У нас вы можете посмотреть бесплатно काशी की गलियों में छुपा एक ऐसा रहस्य…जहाँ शिव की नगरी मेंश्री जगन्नाथ स्वयं विराजमान हैं। 🙏🛕 или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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"क्या आप जानते हैं कि महादेव की नगरी काशी में एक ऐसा मंदिर भी है, जहाँ भगवान साल में 15 दिन के लिए सच में बीमार पड़ जाते हैं? न कोई दर्शन, न कोई शोर... सिर्फ रहस्य!" क्या आप जानते हैं कि महादेव की नगरी काशी में एक ऐसा स्थान भी है, जहाँ हर साल भगवान जगन्नाथ खुद बीमार पड़ते हैं और 15 दिनों तक एकांतवास में रहते हैं? अगर आप पुरी नहीं जा पा रहे हैं, तो बनारस का यह मंदिर आपको साक्षात नीलांचल धाम का अनुभव कराएगा।" यह मंदिर लगभग 200 साल पुराना है (1802 ई.), जिसे नागपुर के भोंसले परिवार ने बनवाया था। यहाँ की मूर्तियाँ भी पुरी की तरह नीम की लकड़ी से बनी हैं। अनोखी परंपरा (स्नान यात्रा): ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन भगवान को 108 घड़ों के जल से स्नान कराया जाता है, जिसके बाद उन्हें 'ज्वर' (बुखार) आ जाता है। इस दौरान भक्तों के लिए पट बंद रहते हैं और भगवान को जड़ी-बूटियों का काढ़ा दिया जाता है। लक्खा मेला (रथ यात्रा): बनारस की रथ यात्रा उत्तर भारत के सबसे बड़े मेलों में से एक है। अस्सी से रथ यात्रा शुरू होकर 'बेनीराम के बाग' तक जाती है। दर्शन का लाभ: मान्यता है कि यहाँ दर्शन करने से वही पुण्य मिलता है जो ओडिशा के पुरी धाम की यात्रा से प्राप्त होता है। दोस्तों, आपने देखा होगा कि भगवान जगन्नाथ की मूर्ति अधूरी सी लगती है।कहते हैं — भगवान पूर्ण नहीं, भाव देखते हैं।उनकी बड़ी आँखें इस बात का प्रतीक हैं कि वे हर भक्त को बिना पलक झपकाए देखते रहते हैं।” “ऐसा माना जाता है कि पुरी और काशी आध्यात्मिक रूप से जुड़ी हुई हैं।जो भक्त पुरी नहीं जा पाते, उनके लिए काशी का यह जगन्नाथ मंदिर भी उतना ही पुण्य फल देता है।” “स्थानीय लोगों का विश्वास है कि यहाँ मांगी गई सच्चे दिल की मुराद कभी खाली नहीं जाती।कई भक्त कहते हैं — ‘जब सब रास्ते बंद हो गए, तब जगन्नाथ जी ने दरवाज़ा खोला।’” “काशी की भीड़-भाड़ के बीच यह मंदिर एक ऐसी जगह है,जहाँ आते ही मन अपने आप शांत हो जाता है।यहाँ शोर नहीं, सिर्फ आस्था की आवाज़ सुनाई देती है।” “भगवान जगन्नाथ, कोई साधारण देवता नहीं हैं।वे श्रीकृष्ण का वही रूप हैं —जो राजा नहीं, मित्र बने,जो ईश्वर नहीं, अपने बने।” “जगन्नाथ शब्द का अर्थ है —जगत के नाथ, यानी पूरी सृष्टि के स्वामी।” “उनकी मूर्ति अधूरी क्यों है?क्योंकि भगवान जगन्नाथ हमें यह सिखाते हैं कि —ईश्वर को पूरा नहीं, भाव से पूजा जाता है।” “पुराणों के अनुसार, जब भगवान कृष्ण ने पृथ्वी छोड़ी,तो उनका हृदय सुरक्षित रहा।उसी हृदय से बनीं — भगवान जगन्नाथ की मूर्तियाँ।” “कहा जाता है कि मूर्ति निर्माण के समय एक शर्त थी —जब तक मूर्ति बनेगी, कोई देखेगा नहीं।” “अब आता है सबसे बड़ा सवाल —पुरी के भगवान काशी में कैसे?” “मान्यता है कि काशी हमेशा से ज्ञान और मोक्ष की भूमि रही है।कई संत, राजा और भक्त पुरी की यात्रा नहीं कर पाते थे।” “कहते हैं, एक महान भक्त ने भगवान जगन्नाथ से प्रार्थना की —‘प्रभु, जो काशी आता है, उसे भी आपके दर्शन मिलें।’” “और तब…भगवान स्वयं काशी में प्रकट हुए।” “यह मंदिर सिर्फ ईंट-पत्थर से नहीं बना,यह भक्तों की आस्था से बना है।” “यहाँ भगवान जगन्नाथ,बलभद्र और सुभद्रा जीउसी भाव में विराजमान हैं —जैसे पुरी में।” “ऐसा माना जाता है किजो भक्त सच्चे मन से यहाँ आता है,उसे पुरी के दर्शन का पुण्य मिलता है।” “स्थानीय लोग बताते हैं —यहाँ माँगी गई मन्नत कभी खाली नहीं जाती।” “कई लोगों का कहना है —जब जीवन में सब रास्ते बंद हो गए,तब जगन्नाथ जी ने नया रास्ता खोल दिया।” “यह मंदिर खास तौर परमानसिक शांति और जीवन की उलझनों के लिए प्रसिद्ध है।” “दोस्तों, हर प्राचीन मंदिर में एक रहस्य होता है…और वाराणसी के जगन्नाथ मंदिर में यह रहस्य छुपा हैइस पवित्र कुंड में।” “यह कुंड सिर्फ पानी नहीं है,यह आस्था, तपस्या और चमत्कारों का साक्षी है।” “मान्यता है कि जब इस क्षेत्र में भगवान जगन्नाथ की स्थापना हुई,तो यहाँ जल का कोई स्थायी स्रोत नहीं था।” “कहते हैं, एक महान संत नेभगवान से प्रार्थना की —‘प्रभु, जिस स्थान पर आप विराजमान हों,वहाँ शुद्ध जल भी होना चाहिए।’” “तब संत ने तपस्या की…और कहा जाता है किभगवान जगन्नाथ की कृपा से यह कुंड प्रकट हुआ।” “स्थानीय मान्यता है कि इस कुंड का जलमन और शरीर — दोनों को शुद्ध करता है।” “पहले समय में भक्तदर्शन से पहलेइसी कुंड के जल सेआचमन और स्नान करते थे।” “ऐसा कहा जाता है किजो व्यक्ति सच्चे मन सेइस कुंड का जल स्पर्श करता है,उसके जीवन के क्लेश धीरे-धीरे दूर होने लगते हैं।” बात करते हैंइस मंदिर के एक और शक्तिशाली रक्षक की —गरुड़ भगवान।” “गरुड़ जी कोई साधारण पक्षी नहीं,वे भगवान विष्णु के वाहन हैं,और भगवान जगन्नाथ स्वयं विष्णु स्वरूप हैं।”“हर जगन्नाथ मंदिर मेंगरुड़ जी का स्थानमुख्य मंदिर के सामने होता है।” “मान्यता है किगरुड़ जी पहलेभक्त की प्रार्थना सुनते हैं,फिर उसे भगवान तक पहुँचाते हैं।” “इसलिए कहा जाता है —गरुड़ जी से माँगी गई प्रार्थना खाली नहीं जाती।” “कुंड शुद्धि का प्रतीक हैऔर गरुड़ जी रक्षा के।” “एक भक्त पहलेकुंड के पास मन को शांत करता है,फिर गरुड़ जी के सामनेअपनी पीड़ा रखता है।” “और अंत मेंभगवान जगन्नाथ के दर्शन करता है।” “काशी स्वयं मोक्ष देती हैऔर जगन्नाथ स्वयं कृपा।” “जब ये दोनों मिलते हैं,तो इंसान को सिर्फ भगवान नहीं,खुद का उत्तर मिलता है।” “यही कारण है कि यहाँ बैठते हीमन अपने आप शांत हो जाता है।”“दोस्तों,वाराणसी का यह जगन्नाथ मंदिरएक जगह नहीं,एक अनुभव है।” “अगर आप कभी काशी आएँ,तो इस मंदिर में ज़रूर आइएगा।” “क्योंकि यहाँ भगवानसिर्फ दर्शन नहीं देते,अपनापन देते हैं।” “जय जगन्नाथ 🙏जय काशी विश्वनाथ 🙏” #Varanasi #JagannathMandir #HiddenTemples #BanarasVibes #SanatanDharma #TempleReels #IndianCulture #SpiritualIndia