У нас вы можете посмотреть бесплатно पॉक्सो (POCSO) एक्ट 2012 (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम। или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
Если кнопки скачивания не
загрузились
НАЖМИТЕ ЗДЕСЬ или обновите страницу
Если возникают проблемы со скачиванием видео, пожалуйста напишите в поддержку по адресу внизу
страницы.
Спасибо за использование сервиса ClipSaver.ru
पॉक्सो (POCSO) एक्ट 2012 (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम) भारत में 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को यौन शोषण, उत्पीड़न और अश्लील सामग्री (pornography) से बचाने वाला एक विशेष और कठोर कानून है। यह कानून 14 नवंबर 2012 से लागू हुआ, जो पीड़ित बच्चे की पहचान गुप्त रखते हुए त्वरित सुनवाई और अधिकतम सज़ा सुनिश्चित करता है। पॉक्सो एक्ट की मुख्य विशेषताएं और प्रावधान: लिंग-तटस्थ (Gender Neutral): यह कानून लड़के और लड़कियां दोनों को सुरक्षा प्रदान करता है । परिभाषा: 18 वर्ष से कम उम्र का कोई भी व्यक्ति इस एक्ट के तहत 'बच्चा' माना जाता है। सहमति अप्रासंगिक: यदि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चे के साथ यौन कृत्य किया जाता है, तो बच्चे की 'सहमति' का कोई कानूनी महत्व नहीं है; यह अपराध ही माना जाएगा। अपराध और सजा (धारा 3-12):गंभीर यौन हमला (Aggravated Sexual Assault): इसमें 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।यौन हमला: इसमें 3 से 5 वर्ष तक की सजा हो सकती है।यौन उत्पीड़न: 3 से 5 वर्ष तक की सजा और जुर्माना। रिपोर्टिंग अनिवार्य: किसी भी व्यक्ति को अपराध का पता चलने पर तुरंत पुलिस या विशेष किशोर पुलिस यूनिट को सूचित करना अनिवार्य है, अन्यथा यह भी दंडनीय है। त्वरित सुनवाई: मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतें (Special Courts) हैं, और कोशिश की जाती है कि मामला 1 साल के भीतर सुलझ जाए। पीड़ित का संरक्षण: पुलिस को 24 घंटे के भीतर मामले की रिपोर्ट करनी होती है और बच्चे के पुनर्वास का प्रावधान है। प्रक्रिया: बयान रिकॉर्ड करते समय बच्चे की निजता का ध्यान रखा जाता है। यह कानून सबूत के तौर पर यौन मंशा (Intention) पर जोर देता है। नोट: पॉक्सो एक्ट के तहत झूठी शिकायत करने पर भी 6 महीने से 1 साल तक की सजा का प्रावधान है।