У нас вы можете посмотреть бесплатно : Machkund Dholpur: Tirtho ka Bhanja | यहाँ सो रहे थे राजा मुचकुंद और जल गया कालयवन! 🚩 или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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"Namaste doston! Aaj ke is video mein hum aapko lekar chalenge Rajasthan ke Dholpur mein sthit prachin aur pavitra Machkund Dham. Is video mein aap janenge: ✅ Machkund ko 'Tirtho ka Bhanja' kyon kaha jata hai? ✅ Raja Muchkund aur Bhagwan Shri Krishna se judi pauranik katha. ✅ Kaalyavan ka ant kaise hua? ✅ Machkund Temple aur Sarovar ki mahima. Machkund ek bahut hi shanti aur adhyatmik sukoon dene wali jagah hai. Agar aapko history aur religious places pasand hain, to ye video end tak zaroor dekhen! Video Highlights: Intro to Machkund Dholpur History of Raja Muchkund Shri Krishna and Kaalyavan Story Importance of Machkund Sarovar How to reach & Best time to visit Like, Share aur Subscribe karna na bhoolein! 🙏" धौलपुर (राजस्थान) के पास स्थित *मचकुंड मंदिर* और वहां का पवित्र सरोवर हिंदू धर्म में बहुत गहरा ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व रखते हैं। इसे अक्सर *"तीर्थों का भांजा"* कहा जाता है। यहाँ इस स्थान के इतिहास और इससे जुड़ी मुख्य कथाओं का विवरण दिया गया है: --- 1. पौराणिक इतिहास: राजा मुचकुंद की कथा इस मंदिर का नाम सूर्यवंशी राजा *मुचकुंद* के नाम पर पड़ा है। पौराणिक कथाओं के अनुसार: राजा मुचकुंद भगवान श्रीराम के पूर्वज थे। उन्होंने देवासुर संग्राम (देवताओं और असुरों के बीच युद्ध) में देवताओं की सहायता की थी। युद्ध समाप्त होने के बाद, राजा मुचकुंद बहुत थक गए थे। इंद्रदेव ने उन्हें वरदान दिया कि वे जहाँ चाहें सो सकते हैं और *जो कोई भी उन्हें नींद से जगाएगा, वह जलकर भस्म हो जाएगा।* राजा मुचकुंद इसी गुफा (धौलपुर) में आकर सो गए थे। 2. कृष्ण अवतार और कालयवन का अंत मचकुंड का सबसे प्रसिद्ध इतिहास द्वापर युग से जुड़ा है: मथुरा पर आक्रमण के दौरान, जब मगध नरेश जरासंध का मित्र *कालयवन* भगवान श्री कृष्ण के पीछे पड़ा, तो कृष्ण उसे रणभूमि से छकाते हुए इसी गुफा में ले आए। श्री कृष्ण ने अपना पीतांबर सोए हुए राजा मुचकुंद के ऊपर डाल दिया और खुद छिप गए। कालयवन ने मुचकुंद को कृष्ण समझकर लात मारकर जगा दिया। जैसे ही राजा मुचकुंद ने अपनी आँखें खोलीं, उनके तेज से *कालयवन वहीं जलकर भस्म हो गया।* इसी घटना के कारण श्री कृष्ण का एक नाम 'रणछोड़' भी पड़ा। --- 3. धार्मिक और भौगोलिक महत्व मचकुंड केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि एक प्राचीन परिसर है: *तीर्थों का भांजा:* धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पुष्कर को "तीर्थों का मामा" कहा जाता है और मचकुंड को "तीर्थों का भांजा"। माना जाता है कि जब तक मचकुंड के दर्शन न किए जाएं, तीर्थ यात्रा पूरी नहीं होती। *स्थापत्य:* यहाँ एक बड़ा पवित्र सरोवर (कुंड) है, जिसके चारों ओर कई छोटे-बड़े मंदिर बने हुए हैं। इनमें से कुछ मंदिर 7वीं से 19वीं शताब्दी के बीच के बताए जाते हैं। *प्रमुख मंदिर:* यहाँ मुख्य रूप से भगवान मुचकुंद और श्री कृष्ण के मंदिर हैं। साथ ही पास में ही लाडली जगमोहन जी का भव्य मंदिर भी स्थित है। --- 4. मचकुंड मेला हर साल भाद्रपद महीने की शुक्ल पक्ष की ऋषि पंचमी और छठ (छठ मेला) को यहाँ एक विशाल मेला भरता है। श्रद्धालु इस पवित्र कुंड में स्नान करना बेहद शुभ मानते हैं, विशेषकर चर्म रोगों से मुक्ति के लिए यहाँ के जल को चमत्कारी माना जाता है। --- *क्या आप मचकुंड के आसपास के अन्य ऐतिहासिक स्थलों जैसे धौलपुर के किलों या चंबल सफारी के बारे में जानना चाहेंगे?*