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Missile नहीं इस बार Rice को लेकर चर्चा में आया North Korea | CommodityToday नॉर्थ कोरिया एक ऐसा जो अकसर मिसाइलों के परीक्षण के साथ ही नार्थ कोरिया के राष्ट्रपति और सर्वोच्च नेता किम जोंग उन को लेकर अकसर चर्चा में रहता है. लेकिन साउथ कोरिया का ये पड़ोसी देश केवल मिसाइलों के परीक्षण ही नहीं बल्कि गरीबी को लेकर भी चर्चा में रहता है. नार्थ कोरिया में चावल मुख्य आहार है पर हालिया रोपोर्ट्स बताती है कि नार्थ कोरिया में चावल को लेकर कई चुनौतियां भी सामने आई है. पहाड़ी भूभाग से घिरा ये देश चावल का आयात चीन,भारत और अन्य देशों से करता है. नार्थ कोरिया चावल को लेकर सजग रहता है और इसका कारण है चावल का मुख्य आहार होना. इसी बीच एक रिपोर्ट में ये बताया गया है कि नार्थ कोरिया में चावल का मार्केट प्राइस दिसंबर 2025 से गिर रहा है. एक रिपोर्ट जो नार्थ कोरिया में चावल को लेकर मार्केट प्राइस के रेगुलर सर्वो को बात करती है उसमें कहा गया है कि नये साल 2026 में 4 जनवरी को प्योंगयांग में एक किलोग्राम चावल का ट्रेड 18,000 नॉर्थ कोरियन वॉन में होता देखा गया जो कि लगभग एक महीने पहले 7 दिसंबर के सर्वे के प्राइस से 10% कम था और दो हफ़्ते पहले 21 दिसंबर के सर्वे के प्राइस से 5.8% कम दर्ज किया गया. इस सर्व में चावल को लेकर नार्थ कोरिया के दूसरे इलाकों के बाजारों में चावल की कीमतों में उतार - चढ़ाव देखे जाने का जिक्र किया गया है. इस सर्वे के मुताबिक 4 जनवरी तक नॉर्थ प्योंगान प्रांत के सिनुइजू के एक मार्केट में एक किलोग्राम चावल का व्यापार 17,900 वॉन में हुआ जो लेटेस्ट प्राइस दिसंबर की शुरुआत में रिपोर्ट किए गए प्राइस से 11.4% कम था. अब इस गिरावट को लेकर experts का मानना है कि ऐसा इस साल की चावल की फसल के दिसंबर की शुरुआत में मार्केट में आने की वजह से हैं. इसके साथ ही नार्थ कोरिया में मक्का की कीमतों में उछाल देखने को मिला है. मक्का की कीमतों में उछाल नार्थ कोरिया की जनता के लिए मुश्किलें पैदा कर रहा है क्योंकि नार्थ कोरिया की जनता के लिए चावल के साथ मक्का भी मुख्य आहार है. रिपोर्ट्स कहती है कि अनाज की कीमतों में बदलाव ने नार्थ कोरिया की आर्थिक रूप से कमजोर लोगों पर ज्यादा असर किया है. अब हालिया चावल की कीमतों में आई गिरावट को विशेषज्ञ नार्थ कोरिया के चावल उपोभोग्ताओं के लिए काफी ज्यादा राहत देने वाला नहीं बताते हैं क्योंकि वर्तमान में नॉर्थ कोरिया के मार्केटप्लेस में चावल की कीमत मक्के से तीन गुना ज़्यादा है, इसलिए चावल की कीमतों में कमी से कम इनकम वाले लोगों की खरीदने की ताकत में कोई खास सुधार न होने का दावा किया जा रहा है. इसके साथ ही आपको बता दे कि नॉर्थ कोरिया में दिसंबर के बीच तक फॉरेन एक्सचेंज रेट में जो तेज़ बढ़ोतरी देखी गई थी, जो महीने के आखिर में कम होती दिख रही है. 4 जनवरी तक के वॉन-टू-डॉलर एक्सचेंज रेट की बात की जाए तो बताया गया है कि प्योंगयांग के एक मार्केट में वॉन-टू-डॉलर एक्सचेंज रेट 39,200 था, जो पिछले सर्वे से सिर्फ़ 0.5% ज़्यादा था. जहां तक चावल की बात है तो चीन चावल का मुख्य रूप से आयात चीन से करता है लेकिन खाद्य संकट के दौरान, उत्तर कोरिया ने भारत से चावल खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है. चावल के लिए चीन के अलावा नार्थ कोरिया द्वारा भारत से संपर्क करने को विशेषज्ञ चावल के लिए चीन पर निर्भरता को कम करने की दिशा में उठाया गया कदम बताते हैं. इसके अलावा समय - समय पर नार्थ कोरिया को कई देशों से चावल की मदद भी मिलती आई है. अब नार्थ कोरिया में लोकप्रिय चावलों की बात की जाए तो नार्थ कोरिया में मल्टीग्रेन चावल, ब्राउन चावल, काला चावल और जौ का चावल शामिल काफी पंसद किया जाता है. साथ ही चिपचिपा चावल यहां की जनता को काफी पसंद है. नार्थ कोरिया की भौगोलिक स्थिती की बात की जाए तो इसका लगभग 80 प्रतिशत भाग पर्वतीय है, और उत्तर कोरिया के भूभाग का केवल 14 प्रतिशत भूमि ही कृषि योग्य है. यहां गर्मियों में फसल उगाने का मौसम भी छोटा होता है. कृषि योग्य कम भूमि और छोटे मौसम के कारण यहां चावल की जगह मक्का की खपत में तेजी देखी गई है और वर्तमान में मक्का की कीमत चावल से ज्यादा होने ने यहां की जनता के जैब पर असर को बढ़ाने का काम किया है. चावल उत्पादन में आगे बढ़ने की कोशिश करता हुआ भी नार्थ कोरिया नजर आता है जिसमें नार्थ कोरिया द्वारा System of Rice Intensification जैसी तकनीकें अपना़ई जा रही है. इस तकनीक में कम बीज से अधिक उत्पादन की कोशिश की जाती है. नार्थ कोरिया में उगाए जाने वाले चावल की बात की जाए तो यहां चेओरवोन ओडे चावल नामक एक किस्म की खेती होती है जो उच्च गुणवत्ता वाला, कठोर बनावट वाला सफेद चावल होता है. इस चावल को शुद्धता के लिए भी जाना जाता है. इस तरह चावल उत्तर कोरिया के लिए काफी जरूर है. चावल की खपत के लिए आयात पर निर्भर होना उत्तर कोरिया की मजबूरी है क्योंकि नार्थ कोरिया में चावल उत्पादन को लेकर कई चुनौतियां है. ttps:// • भारत के चावल रिकार्ड उछाल के क्या मायने ? 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