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भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या धाम में 18 नवंबर 2024 से 1 जनवरी तक 45 दिन के लिए कलियुग के महाशक्तिशाली यागम, 'श्री महा नारायण दिव्य रुद्र सहिता शत सहस्र विश्व शांति चंडी महायागम' का शंखनाद हो गया है। विश्व शांति और कल्याण के उद्देश्य से आयोजित इस दिव्य रुद्र सहित शत सहस्र चंडी महायज्ञ का आयोजन श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, श्री कांची कामकोटि पीठम और चिन्मयी सेवा ट्रस्ट द्वारा किया जा गया है। इस महायज्ञ से पूरे विश्व में शांति, खुशी, समृद्धि और कल्याण के लिए भगवान रुद्र और देवी चंडी के आशीर्वाद की कामना की जा रही है। भारत के 1000 से अधिक वैदिक ऋत्विक प्राचीन अनुष्ठान के साथ पर्यावरण को शुद्ध करने का काम कर रहे हैं। यह महायज्ञ अयोध्या और कांची के बीच के संबंध की ऐतिहासिक संस्कृति की याद दिलाता है, जहां राजा दशरथ ने पुत्र कामेष्टि यज्ञ किया था, जिसके परिणामस्वरूप भगवान श्री राम का जन्म हुआ था। यह शक्तिशाली महायज्ञ कांची और अयोध्या धाम के साथ गहरा संबंध रखता है। यह यज्ञ ग्रह संबंधी कष्टों का भी निवारण करता है और भक्तों को लंबी आयु का आशीर्वाद देता है। राम जन्मभूमि में आयोजित किए जा रहे इस महा शक्तिशाली महायज्ञ के कई लाभ हैं। ये यज्ञ स्वास्थ्य संकट, वित्तीय अस्थिरता और संघर्ष जैसी चुनौतियों का समाधान करता है। शांति, समृद्धि और कल्याण को बढ़ावा देता है। यह महायज्ञ पर्यावरण शुद्धिकरण हेतु भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। 45 दिवसीय इस महायज्ञ में विश्व शांति के लिए प्रत्येक दिन विभिन्न प्रकार के धार्मिक कार्य किए निश्चित हैं। प्रतिदिन 48 जोड़ों के साथ महायज्ञ में 14 हवन होंगे, प्रतिदिन 2 जोड़ों के साथ 2 शरसा चंडी हवन होंगे। 1000 वैदिक ऋत्विक पवित्र अनुष्ठान में शामिल हो चुके हैं। सभी दैनिक अनुष्ठान भक्तों को विश्व शांति में योगदान देने, जीवन के विभिन्न पहलुओं पर ध्यान देने, बाधाओं को दूर करने, सुरक्षा सुनिश्चित करने, स्वास्थ्य को बढ़ावा देने, धन और बुद्धि देने, ग्रहों के कष्टों को बेअसर करने और लंबी आयु के लिए आशीर्वाद स्वरूप है। महायज्ञ प्रतिदिन सुबह 8 बजे आरंभ होकर और रात 11 बजे तक आयोजित हैं। महायज्ञ में सुब्रह्मण्यम महामन्त्रनुष्ठानम्, अभिषेकम्, सहस्र लिंगार्चन, षोडसवर्णपूजा, रुद्राभिषेकम्, चंडी सप्तशती, महारुद्रम का जाप, दुर्गा सप्तशती हवन, सुदर्शन महामंत्र का जाप, विभिन्न अन्य जाप, लक्ष्मी नारायण, राम षडाक्षरी (66 लाख), कार्तवीर्यार्जुन, धन्वंतरि सामूहिक श्री सीतामूला कल्याणम, कुमारी पूजा, लक्ष्मी गणपति हवन, सुब्रह्मण्य हवन, आदित्य हवन, सुदर्शन हवन, वनदुर्गा हवन, नवग्रह हवन, श्री रामतारक हवन, अंजनेय हवन, महालक्ष्मी हवन, धन्वंतरि हवन, मृत्युंजय हवन और मां सरस्वती के हवन निर्धारित हैं। #ayodhya #mahayagya #devotional #rammandir #tilak #tilakpatrika