У нас вы можете посмотреть бесплатно जब जीत भी व्यर्थ लगने लगे | गीता अध्याय 1 श्लोक 31–32 | अर्जुन विषाद योग или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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श्रीमद्भगवद्गीता केवल युद्ध का ग्रंथ नहीं है, यह मनुष्य के भीतर चल रहे संघर्ष का दर्पण है। गीता अध्याय 1 के श्लोक 31 और 32 में अर्जुन उस अवस्था को प्रकट करते हैं जहाँ जीत, राज्य और सुख — सब अर्थहीन लगने लगते हैं। अपने ही लोगों को सामने देखकर अर्जुन कहते हैं कि उन्हें न विजय चाहिए, न राज्य, और न ही सुख। यह वीडियो हमें सिखाता है कि जब मन करुणा और भय से भर जाता है, तो सबसे बड़ा सुख भी निरर्थक लगने लगता है। इस वीडियो में आप पाएँगे— • श्लोक 31–32 का शुद्ध संस्कृत पाठ • सरल हिंदी अर्थ • भावार्थ सहित गहरी व्याख्या • जीवन के लिए आज की सीख अगर आप गीता को शुद्ध, क्रमबद्ध और सरल रूप में समझना चाहते हैं, तो चैनल से जुड़े रहिए। 🙏 जय श्रीकृष्ण 🙏 GyanSagarwithChitra यह वीडियो केवल शैक्षिक और आध्यात्मिक उद्देश्य से बनाई गई है। इसमें प्रस्तुत विचार श्रीमद्भगवद्गीता पर आधारित हैं। किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना उद्देश्य नहीं है।#ShrimadBhagavadGita #GeetaChapter1 #Shlok31 #Shlok32 #ArjunVishadYog #GeetaGyan #KrishnaUpdesh #SanatanGyan #SpiritualWisdom #IndianPhilosophy #LifeLessonsFromGita #BhagavadGitaHindi #GyanSagarWithChitra