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Magh Purnima Vrat Kath| माघ पूर्णिमा व्रत कथा | Purnima ki Kahani | पूर्णिमा व्रत कथा |माघीपूर्णिमा माघ पूर्णिमा व्रत कथा प्राचीन काल में एक नगर में एक सदाचारी लेकिन अत्यंत गरीब महिला रहती थी। वह भगवान विष्णु में गहरी आस्था रखती थी। माघ महीने में जब उसने माघ पूर्णिमा व्रत के बारे में सुना, तो उसने निश्चय किया कि वह पूरी श्रद्धा से यह व्रत करेगी। माघ पूर्णिमा के दिन वह ब्रह्ममुहूर्त में उठी, पास की नदी में स्नान किया और घर आकर भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा की। दिन भर उपवास रखकर “ॐ नमो नारायणाय” मंत्र का जाप करती रही। उसके पास दान के लिए कुछ नहीं था, फिर भी उसने अपनी क्षमता अनुसार एक मुट्ठी चावल और थोड़ा सा तिल दान किया। रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देकर उसने व्रत पूर्ण किया। उसी रात उसे स्वप्न में भगवान विष्णु के दर्शन हुए। भगवान ने कहा— “वत्से, तुमने श्रद्धा और नियम से यह व्रत किया है। यह व्रत जन्म-जन्मांतर के पापों का नाश करता है और मनोकामनाएँ पूर्ण करता है।” इसके बाद उस स्त्री का जीवन सुख-समृद्धि से भर गया और अंत समय में उसे वैकुंठ लोक की प्राप्ति हुई। तभी से यह माना जाता है कि माघ पूर्णिमा का व्रत सच्चे मन से करने पर भगवान विष्णु विशेष कृपा करते हैं। 🪔 व्रत का महत्व स्नान, व्रत और दान से पुण्य की प्राप्ति चंद्र देव को अर्घ्य देने से मानसिक शांति विष्णु कृपा से कष्टों का नाश