जाती कि कोई चीज़ कितनी शानदार दिखती है, बल्कि इस बात से मापी जाती है कि वह कितनी अच्छी तरह काम आती है। स्टेपलर जैसा छोटा सा आविष्कार भी इतिहास के पन्नों को जोड़ सकता है। आइए, आज के मुश्किल समय में हम सब मिलकर अपनी इंसानियत बनाएं ऐंड मेक योर मार्क®