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सप्तशती चंडी Audio Book In Hindi Saptashati Audio Book In Hindi | Durga Saptashati Audio Book In Hindi | Saptashati Audio In Hindi durga saptashati benefits in hindi / durga saptashati ke fayde / durga saptashati ke labh दुर्गा सप्तशती के लाभ / दुर्गा सप्तशती के फायदे दुर्गा सप्तशती के पहले अध्याय का फल हिंदू मान्यता के अनुसार दुर्गा सप्तशती के पहले अध्याय का पाठ करने पर मां भगवती की कृपा से साधक के सभी मानसिक कष्ट दूर होते हैं और वह अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करता है. दुर्गा सप्तशती के दूसरे अध्याय का फल भगवती की पूजा में दुर्गा सप्तशती का दूसरा पाठ करने से साधक को भूमि-भवन से जुड़े मामलों में सफलता प्राप्त होती है. भगवती की कृपा से कोर्ट-कचहरी में चल रहे मुकदमें में उसे राहत मिलती है. आदि दुर्गा सप्तशती के अनेक फायदे हैं सभी को लिखना संभव नहीं ______________________________________________________ durga saptashati in hindi / durga saptashati hindi / durga saptashati hindi mein / durga saptashati / durga saptashati path in hindi / durga saptashati path / saptashati in hindi / saptashati hindi / saptashati hindi mein / saptashati path in hindi / saptashati / durga saptashloki / saptashloki durga / saptashloki durga in hindi / saptashloki durga hindi / saptashloki in hindi / saptashloki hindi / durga saptashloki / durga saptashloki in hindi / durga saptashloki hindi / chandi path / chandi path in hindi / chandi path hindi ---(महर्षि ऋषि का राजा सुरथ और समाधि को देवी की महिमा बताना)---- महर्षि मार्कण्डेय बोले – सूर्य के पुत्र सावर्णि की उत्पत्ति की कथा विस्तारपूर्वक कहता हूँ सुनो, सावर्णि महामाया की कृपा से जिस प्रकार मन्वन्तर के स्वामी हुए, उसका भी हाल सुनो। पहले स्वारोचिष नामक राज्य था। वह प्रजा को अपने पुत्र के समान मानते थे तो भी कोलाविध्वंशी राजा उनके शत्रु बन गये। दुष्टों को दण्ड देने वाले राजा सुरथ की उनके साथ लड़ाई हुई, कोलाविध्वंसियों के संख्या में कम होने पर भी राजा सुरथ युद्ध में उनसे हार गए। तब वह अपने नगर में आ गये, केवल अपने देश का राज्य ही उनके पास रह गया और वह उसी देश के राजा होकर राज्य करने लगे किन्तु उनके शत्रुओं ने उन पर वहाँ आक्रमण किया। राजा को बलहीन देखकर उसके दुष्ट मंत्रियों ने राजा की सेना और खजाना अपने अधिकार में कर लिया। राजा सुरथ अपने राज्याधिकार को हार कर शिकार खेलने के बहाने घोड़े पर सवार होकर वहाँ से एक भयंकर वन की ओर चल गये। उस वन में उन्होंने महर्षि मेधा का आश्रम देखा, वहाँ मेधा महर्षि अपने शिष्यों तथा मुनियों से सुशोभित बैठे हुए थे और वहाँ कितने ही हिंसक जीव परम शान्ति भाव से रहते थे। राजा सुरथ ने महर्षि मेधा को प्रणाम किया और महर्षि ने भी उनका उचित सत्कार किया। राजा सुरथ महर्षि के आश्रम में कुछ समय तक ठहरे। अपने नगर की ममता के आकर्षण से राजा अपने मन में सोचने लगे – पूर्वकाल में पूर्वजों ने जिस नगर का पालन किया था वह आज मेरे हाथ से निकल गया। मेरे दुष्ट एवं दुरात्मा मंत्री मेरे नगर की अब धर्म से रक्षा कर रहे होंगे या नहीं? मेरा प्रधान हाथी जो कि सदा मद की वर्षा करने वाला और शूरवीर था, मेरे वैरियों के वश में होकर न जाने क्या दुख भोग रहा होगा? मेरे आज्ञाकारी नौकर जो मेरी कृपा से धन और भोजन पाने से सदैव सुखी रहते थे और मेरे पीछे-पीछे चलते थे, वह अब निश्चय ही दुष्ट राजाओं का अनुसरण करते होगें तथा मेरे दुष्ट एवं दुरात्मा मंत्रियों द्वारा व्यर्थ ही धन को व्यय करने से संचित किया हुआ मेरा खजाना एक दिन अवश्य खाली हो जाएगा। इस प्रकार की बहुत सी बातें सोचता हुआ राजा निरन्तर दुखी रहने लगा। एक दिन राजा सुरथ ने महर्षि मेधा के आश्रम के निकट एक वैश्य को देखा, राजा ने उससे पूछा-भाई, तुम कौन हो? यहाँ तुम्हारे आने का क्या कारण है और तुम मुझे शोकग्रस्त अनमने से दिखाई देते हो इसका क्या कारण है? राजा के यह नम्र वचन सुन वैश्य ने महाराज सुरथ को प्रणाम करके कहा, वैश्य बोला- राजन! मेरा नाम समाधि है, मैं धनियों के कुल में उत्पन्न एक वैश्य हूँ, मेरे दुष्ट स्त्री-पुत्रादिकों ने लोभ से मेरा सब धन छीन लिया है और मुझे घर से निकाल दिया है। मैं इस तरह से दुखी होकर इस वन में चला आया हूँ और यहाँ रहता हुआ मैं इस बात को भी नहीं जानता कि अब घर में इस समय सब कुशल हैं या नहीं। rest of the durga saptashati in hindi is in the video ________________________________________ स्वर - भास्कर पंडित Voice By - Bhaskar Pandit MANTRA SAROVAR ________________________________________ "लगाइये आस्था की डुबकी " ~ मंत्र सरोवर ~ @MantraSarovar ________________________________________ #mantrasarovar #durgasaptshati #durgasaptashatiinhindi