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यह प्रसंग देवी‑महात्म्य में मिलता है। सृष्टि के आदिकाल में भगवान विष्णु योगनिद्रा में शेषनाग पर शयन कर रहे थे। उसी समय उनके कानों के मैल से दो भयानक असुर उत्पन्न हुए—मधु और कैटभ। 🔮 अलौकिकता कहाँ दिखती है? 1️⃣ असुरों की अद्भुत उत्पत्ति मधु और कैटभ किसी सामान्य माता-पिता से नहीं, बल्कि भगवान विष्णु के कानों के मैल से उत्पन्न होते हैं। यह स्वयं में एक अलौकिक घटना है, जो उनकी असामान्य शक्ति और दैवी उत्पत्ति को दर्शाती है। 2️⃣ सृष्टि का संकट दोनों असुर ब्रह्मा से वेद छीनकर सागर में छिपा देते हैं। इससे सृष्टि की रचना रुकने का संकेत मिलता है—यानी पूरा ब्रह्मांड संकट में आ जाता है। 3️⃣ योगनिद्रा का रहस्य भगवान विष्णु निद्रा में होने के कारण स्वयं युद्ध नहीं कर पाते। तब ब्रह्मा, देवी योगनिद्रा की स्तुति करते हैं—यही देवी आगे चलकर महामाया कहलाती हैं। देवी के प्रभाव से विष्णु जागते हैं। 👉 यह दिखाता है कि स्वयं नारायण भी देवी-शक्ति पर निर्भर हैं—यह प्रसंग देवी की सर्वोच्चता को अलौकिक ढंग से स्थापित करता है। 4️⃣ 5000 वर्षों का युद्ध भगवान विष्णु और मधु-कैटभ के बीच 5000 वर्षों तक भीषण युद्ध होता है। इतनी दीर्घ अवधि तक चलने वाला युद्ध मानवीय सीमाओं से परे, पूरी तरह अलौकिक है। 5️⃣ वरदान और माया असुरों को वरदान प्राप्त था कि वे ऐसे स्थान पर ही मारे जा सकते हैं जहाँ जल न हो। तब भगवान विष्णु उन्हें अपनी जंघाओं पर बिठाकर उनका वध करते हैं। 👉 यह दैवी बुद्धि और माया का अद्भुत प्रयोग है—अलौकिक रणनीति का शानदार उदाहरण। #satsang #prasang #bhagwatkatha #sanatandharma #maaannpoorneshwari @shrirakeshacharya777