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Raag- Bhairavi | राग भैरवी | 🎶 राग भैरवी (Raag Bhairavi) – परिचय 1. थाट (Thaat): भैरवी थाट 2. जाति (Jati): सम्पूर्ण – सम्पूर्ण (संपूर्ण स्वर आरोह और अवरोह) 3. स्वर (Notes): इसमें सातों स्वर (सा, रे, ग, म, प, ध, नि) को कोमल प्रयोग किया जाता है। केवल 'सा' और 'प' शुद्ध रहते हैं। आरोह में कभी-कभी शुद्ध रे, ग, ध, नि का प्रयोग किया जा सकता है (विवादी/लचीलापन)। 4. वादी स्वर (Main note): ‘म’ (मध्यम) 5. संवादी स्वर (Second important note): ‘सा’ 6. आरोह (Aaroh): सा रे(कोमल) ग(कोमल) म प ध(कोमल) नि(कोमल) सा' 7. अवरोह (Avroh): सा' नि(कोमल) ध(कोमल) प म ग(कोमल) रे(कोमल) सा 8. प्रचलित समय (Samay): प्रातः काल (लेकिन इसे किसी भी समय गाया-बजाया जा सकता है, खासकर उपसंहार/अंत में)। 9. प्रकृति (Nature): कोमल स्वरों के कारण करुण, भक्ति, शांति और माधुर्य से भरा हुआ। 10. उपयोग: अधिकतर यह राग ठुमरी, भजन, दादरा, कजरी, होरी, चैती और लोकगीतों में प्रयोग होता है।