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Kalp Kedar’s Rebirth: A Kedarnath-Style Revival ऑ केदारनाथ की तर्ज पर होगा कल्प केदार का कायाकल्प केदारनाथ की तर्ज पर होगा कल्प केदार का कायाकल्प उत्तरकाशी जिले की गंगोत्री घाटी में स्थित धराली गाँव में तबाही का मंजर है। 30 सेकेण्ड में धराली बाजार पूरा नक़्शे से गायब हो गया। अब बचा है तो टनों मलबा। इसी मलबे में ऐतिहासिक मंदिर कल्प केदार भी भी समा चुके है। आखिर क्या इतिहास है कल्प केदार मंदिर का? इतिहास में जाए तो कल्प केदार मंदिर कई बार भागीरथी और खीर गाड़ नदियों के कारण पहले भी मलबे में समाधि ले चुका है। 1941 में मंदिर की खुदाई कर उसे बाहर निकाला गया। इतिहास में कई बार भूकंप, एवलांच और बाढ़ के थपेड़ों को सहता ये मंदिर 14वीं शताब्दी में निर्मित हुआ। यहाँ पर एक पूरा मंदिर समूह हुआ करता था। भगीरथी घाटी के उपला तकनौर क्षेत्र को कल्प केदार क्षेत्र कहा जाता है। 5 अगस्त को कल्प केदार मंदिर पूरी तरह मलबे से ढक गया। इस मंदिर का आधे हिस्सा ज़मीन में धंसा हुआ है। पुरातत्विद और इतिहासकार डॉ यशवंत सिंह कटौच कहते है कि मंदिर बहुत प्राचीन है जो 14वीं से 15वीं शताब्दी के बीच निर्मित है।यह एक रथ शिखर शैली में निर्मित है जिसकी ऊँचाई 30 फ़ीट के करीब है। मंदिर का गर्भ गृह पानी में अंदर धंस चुका है। मंदिर की दीवार पर गजे सिंह की मूर्ति है। 5 अगस्त से पहले मंदिर में पूजा अर्चना की जाती रही। मंदिर कब और किसने बनाया इसका ऐतिहासिक प्रमाण मौजूद नहीं है। इस पूरे क्षेत्र में पहले 240 से ज्यादा मंदिर बतायें जाते है जो झाला, पुराली और धराली में रहे। मंदिर की स्थापना के कई वर्षों के बाद वर्तमान गाँव अस्तित्व में आये। 1930 के आस पास यहाँ पर एक धर्मशाला भी थी। यह मंदिर खीर गाड़ और भागीरथी के संगम पर बसा है। धराली त्रासदी के बाद अब राज्य सरकार इस मंदिर को फिर से खुदाई कर केदारनाथ के तर्ज पर पुर्ननिर्माण करने जा रही है।रेस्क्यू अभियान के ख़त्म होने के बाद कल्प केदार मंदिर का कार्य शुरू होगा। धराली, मुखबा और झाला इस क्षेत्र के सबसे पुराने गाँव है। हालांकि कुछ इतिहासकार ऐसे 8वीं शताब्दी का भी मानते है। ASI की रिपोर्ट में हालांकि मंदिर निर्माण 14वीं शताब्दी के आस पास बताई गई है। कल्प केदार मंदिर के आस पास कई मंदिर पहले थे। 18वीं शताब्दी में कई विदेशी लेखकों ने यहाँ अनेक मंदिरों का जिक्र किया है। इतिहासकार डॉ शिव प्रसाद नैथानी अपनी किताब उत्तराखंड के मंदिर और तीर्थ में मंदिर के निर्माण और स्थापत्य कला का विस्तार से वर्णन करते है।गंगा भागीरथी नदी के उदगम की खोज में निकले जेम्स विलियम फ्रेजर 1816 धराली गाँव में रुके। अपने यात्रा वृतांत में कल्प केदार मंदिर का जिक्र किया है। वे लिखते है कि धराली गाँव में मंदिर के पास उन्होंने विश्राम किया। उस समय यहाँ गाँव में वीरनी छाई हुई है। उसके बाद 1865 ब्रिटिश फोटोग्राफर ने पहली बार कल्प केदार मंदिर समूह की फोटो खींची जिसमें 3 मंदिर दिखाई दे रहे है। कल्प केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष राजेश पंवार ने बताते है कि मंदिर पांडव कालीन है और पड़ाव जब गौत्र हत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए हिमालय की में आये तो उन्होंने इस स्थान पर भगवान शिव की तपस्या की। भोलेनाथ ने उन्हें दर्शन नहीं दिए और यही पर समाधि ले ली। कल्प केदार मंदिर खीर गाड़ के मलबे में समाने से पहले करीब 25 फुट ज़मीन से ऊपर था और करीब 15 फुट ज़मीन में धंसा हुआ है। पूरे वर्ष यह मंदिर गंगा जी के पानी में डूबा रहता है और सावन के महीने में यहाँ पूजा अर्चना होती है। यह स्वयंभु स्फटिंग लिंग है।उपला टकनौर क्षेत्र का यह आस्था का केंद्र है। In the serene Gangotri valley, Kalp Kedar Temple in Dharali has once again been buried under debris after a devastating flash flood, reminiscent of Kedarnath’s tragedy. Believed to date back to the 14th century and built in Rath Shikhar style, the temple holds deep historical and spiritual significance. Now, the Uttarakhand government plans its grand restoration, just like Kedarnath’s revival. #KalpKedar #UttarakhandFloods #HimalayanHeritage #KedarnathReconstruction Kalp Kedar Temple, Dharali floods, Uttarakhand temple restoration, Kedarnath style reconstruction, Himalayan temples, Gangotri valley heritage, ancient Shiva temple, Rath Shikhar architecture, 14th century temple, Bhagirathi valley history, Khir Gad river floods, Dharali tragedy, Uttarakhand spiritual tourism, ASI heritage sites India, Himalayan disaster recovery drone shots-@kalpkedar youtube link- / @kalpkedar