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GUINEA FOWL FREE RANG फार्मिक से कमाए लाखों रुपए 😘 || Guinea Fowl Business 🔥 || guinea fowl farming ➡Equipments & Services I use: Gorilla Tripod - https://amzn.to/3KEW8RV Camera - https://amzn.to/3VkNhd6 Warless Mic- https://amzn.to/3Vpt6uw Mic: Boya M1 : https://amzn.to/4clfOGm Video Editing Laptop: https://amzn.to/3VGP8dE Guinea Fowl जिसे भारत मे गिनी मुर्गी के नाम से जानाजाता है। ये अपने सामान्य मुर्गी प्रजाति के तरह एक पक्षी होता हैैं जो अफ्रीका से उत्पन्न हुए हैं। अफ्रीका में कई पोल्ट्री किसान Guinea Fowl Production खेती का व्यवसाय सफलतापूर्वक कर रहे हैं। गिनी को कभी गिनी मुर्गी, पिंटेड या ग्लानी भी कहा जाता है। वे वास्तव में जंगली पक्षी है, लेकिन अब ये घरेलू हो गए है । गिनी मुर्गीे टर्की, पार्टीरिड्स और तीतर पक्षियों से संबंधित हैं । गिनी मुर्गी बहुत साहसी, जोरदार आवाज करनेवाले और रोग मुक्त पक्षी हैं। वर्तमान में वे न केवल अफ्रीका में उपलब्ध हैं, बल्कि दुनिया भर में पाए जाते हैं और लोकप्रिय हैं। कई कारणों से लोग गिनी मुर्गी की खेती करना पसंद करते हैं। जब भी खेत में या फार्म में कुछ भी असामान्य होता है तो गिनी मुर्गी जोरदार आवाज निकलती है यानी एक प्रकार का अलार्म बजाती है।गिनी मुर्गी के तेज आवाज में चूहे और अन्य उपद्रवी जीव फार्म या खेत से दुरहि रहते है। Guinea Fowl (गिनी मुर्गी) पालन एक लाभदायी व्यवसाय हो सकता है क्यों कि गिनी मुर्गी काफी सख्त जान पक्षी है, गिनी मुर्गिपर बीमारियां काफी कम आती है। साथही गिनी मुर्गी खेतोंमें से किटको सफाया करने में काफी मदत करते है। गिनी मुर्गियी को मांस और अंडा उत्पादन दोनों के लिए भी पाला जाता है। उनके अंडे चिकन अंडे की तरह ही खाए जा सकते हैं। युवा पक्षियों का मांस काफी स्वादिष्ठ होता है। गिनी मुर्गी के मांस पचने में आसान और आवश्यक अमीनो एसिड में समृद्ध है। छोटे किसान जिनके पास जमीन कम है, उन किसानों के लिए ये गिनी फाउल बहुत उपयोगी है। इसलिए इसे लो इन्वेस्टमेंट बर्ड भी बोलते हैं, इसके रहने के लिए घर में कोई खर्च नहीं लगता है और न ही इसके दाने और दवाई पर अलग से खर्च करना होता है।सका जो आवास बनाया जाता है, वो बस इसे रखने के लिए बनाया जाता है। धूप, सर्दी और बारिश का इनपर असर नहीं होता है, अगर इन्हें खुले में भी रखते हैं तो कोई असर नहीं पड़ता है। दूसरी चीज जो फीड के बारे में, किसी भी मुर्गी पालन की अगर बात करें तो 60 से 70 प्रतिशत खर्च उत्पादन लागत फीड पर ही आती है। लेकिन गिनी फाउल पालन में आपका ये खर्च बच जाता है। क्योंकि ये चुगती है, तो जो छोटे किसान हैं और गाँव में बूढ़े और बच्चे इन्हें चराकर (चु्गाकर) ला सकते हैं। इसलिए वहां पर थोड़ा बहुत दाना देने की जरूरत पड़ती है। इससे आपका आहार का खर्च भी बच जाता है। इसी तरह मुर्गी पालन में दवाइयों और टीकाकरण में काफी खर्च हो जाता है, लेकिन गिनी फाउल को किसी तरह का कोई भी टीका नहीं लगता है और न ही कोई अलग से दवाई दी जाती है। इस तरह से ये ग्रामीण क्षेत्रों के लिए काफी उपयोगी होता है। इसकी एक और खासियत होती है, इसके अंडे के छिलके दूसरे अंडों के मुकाबले दो से ढाई गुना ज्यादा मोटा होता है, इसलिए ये आसानी से नहीं टूटता है और जहां पर लाइट वगैरह नहीं होती है वहां पर भी मुर्गी के अंडों की तुलना में देर से खराब होते हैं। जैसे कि गर्मियों के दिनों में मुर्गी का अंडा खुले में बिना फ्रिज के सात दिन में सड़ेगा, वहीं इसका अंडा 15 से 20 दिनों तक सुरक्षित रहता है। ये मूल रूप से अफ्रीका गिनिया द्वीप की रहने वाली है, उसी के नाम पर इसका नाम गिनी फाउल रखा गया है। वैसे इसका पूरा नाम हेल्मेटेड गिनी फाउल होता है, इसकी कलगी को हेल्मेट बोलते हैं, जोकि हड्डी का होता है। इसलिए इसका हेल्मेटेड गिनी फाउल नाम मिला है। इसकी कलगी से मादा और नर की पहचान की जाती है, 13 से 14 हफ्तों में मादा की कलगी नर के आपेक्षा में छोटा होता है। #guineafowl #poultryfarming #kisanfarmingleader