У нас вы можете посмотреть бесплатно Te Guru Mere Man Baso | તે ગુરુ મેરે મન બસો | Muniraj Bhakti | или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
Если кнопки скачивания не
загрузились
НАЖМИТЕ ЗДЕСЬ или обновите страницу
Если возникают проблемы со скачиванием видео, пожалуйста напишите в поддержку по адресу внизу
страницы.
Спасибо за использование сервиса ClipSaver.ru
#jainism #bhakti #jainsongs ते गुरु मेरे मन बसो। ते गुरु मेरे मन बसो, जे भवजलधि जिहाज। आप तिरहिं पर तारहिं, ऐसे श्री ऋषिराज। मोह महारिपु जानिकैं, छोड्यों सब घर बार । होय दिगम्बर वन बसे, आतम शुद्ध विचार ।। ते गुरु. ।। रोग उरग-बिल वपु गिण्यो, भोग भुजंग समान । कदली तरु संसार है, त्याग्यो सब यह जान ।। ते गुरु. ।। रत्नत्रय निधि उर धरैं, अरु निर्ग्रन्थ त्रिकाल । मार्यो कामखबीस को, स्वामी परम दयाल ।। ते गुरु. ।। पंच महाव्रत आदरें, पांचों समिति समेत । तीन गुपति पालैं सदा, अजर-अमर पद हेत ।। ते गुरु. ।। धर्म धरैं दशलाछनी, भावैं भावन सार । सहैं परिषह बीस द्वै, चारित-रतन-भण्डार ।। ते गुरु. ।। जेठ तपै रवि आकरो, सूखै सरवर नीर । शैल-शिखर मुनि तप तपैं, दाझें नगन शरीर ।। ते गुरु. ।। पावस रैन डरावनी, बरसे जलधरधार । तरुतल निवसै तब यती, बाजै झंझा ब्यार ।। ते गुरु. ।। शीत पड़ै कपि-मद गलै, दाहै सब वनराय । तालतरंगनी के तटैं, ठाड़े ध्यान लगाय ।। ते गुरु. ।। इह विधि दुद्धर तप तपै, तीनों काल मंझार । लागे सहज सरूप मैं, तनसों ममत निवार ।। ते गुरु. ।। पूरब भोग न चिंतवै, आगम बांछै नाहिं । चहुँगति के दुःखसों डरै, सुरति लगी शिव माहिं ।। ते गुरु. ।। रंग महल में पौढ़ते, कोमल सेज बिछाय । ते पच्छिम निशि भूमि मैं, सोवें संवरि काय ।। ते गुरु. ।। गज चढ़ि चलते गरवसों, सेना सजि चतुरंग । निरखि निरखि पग वे धरै, पालैं करुणा अंग । ते गुरु. ।। वे गुरु चरण जहाँ धरै, जग में तीरथ जेह । सो रज मम मस्तक चढ़ो, ‘भूधर’ मांगे एह ।। ते गुरु. ।। रचयिता:- कविवर भूधरदास जी