У нас вы можете посмотреть бесплатно मुक्त पद क्या है? जीव और ईश्वर का यथार्थ ज्ञान | तीन गुण, माया, सत-चित आनंद का रहस्य | संत हरपाल दास или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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मुक्त पद क्या है? क्या मुक्ति वास्तव में मरने के बाद मिलने वाली कोई अवस्था है, या फिर इसी जीवन में उसका अनुभव किया जा सकता है? इस यथार्थ सत्संग प्रवचन में संत हरपाल दास जी ने बड़े स्पष्ट और सरल शब्दों में समझाया है कि शास्त्रों में वर्णित चारों प्रकार की मुक्ति (सालोक्य, सामीप्य, सारूप्य, सायुज्य) वास्तव में कल्पित हैं, क्योंकि उनमें जीव कहीं न कहीं हद में ही बना रहता है। 👉 सच्ची मुक्ति वह नहीं जहाँ जीव ईश्वर के पास पहुँचे, 👉 सच्ची मुक्ति वह है जहाँ “जीव” का भाव ही समाप्त हो जाए। 🔶 इस प्रवचन में विस्तार से बताया गया है — 🔹 मुकत पद का वास्तविक अर्थ क्या है 🔹 हद का जीव बेहद में कैसे बसता है 🔹 जीव क्या है और ईश्वर क्या है — यथार्थ भेद 🔹 तीन गुण (सतोगुण, रजोगुण, तमोगुण) क्या हैं और उनका जीव पर प्रभाव 🔹 सतोगुण बढ़ने पर क्या होता है 🔹 रजोगुण बढ़ने पर जीव कैसे भटकता है 🔹 तमोगुण बढ़ने पर अज्ञान कैसे बढ़ता है 🔹 क्यों तीनों गुण ही बंधन हैं 🔹 स्थूल शरीर, सूक्ष्म शरीर और कारण शरीर का रहस्य 🔹 जन्म-मरण का कारण क्या है 🔹 माया क्या है और कैसे सत्य को ढक लेती है 🔹 सत-चित-आनंद का वास्तविक स्वरूप 🔹 गुणातीत अवस्था क्या है 🔹 मुक्त पद का अनुभव कैसे होता है 🔥 हद और बेहद का यथार्थ रहस्य जीव हद का है और ईश्वर बेहद का। पर प्रश्न यह है कि हद का जीव बेहद में कैसे बस सकता है? संतमत कहता है — जब तक जीव स्वयं को शरीर, मन, इंद्रियों और गुणों से जोड़कर देखता है, तब तक वह हद में ही कैद रहता है। 👉 जैसे ही जीव “मैं” के भाव को छोड़ता है, 👉 वैसे ही बेहद प्रकट हो जाता है। 🌿 तीन गुणों का स्पष्ट ज्ञान 🔸 सतोगुण — शांति, भक्ति, दया देता है लेकिन “मैं अच्छा हूँ” का भाव छोड़ता नहीं 🔸 रजोगुण — कर्म, इच्छा, दौड़-भाग में उलझाता है 🔸 तमोगुण — अज्ञान, आलस्य और अंधकार में ले जाता है 👉 संतमत के अनुसार तीनों गुण बंधन हैं, मुक्ति किसी एक गुण में नहीं, गुणातीत होने में है। 🧘♂️ तीन शरीरों का ज्ञान 🔹 स्थूल शरीर — मिट्टी का बना, नाशवान 🔹 सूक्ष्म शरीर — मन, बुद्धि, अहंकार 🔹 कारण शरीर — संस्कारों का भंडार, जन्म-मरण का कारण 👉 जब तक जीव इन तीनों से अपनी पहचान जोड़े रखता है, तब तक मुक्ति संभव नहीं। ✨ सत-चित-आनंद क्या है? सत-चित-आनंद कोई भाव नहीं, कोई कल्पना नहीं, बल्कि आत्मा का स्वभाव है। 👉 जब जीव माया, गुण और शरीर से ऊपर उठता है, तभी सत-चित-आनंद स्वतः प्रकट हो जाता है। 🕉️ निष्कर्ष (यथार्थ संदेश) ✔ जीव = गुणों से ढकी चेतना ✔ ईश्वर = गुणातीत चेतना ✔ माया = जो सत्य को ढक दे ✔ मुक्ति = गुणों से मुक्ति ✔ मुकत पद = इसी जीवन में अनुभव 👉 जहाँ जीव समाप्त, वहीं ईश्वर प्रकट। 🎤 प्रवचन संत हरपाल दास जी (यथार्थ ज्ञान – संतमत पर आधारित) 🕗 हर दिन सायं 8 बजे नया आध्यात्मिक प्रवचन इस चैनल पर प्रकाशित होता है। 🔔 चैनल को सब्सक्राइब करें और बेल आइकन दबाएँ ताकि आप एक भी सत्संग से वंचित न रहें। 📍 स्थान: मुक्त मणि आश्रम, बरखी खेड़ी रोड, बहबुलपुर, हिसार, हरियाणा 🙇♂️ आपका सेवक: शिव दास 00:00 – मुक्ति क्या है? 02:45 – चार प्रकार की मुक्ति क्यों कल्पित हैं 06:10 – हद और बेहद का यथार्थ रहस्य 10:30 – जीव क्या है? 15:20 – तीन गुणों का प्रभाव 22:00 – स्थूल, सूक्ष्म और कारण शरीर 29:40 – माया क्या है? 35:10 – सत-चित-आनंद का अर्थ 41:00 – ईश्वर का वास्तविक स्वरूप 47:30 – मुकत पद का अनुभव #MukatPad #YatharthGyan #JeevAurIshwar #TeenGun #SatChitAnand #MayaKaRahasya #SantHarpalDass #SantMat #AdhyatmikGyan #SpiritualKnowledgeHindi #SatsangPravachan #SantVani #BhaktiMarg #GyanMarg #IndianSpirituality