У нас вы можете посмотреть бесплатно द्वादशलिङ्गस्तोत्रम् | Dwadash Jyotirlinga Stotram | Mahashivratri 15 Feb आदि शंकराचार्य или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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#DwadashJyotirlinga #AdiShankaracharya #Mahashivratri2026 ॐ नमः शिवाय! 🙏 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का पावन पर्व आ रहा है। इस महान दिन की आध्यात्मिक तैयारी के लिए, आज (12 फरवरी) से ही प्रतिदिन प्रातःकाल 12 ज्योतिर्लिंगों का स्मरण करें। सम्पूर्ण 'आदि शंकराचार्य कृत द्वादशलिङ्गस्तोत्रम्' का श्रवण करें, वह भी इसके सरल और सटीक हिंदी अर्थ के साथ, और अपने जन्म-जन्मांतर के पापों को नष्ट करें। [About the Stotram - स्तोत्र के बारे में] आदि गुरु शंकराचार्य जी द्वारा रचित और शृङ्गेरी शारदा पीठम द्वारा निर्धारित यह अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों की महिमा का गान करता है। जो भी भक्त महाशिवरात्रि के इस पावन सप्ताह में शुद्ध मन से इस स्तोत्र का पाठ या श्रवण करता है, उसे धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। [Timestamps / Chapters] ⏳ अपनी सुविधानुसार सुनें (Timestamps): 0:00 - ॐ नमः शिवाय (प्रारंभ एवं स्तोत्र की महिमा) 0:25 - श्लोक 1: सोमनाथ ज्योतिर्लिंग (गुजरात) 1:05 - श्लोक 2: मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग (आंध्र प्रदेश) 1:40 - श्लोक 3: महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग (मध्य प्रदेश) 2:15 - श्लोक 4: ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग (मध्य प्रदेश) 2:50 - श्लोक 5: वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग (महाराष्ट्र/झारखंड) 3:25 - श्लोक 6: नागेश्वर ज्योतिर्लिंग (महाराष्ट्र) 4:00 - श्लोक 7: विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग (उत्तर प्रदेश) 4:35 - श्लोक 8: भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग (महाराष्ट्र) 5:10 - श्लोक 9: रामेश्वर ज्योतिर्लिंग (तमिलनाडु) 5:45 - श्लोक 10: त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग (महाराष्ट्र) 6:20 - श्लोक 11: केदारनाथ ज्योतिर्लिंग (उत्तराखंड) 6:55 - श्लोक 12: घृष्णेश्वर / धिषणेश्वर ज्योतिर्लिंग (महाराष्ट्र) 7:30 - श्लोक 13: फलश्रुति (इस स्तोत्र को सुनने के लाभ) 📜 सम्पूर्ण स्तोत्र एवं हिंदी अर्थ: शृङ्गेरी शारदा पीठम द्वारा निर्धारित द्वादशलिङ्गस्तोत्रम् का हिंदी अर्थ अत्यंत भक्तिपूर्ण और अर्थपूर्ण है। यहाँ सभी 13 श्लोकों का सरल हिंदी अनुवाद दिया गया है: द्वादश ज्योतिर्लिङ्ग स्तोत्र (हिन्दी अर्थ) 1. सोमनाथ (गुजरात) सौराष्ट्रदेशे ... अर्थ: सौराष्ट्र प्रदेश (गुजरात) में पृथ्वी के एक सुंदर भाग में, जो स्वयं ज्योतिर्मय हैं और जिनके मस्तक पर चंद्रमा का आभूषण सुशोभित है; भक्तों को भक्ति प्रदान करने के लिए जिन्होंने अवतार लिया है, उन भगवान सोमनाथ की शरण में मैं जाता हूँ। 2. मल्लिकार्जुन (आंध्र प्रदेश) श्रीशैलशृङ्गे .. अर्थ: जो श्रीशैल के ऊँचे शिखर पर और शेषाद्रि पर्वत (मल्लिकार्जुन) पर विभिन्न दिव्य लीलाएं करते हुए निवास करते हैं; जो संसार रूपी सागर को पार करने के लिए पुल के समान हैं, उन मल्लिकार्जुन भगवान को मैं प्रणाम करता हूँ। 3. महाकालेश्वर (मध्य प्रदेश) अवन्तिकायां .. अर्थ: सज्जनों को मोक्ष प्रदान करने के लिए जिन्होंने अवन्तिका (उज्जैन) में अवतार लिया है; जो अकाल मृत्यु से रक्षा करने वाले और देवताओं के स्वामी हैं, उन महाकालेश्वर को मैं नमस्कार करता हूँ। 4. ओंकारेश्वर (मध्य प्रदेश) कावेरिकानर्मदयोः .. अर्थ: नर्मदा और कावेरी (स्थानीय धारा) के पवित्र संगम पर सज्जनों के उद्धार के लिए, मान्धाता नगरी में सदैव निवास करने वाले, एकमात्र कल्याणकारी परमेश्वर ओंकारेश्वर की मैं स्तुति करता हूँ। 5. वैद्यनाथ (महाराष्ट्र/झारखंड) पूर्वोत्तरे ... अर्थ: उत्तर-पूर्व दिशा में पारली (परली) नामक स्थान पर माता पार्वती (गिरिजा) के साथ विराजमान; जिनके चरण कमलों की पूजा देवता और असुर दोनों करते हैं, उन भगवान वैद्यनाथ का मैं निरंतर स्मरण करता हूँ। 6. नागनाथ (महाराष्ट्र) आमर्दसंज्ञे ... अर्थ: सुंदर 'आमर्द' (औंढा नागनाथ) नामक नगर में जो निवास करते हैं; जिनका अंग विभिन्न ऐश्वर्यों से सुशोभित है और जो एकमात्र भक्ति और मुक्ति देने वाले ईश्वर हैं, उन नागनाथ की शरण में मैं जाता हूँ। 7. विश्वनाथ (उत्तर प्रदेश) सानन्दमानन्दवने .. अर्थ: जो आनंदवन (वाराणसी) में आनंदपूर्वक निवास करते हैं, जो आनंद के मूल कंद हैं और पापों के समूह का नाश करने वाले हैं; उन अनाथों के नाथ वाराणसी के स्वामी विश्वनाथ की शरण में मैं जाता हूँ। 8. भीमशंकर (महाराष्ट्र) यो डाकिनीशाकिनिकासमाजे .. अर्थ: जो डाकिनी और शाकिनी जैसे समूहों तथा राक्षसों (पिशिताशन) द्वारा भी सेवित हैं; जो 'भीम' आदि नामों से प्रसिद्ध हैं, उन भक्तों का हित करने वाले भगवान शंकर को मैं नमन करता हूँ। 9. रामेश्वरम (तमिलनाडु) श्रीताम्रपर्णीजलराशियोगे ... अर्थ: ताम्रपर्णी और समुद्र के संगम पर (सेतुबंध) जहाँ श्री रामचंद्र जी ने स्वयं सेतु बनाकर रात्रि में बिल्वपत्रों से जिनकी पूजा की थी; उन रामेश्वर नामक शिव को मैं सदा प्रणाम करता हूँ। 10. त्र्यम्बकेश्वर (महाराष्ट्र) सिंहाद्रिपार्श्वेऽपि .. अर्थ: गोदावरी नदी के तट पर पवित्र देश में, सिंहाद्रि (ब्रह्मगिरि) पर्वत के पास जो क्रीड़ा करते हैं; जिनके दर्शन मात्र से समस्त पापों का नाश हो जाता है, उन ईश्वर त्र्यम्बकेश्वर की मैं स्तुति करता हूँ। 11. केदारनाथ (उत्तराखंड) हिमाद्रिपार्श्वेऽपि ... अर्थ: हिमालय के पार्श्व भाग में स्थित तट पर जो रमण करते हैं; मुनीश्वरों, देवताओं, असुरों, यक्षों और नागों द्वारा जिनकी निरंतर पूजा की जाती है, उन केदार नामक भगवान शिव की मैं स्तुति करता हूँ। 12. घृष्णेश्वर/धिषणेश्वर (महाराष्ट्र) एलापुरीरम्यशिवालयेऽस्मिन् ... अर्थ: एलापुर (एलोरा) के सुंदर शिवालय में जो सुशोभित हैं; जो तीनों लोकों में श्रेष्ठ और अत्यंत उदार स्वभाव के हैं, उन धिषणेश्वर (घृष्णेश्वर) नामक सदाशिव को मैं प्रणाम करता हूँ। 13. फलश्रुति (महत्व) एतानि लिङ्गानि .. अर्थ: जो मनुष्य शुद्ध मन से प्रतिदिन प्रातः काल इन बारह ज्योतिर्लिंगों के स्तोत्र का पाठ करते हैं, वे पुत्र-पौत्रों, उत्तम धन, महान कीर्ति और सुखों को प्राप्त कर अंत में सुखी होते हैं।