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• संकटमोचन नाम तिहारो - श्री हनुमान अष्टक | ... श्री हनुमानाष्टक आदित्य गढ़वी के भावयुक्त स्वर में। संकटमोचन हनुमानाष्टक की संरचना गोस्वामी तुलसीदास ने की थी. माना जाता है कि संकटमोचन हनुमानाष्टक का पाठ करने से व्यक्ति अपनी हर बाधा और पीड़ा से मुक्त हो जाता है और उसके सभी संकट दूर हो जाते हैं। Watch the video song of ''Darshan Do Bhagwaan'' here - • दर्शन दो भगवान | Darshan Do Bhagwaan | Sur... Watch the story of "Ramleela - Day - 11" now! श्री राम जब रावण का वध कर देते हैं तो युद्ध समाप्त हो जाता है। विभीषण अपने कुल का विनाश देख कर दुःखी हो जाता है तो श्री राम उसे सम्भालते हैं और उसे लंका का राजपाठ सम्भालने के लिए कहते हैं ताकि बचे हुए लंका वासियों का कल्याण हो सके। श्री राम लक्ष्मण को विभीषण का राज्याभिषेक करने के लिए भेजते हैं और राज्याभिषेक होने के बाद विभीषण श्री राम से आशीर्वाद लेने आता है। हनुमान जी माता सीता को युद्ध समाप्त होने और श्री राम से उनकी भेंट जल्द ही होने वाली है यह समाचार सुनाने के लिए जाते हैं और उनसे आशीर्वाद लेते हुए बताते हैं की उन्होंने लंका पति रावण का वध कर दिया है और अब उन्हें उनके पास चलना है। माता सीता हनुमान जी की बात सुनकर भावुक हो जाती है और अपने पति से मिलने के ख़ुशी में रो पड़ती हैं। श्री राम सीता के आने से पहले उनको अग्नि परीक्षा लेने की बात लक्ष्मण के सामने करते हैं तो वह यह बात सुनकर क्रोधित हो जाता है की सीता जी उसकी माँ के समान हैं और वो उनके साथ ऐसा अत्याचार नहीं होने देंगे। लक्ष्मण श्री राम के सामने कहता है की यदि माता सीता के सम्मान और पवित्रता की परीक्षा लेंगे तो वह उनके साथ नहीं खड़ा होगा। श्री राम लक्ष्मण को समझाते हैं की सीता की अग्नि परीक्षा लेने के पीछे एक रहस्य है जिसे में तुम्हें बता रहा हूँ। श्री राम लक्ष्मण को बताते हैं की मैं स्वर्ण मृग के आने से पहले ही जान गया था की रावण सीता का हरण करने आने वाला है तो मैंने सीता को अग्नि देव के संरक्षण में भेज दिया था और मेरे साथ सिर्फ़ सीता जी की छाया मात्र रह रही थी। लक्ष्मण श्री राम की बात सुनकर उनसे क्षमा माँगता है। माता सीता पालकी में बैठ कर रावण की वाटिका से श्री राम के शिविर तक आती है और उनको देखने के लिए वानर सेना में बहुत ही उत्साह था लेकिन जैसे ही सीता जी श्री राम के समक्ष आती है तो वो उन्हें अग्नि परीक्षा देने को कहते हैं। श्री राम की बात सुनकर माता सीता लक्ष्मण से अग्नि प्रज्वलित करने के लिए कहती है। लक्ष्मण अग्नि को प्रकट करता है और माता सीता अग्नि में जाकर खड़ी हो जाती हैं और अपनी पवित्रता का प्रमाण देती हैं। अग्नि देव देवी सीता को लेकर श्री राम के पास आते हैं और सीता जी श्री राम के चरण स्पर्श करके उसने आशीर्वाद लेती है। श्री राम और सीता का मिलन हो जाता है। श्री राम के वनवास का समय भी पूर्ण होने वाला था राजा दशरथ श्री राम को दर्शन देते हैं और उनके पिता के वचन को पूर्ण करने पर प्रसन्न होकर उनको आशीर्वाद देते हैं। दशरथ जी श्री राम को ये भी कहते हैं की मुझे देवताओं ने बताया है कि तुम श्री हरी के रूप हो में आपसे यही वरदान चाहता हूँ की मैं तुम्हें सदैव ही तुम्हें पुत्र की तरह स्नेह देता रहूँ। राजा दशरथ कैकयी को भी माफ़ कर देते हैं। विभीषण अपने सभी साथियों को कहते हैं की वो अब अयोध्या की ओर निकलना पड़ेगा क्योंकि भरत ने सौगंध खायी है की यदि हम समय पर वापस नहीं लौटे तो वो अपने प्राण त्याग देगा। विभीषण श्री रम को पुष्पक विमान भेंट में देता है ताकि वो समय पर अयोध्या पहुँच सके। श्री राम के साथ उनके सभी साथी अयोध्या चलने की बात श्री राम से कहते हैं तो श्री राम उन्हें अपने साथ ले चलते हैं। श्री राम वानर सेना को भी उनका साथ देने के लिए धन्यवाद देते हैं और अयोध्या की ओर चाल पड़ते हैं। अयोध्या पहुँचने से पहले श्री राम महाऋषि भरद्वाज के आश्रम पर रुक जाते हैं और हनुमान जी को भरत के पास श्री राम के अयोध्या लौटने की खबर देने के लिए भेजते हैं। श्री राम ऋषि भरद्वाज से मिलने के बाद निषाद राज से मिलते हैं। श्री राम ने हनुमान जी को कहा था की भरत के पास ब्राह्मण रूप में मिलने जाना और समय देख कर भरत को उनके आने का समाचार दे देना। श्री राम की आज्ञा अनुसार हनुमान जी भरत से मिलते हैं और उन्हें श्री राम के आने का समाचार देते हैं। भरत श्री राम के आने का समाचार सुन कर प्रसन्न हो जाता है। अयोध्या में श्री राम की वापसी का समाचार पहुँच जाता है। श्री राम के स्वागत में अयोध्या को सजाया जाता है। श्री राम अयोध्या लौट आते हैं और भरत से मिलते हैं। श्री राम गुरु वशिष्ठ जी से भी मलते हैं और उनसे आशीर्वाद लेते हैं। राज माताएँ भी श्री राम से मिलने के लिए आती हैं। श्री राम अपनी माताओं से मिलकर उनका आशीर्वाद लेते हैं और कैकयी को बताते हैं की उन्हें राजा दशरथ ने भी क्षमा दान दे दिया है। भरत अपनी माता से तब भी नफ़रत करता था क्यों की उनकी वजह से श्री राम को वनवास जाना पड़ा था। श्री राम भरत को भी समझाते हैं और माता कैकयी को माफ़ कर दे। श्री राम की आज्ञा सुनकर भरत अपनी माता को माफ़ कर आशीर्वाद लेता है। श्री राम अयोध्या के राजमहल में आ जाते हैं और उनका स्वागत किया जाता है और उनका राज्याभिषेक किया जाता है। श्री राम अयोध्या के राजा बन जाते हैं। सभी श्री राम जी की जय जयकार करते हैं और इस प्रकार राम राज्य की स्थापना हो जाती है। In association with Divo - our YouTube Partner #Ramayan #RamayanonYouTube