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#manuvaishali #hindikavita #kavisammelan #poem #kavita जिस दिन ये आँसू बोलेंगे आँगन तक को श्राप लगेगा! घायल अन्तर्मन बोलेगा, या फिर चोटिल तन बोलेगा, एक एक हर शब्द संभाले अपमानित जीवन बोलेगा, हाथ आटे में सन बोलेंगे, वो फेकें बर्तन बोलेंगे, और नहीं कोई बोलेगा तो लोई परथन बोलेंगे, बोलेंगे तब पड़े निवाले - "जाओ तुमको पाप लगेगा"! आँगन तक को श्राप लगेगा! सपनों-सपनों पलती यादें, सोते मन में चलती बातें, उजड़ी सहमी बिलखी नींदें हारीं, आँखें मलती रातें, तब सबसे थककर बोलेगा, रुँधता रूठा स्वर बोलेगा, आधी रातों उठा सहम जो नींद से जागा डर बोलेगा, सिसकी सिसकी सिहरन, तुमको तपती देह का ताप लगेगा! आँगन तक को श्राप लगेगा! अपना होना जब कोसेगा, विधिलेखों! तब तब सोचेगा- और भाग्य में कितनी पीड़ा? तुमसे दुखता मन पूछेगा! यही अभागा मन बोलेगा, प्राण तजे जीवन बोलेगा, पथराई जलती आँखो से निष्कासित क्रंदन बोलेगा, बनकर के तब हाय किसी की बरसों का संताप लगेगा ! आँगन तक को श्राप लगेगा! मनु वैशाली