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ओशो (Rajneesh) — पूरी सच्चाई कौन थे ओशो? मूल नाम: चंद्र मोहन जैन जन्म: 11 दिसंबर 1931, कुचवाड़ा, मध्य प्रदेश मृत्यु: 19 जनवरी 1990, पुणे वे एक विवादास्पद आध्यात्मिक गुरु थे जिन्होंने दर्शनशास्त्र, ध्यान और यौन स्वतंत्रता पर अपने विचारों से करोड़ों लोगों को प्रभावित किया — और उतने ही लोगों को नाराज़ भी किया। सकारात्मक पहलू बेहतरीन वक्ता — हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों में असाधारण प्रतिभा विशाल ज्ञान — गीता, बाइबल, ज़ेन, सूफ़ीवाद, पश्चिमी दर्शन सब पर गहरी पकड़ ध्यान तकनीकें — Dynamic Meditation जैसी विधियाँ आज भी प्रचलित हैं पारंपरिक पाखंड पर हमला — जाति, धर्म के नाम पर शोषण की खुलकर आलोचना लाखों जीवन बदले — कई लोगों को सच में मानसिक शांति मिली विवाद और अंधेरा पक्ष 🇺🇸 अमेरिका — ओरेगॉन कांड (1981–1985) ओशो के Oregon आश्रम "Rajneeshpuram" में उनकी सेक्रेटरी Ma Anand Sheela ने अमेरिकी इतिहास का पहला बायो-टेरर हमला करवाया ओरेगॉन के एक कस्बे में 751 लोगों को Salmonella से जहर दिया गया होटलों में बम रखे गए, हत्या की कोशिशें हुईं ओशो खुद क्या जानते थे? — यह आज भी बहस का विषय है। उन्होंने बाद में Sheela को दोषी ठहराया 💊 ड्रग्स और हथियार आश्रम में अवैध हथियार पाए गए ओशो पर इमिग्रेशन फ्रॉड के 35 आरोप लगे अमेरिका से डिपोर्ट किए गए (1985) 21 देशों ने उन्हें घुसने से मना कर दिया 💰 विलासिता और पैसा उनके पास 93 Rolls-Royce कारें थीं — भक्तों के दान से खरीदी गई आश्रम एक करोड़ों डॉलर का साम्राज्य था गरीबी का उपदेश देने वाले स्वयं अत्यंत विलासी जीवन जीते थे 🧠 नियंत्रण और मनोवैज्ञानिक प्रभाव अनुयायियों को परिवार से काटा जाता था "संन्यास" लेने पर नाम बदलवाया जाता था — पहचान मिटाने की तकनीक आलोचना करने वालों को बाहर निकाला जाता था कई पूर्व शिष्यों ने मानसिक शोषण के आरोप लगाए ओशो की मृत्यु — रहस्य उनकी मृत्यु 58 साल की उम्र में हुई। उनके करीबियों का दावा था कि अमेरिकी जेल में उन्हें जहर दिया गया (Thallium poisoning)। सरकारी कारण था — दिल की बीमारी। सच्चाई आज तक स्पष्ट नहीं। निष्कर्ष — क्या सोचें? पहलू सच्चाई ज्ञान असाधारण और वास्तविक इरादा विवादास्पद संगठन भ्रष्ट और खतरनाक साबित हुआ व्यक्तिगत जीवन उपदेश और आचरण में भारी अंतर सबसे ज़रूरी बात: ओशो की बातें पढ़ना और उन्हें "गुरु" मानकर अंधा अनुसरण करना — दोनों बिल्कुल अलग चीज़ें हैं। उनके विचारों में से जो तर्कसंगत लगे वो लें, बाकी को परखें। "किसी के भी पीछे आँख मूंदकर मत चलो — यह बात खुद ओशो भी कहते थे, भले ही उनके अनुयायी ऐसा नहीं करते थे।"