У нас вы можете посмотреть бесплатно Maa Kamakhya Gahamar (karahiya) Ghazipur.माँ कामाख्या धाम दर्शन गहमर 2021.Kamakhya Mandir Ghazipur. или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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जमानियाँ तहसील के ऐतिहासिक गाँव ‘गहमर’ से पश्चिम माँ कामाख्या (गहमर कामाख्या) का विशाल, भव्य व नयनाभिराम मंदिर अपने गर्भ में कई रहस्यों को छिपाये आज भी लोगों के लिए कौतूहल और जिज्ञासा का सबब बना हुआ है । वस्तुतः माँ कामाख्या का पवित्र पुरातन धाम आज पूर्वांचल का सबसे बड़ा धार्मिक शक्ति पीठ होने के गौरव से विभूषित है । वर्ष के दोनों नवरात्रों-चैत्र एवं शारदीय- में देवी के दर्शनार्थ आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उनकी आस्था व विश्वास को ही रेखांकित करती है । माँ कामाख्या के संदर्भ में कई मिथक कथाएँ व अनुश्रुतियाँ प्रचलित हैं। प्रायः यह धारणा बद्धमूल है कि यह सीकरवार वंश की कुलपूज्या है । कभी सीकरवार वंश की राजधानी फतेहपुर सीकरी हुआ करती थी। सीकरी शब्द पहले स्थान बोधक था कालान्तर में इसने वंशवाचक संज्ञा का रूप धारण कर लिया। कर्नल टाड ने भी सीकरवाल नामक राजपूती वंश के मूलोद्गम का वर्णन करते लिखा है कि “उनका नाम सीकरी नामक नगरी की संज्ञा से पड़ा है जो पहले एक स्वतंत्र रियासत थी।” वस्तुतः सीकरी शब्द संस्कृत से निकला है। इसकी व्युत्पत्ति ‘सिकता’ से मानी जाती है, जिसका अर्थ रेत या रेतीली जमीन होता है। ‘सीकर’ से ही सीकरी की उत्पत्ति मानी जाती है। ‘फतेह’ फारसी का शब्द है, जिसका आशय ‘विजित’ से लिया जाता है। ‘पुर’ नगर का पर्याय है। दरअसल, मध्यकाल में फारसी, उर्दू के साथ हिन्दी के शब्दों को संयुक्त कर नामकरण की एक सार्थक परम्परा रही है । यह हिन्दू-मुस्लिम की संबंध-संस्कृति को भी एक सीमा तक प्रकट करता है। बाबर ने जब सीकरवारों को पराजित कर इस क्षेत्र को अपने आधिपत्य में ले लिया, तब यह फहेतहपुर सीकरी कहा जाने लगा। कुछ इतिहासकारों की यह धारणा है कि इस नगर को अकबर ने बसाया था, जबकि, इस्लामी आक्रमण से पूर्व सैकड़ों वर्ष वह सीकरवारों की राजधानी रही है। पी. एन. ओक इसका प्राचीन नाम ‘विजयपुर सीकरी’ बताते हैं उनकी धारणा है कि मुसलमानों के कब्जे के पश्चात उसी नाम का आधा-अधूरा इस्लामी अनुवाद फतेहपुर सीकरी बना दिया गया। सर्वविदित है कि ओक उग्र हिन्दूवादी इतिहासकार माने जाते हैं । इन्होंने ही सर्वप्रथम सीकरी की प्राचीनता को इतिहास के पटल पर उपस्थित किया परन्तु दुर्भाग्यवश किसी ने इस पर विशेष ध्यान देना उचित नहीं समझा। लेकिन हम सत्य को कितने दिनों तक अपनी आँखों से दूर रख सकते हैं या झुठला सकते हैं । इतिहास किसी विचार धारा की नहीं अनवरत अनुसंधान और तर्कपूर्ण दृष्टि की अपेक्षा करता है पिछले दिनों जब सीकरी की खुदाई हुई तो एक नया सच उजागर हुआ । और यह ‘सच’ ओक के निष्कर्षों को ही मजबूती प्रदान करता है। उत्खनन से प्राप्त मूर्ति-शिल्पों, पट्टिका, खिलौनों और बर्तनों के टुकड़ों ने यह प्रमाणित किया कि यहाँ की सभ्यता अकबर से कहीं ज्यादा प्रचीन है । 11 वीं शताब्दी की मिली वाग्देवी की अद्भुत प्रतिमा, जैन तीर्थंकरों की मस्तक विहीन मूर्तियाँ अपनी प्राचीनता के अकाट्य तर्क प्रस्तुत करती हैं । पुरातत्व-वेत्ता मानते हैं कि यहाँ प्राचीन काल में अत्यन्त समृद्ध सभ्यता रही होगी । जैन तीर्थंकरों और हिन्दू देवी-देवताओं की प्रतिमाओं का साथ-साथ मिलना, दोनों धर्मों के आपसी सद्भाव को ही व्यक्त करता है । इन मूर्तियों को कब, किसने खंडित किया, यह अभी तक अज्ञात है। Tnx for watching🙏🙏🙏 please subscribe my channel🙏🙏🙏 Link- / indianjunction14