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गाँव की हरी-भरी सुबह और रामू का जादुई ढाबा 🌄🌾🍲 पंजाब के दिल में बसा हुआ एक छोटा-सा, बहुत प्यारा गाँव था – नाम था हरियालीपुर 🌿🏡। चारों तरफ फैले हुए सोने जैसे गेहूँ के खेत 🌾🌾🌾, सरसों के पीले-पीले फूलों की चादर ❁, बीच-बीच में हल्की-हल्की हवा चलती और नदी की कल-कल आवाज़ आती 💦🎶। गाँव के ठीक बाहर एक बहुत पुराना, मोटा-तगड़ा पीपल का पेड़ खड़ा था 🌳🕉️। शाम ढलते ही गाँव के बुजुर्ग, जवान और बच्चे सब उसी पेड़ के नीचे इकट्ठा हो जाते। चाय के कुल्हड़ ☕, बीड़ी का कश 🚬 और गपशप का सिलसिला चलता रहता 🗣️😂। इसी गाँव में रहता था हमारा हीरो – रामू 😎🍖। रामू का छोटा-सा ढाबा था सड़क के किनारे, नाम था "रामू का स्वादिष्ट मटन बिरयानी हाउस" 🔥🍲। ढाबा देखने में कुछ खास नहीं था – चार लकड़ी की मेज़ें 🪑🪑🪑🪑, कुछ टूटी-फूटी बेंचें, एक बड़ा सा चूल्हा 🔥 और रामू का प्यार भरा हाथ 👨🍳❤️। लेकिन उसकी बिरयानी? वाह! क्या बात थी! 😍🤤 रामू सुबह-सुबह मटन को अच्छे से धोता 🍖💧, लहसुन-अदरक का पेस्ट बनाता 🧄🫚, सबसे अच्छे देसी मसाले डालता – तेज़ पत्ता, दालचीनी, लौंग, इलायची, काली मिर्च, धनिया, जीरा, गरम मसाला 🌶️🧂✨। बासमती चावल को इत्र की तरह महकने वाला इस्तेमाल करता 🍚🌸। दही डालकर मटन को मैरिनेट करता, फिर देसी घी में तड़का लगाता 🧈🔥। जब बिरयानी दम पर आती तो पूरे गाँव में खुशबू फैल जाती 😋🌬️। लोग कहते – "रामू भाई की बिरयानी खा ली तो जन्नत का टेस्ट मिल गया!" 🏞️🍽️ रामू की खासियत थी – वो अमीर-गरीब का फर्क नहीं करता था। कोई ट्रक ड्राइवर आता 🚚, कोई खेत मजदूर आता 👷♂️, कोई स्कूल टीचर आता 📚 – सबको एक जैसा प्यार और थोड़ा एक्स्ट्रा मटन डालकर परोसता 🍖➕🍖। अगर किसी के पास पैसे कम होते तो बोलता, "भाई, आज रोटी मुफ्त है 🫓🙏, अगली बार दे देना।" लोग रामू को दिल से चाहते थे ❤️😇। दोस्तों का साथ और गाँव की मिठास 👬👭🌟 रामू के दो सबसे करीबी दोस्त थे – छोटू – लंबा, पतला, मेहनती खेतिहर किसान 👨🌾💪। सुबह से शाम तक खेत में हल चलाता, लेकिन शाम को रामू के ढाबे पर आकर बिरयानी खाता और मजाक करता 😂। गुड्डी – रामू की पड़ोसन, विधवा लेकिन बहुत हँसमुख औरत 🧵😊। दिन भर सिलाई मशीन पर कपड़े सिलती, शाम को बच्चों को पढ़ाती 📖 और रामू के ढाबे पर आकर मदद करती – कभी बर्तन माँजती 🧼, कभी ग्राहकों से बातें करती 🗣️। तीनों मिलकर ढाबे को चलाते। छोटू चावल धोता 🍚, गुड्डी मसाले पीसती 🔪, रामू हाथ दिखाता 👨🍳। शाम को ढाबा ठसाठस भर जाता। हँसी-मजाक, गाने, पुरानी यादें – सब कुछ होता था 🎤🥳। राजमहल की चमक और नया मौका ✨🏰 एक दिन खबर आई कि दूर १२ किमी पर बने राजमहल में महाराजा विक्रम सिंह रहते हैं 👑⚔️। महाराजा बड़े शौकीन थे – घोड़े 🐎, हथियार, जेवरात 💎 और सबसे ज्यादा खाने के! 🍽️😋। उनके कानों में रामू की बिरयानी की तारीफ पहुँच गई। महाराजा ने वजीर से कहा – "इस रामू को कल बुलाओ! मैं उसकी बिरयानी का स्वाद लेना चाहता हूँ!" 🍲👀 सिपाही सुबह-सुबह गाँव आया ⚔️🐴। रामू घबरा गया 😰। बोला – "मैं? महल में? अरे भाई, मैं तो बस ढाबे वाला हूँ!" 😅 छोटू ने हौसला दिया – "जा भाई! तेरी बिरयानी में जादू है ✨। महाराजा खुश हुए तो तेरा नाम पूरे पंजाब में गूँज जाएगा!" 📣🌟 गुड्डी ने कहा – "मन लगाकर बना, रामू। ईश्वर तेरे साथ है 🙏❤️।" रात भर रामू ने मेहनत की 🌙🍖। सबसे ताज़ा मटन लिया, घी डाला, केसर डाला 🌾💛, खुशबूदार चावल चुना 🍚। सुबह महल पहुँचा। महल देखकर उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं – सोने-चाँदी की सजावट, फव्वारे, बगीचे 🌸🏛️। महाराजा ने खाया... एक चम्मच... दो चम्मच... और बोले – "वाह रे रामू! ये बिरयानी तो अमृत है! स्वर्ग से बेहतर!" 🤩😍 रामू को ५०० रुपये इनाम मिला 💰🎉 और हफ्ते में २००० रुपये की नौकरी – हर रविवार महल में बिरयानी बनानी है! 📅🔥 लालच का साया और बदलता रामू 🤑😈 पहले कुछ हफ्ते सब मस्त चला। रामू महल जाता, बिरयानी बनाता, पैसे लाता, गाँव में शान से घूमता 😎💸। नया मकान बनवाया 🏠✨, नई साइकिल ली 🚲, चमचमाते कपड़े खरीदे 👕👖। गाँव वाले कहते – "देखो रामू भाई कितने बड़े हो गए!" 🥳 लेकिन पैसे ने रामू के दिमाग पर चढ़ना शुरू कर दिया 🧠💰। एक रविवार महल में सोचा – "अगर मटन थोड़ा कम डाल दूँ तो मेरा मुनाफा बढ़ेगा। महाराजा को क्या पता? वे तो बस तारीफ करते हैं।" 🤔😏 पहली बार थोड़ा कम मटन डाला 🍖⬇️। महाराजा ने कुछ नहीं कहा। अगले हफ्ते और कम। फिर और कम। धीरे-धीरे बिरयानी में आलू ज्यादा, प्याज़ ज्यादा, मटन बस नाम का 🥔🧅🍖❓। मसाले भी घटाए 🌶️⬇️। लेकिन रामू खुश – "पैसे आ रहे हैं!" 🤑💸 ढाबे पर भी अब पहले जैसा प्यार नहीं। गरीब मजदूर को देखकर बोलता – "पैसे पहले!" 💰😠। लोग मुँह फेरने लगे 😕। छोटू ने पूछा – "भाई, बिरयानी में वो पुराना स्वाद कहाँ गया?" ❓😟 रामू चिल्लाया – "तू क्या समझता है? मैं महल वाला हूँ अब!" 😡🚫 गुड्डी रोते हुए बोली – "रामू, लालच ने तुझे बदल दिया। पहले तू सबका था, अब सिर्फ पैसे का..." 😢❤️ सच्चाई का सामना और तबाही ⚡😭 एक रविवार महाराजा ने बिरयानी खाई और थूक दिया 😡🤮। "ये क्या बकवास है? मटन कहाँ है? सिर्फ आलू-प्याज़?!" 🥔😠 महाराजा गुस्से में लाल! ⚡👑 रामू को बुलाया। रामू काँपता हुआ खड़ा हुआ 😨। महाराजा बोले – "तूने मेरे भरोसे को तोड़ा! लालच ने तुझे अंधा कर दिया!" 😠⚖️ हुक्म हुआ – ढाबा बंद! 🔒 सारे पैसे गरीबों में बाँटो! 💸🫂 रामू वापस गाँव! 🚶♂️ रामू रोता हुआ लौटा। नया मकान खाली 🏠😔, साइकिल बिक गई 🚲❌, पैसे खत्म 💸➡️0। लोग बात नहीं करते 😶। शाम को पीपल के नीचे बैठा फूट-फूटकर रोया 🌳😭। पछतावा, माफी और नई शुरुआत 🌅🙏 छोटू-गुड्डी आए। छोटू बोला – "भाई, लालच सब छीन लेता है। लेकिन दिल से पछताओ तो सब ठीक हो जाता है।" 🤝 गुड्डी बोली – "हम तेरे साथ हैं। लेकिन अब कभी लालच नहीं!" ❤️ रामू रोते हुए बोला – "मैं बहुत बड़ा मूर्ख था। माफ़ कर दो... 🙏😢" अगले दिन छोटा-सा ढाबा फिर खोला। नाम रखा – "ईमानदार रामू बिरयानी" 🍲✅ पुरानी वाली बिरयानी बनानी शुरू की। पूरा मटन 🍖, पूरा प्यार ❤️, गरीबों को मुफ्त रोटी 🫓😊। धीरे-धीरे लोग लौटे 👥👥।