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Mirza Ghalib Simplified चलता रहता दिन रात तमाशा मेरे आगे ! Video Original Shayari From Mirza Ghalib : बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया मिरे आगे होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मिरे आगे इक खेल है औरंग-ए-सुलैमाँ मिरे नज़दीक इक बात है एजाज़-ए-मसीहा मिरे आगे जुज़ नाम नहीं सूरत-ए-आलम मुझे मंज़ूर जुज़ वहम नहीं हस्ती-ए-अशिया मिरे आगे होता है निहाँ गर्द में सहरा मिरे होते घिसता है जबीं ख़ाक पे दरिया मिरे आगे मत पूछ कि क्या हाल है मेरा तिरे पीछे तू देख कि क्या रंग है तेरा मिरे आगे सच कहते हो ख़ुद-बीन ओ ख़ुद-आरा हूँ न क्यूँ हूँ बैठा है बुत-ए-आइना-सीमा मिरे आगे फिर देखिए अंदाज़-ए-गुल-अफ़्शानी-ए-गुफ़्तार रख दे कोई पैमाना-ए-सहबा मिरे आगे नफ़रत का गुमाँ गुज़रे है मैं रश्क से गुज़रा क्यूँकर कहूँ लो नाम न उन का मिरे आगे ईमाँ मुझे रोके है जो खींचे है मुझे कुफ़्र काबा मिरे पीछे है कलीसा मिरे आगे आशिक़ हूँ प माशूक़-फ़रेबी है मिरा काम मजनूँ को बुरा कहती है लैला मिरे आगे ख़ुश होते हैं पर वस्ल में यूँ मर नहीं जाते आई शब-ए-हिज्राँ की तमन्ना मिरे आगे है मौजज़न इक क़ुल्ज़ुम-ए-ख़ूँ काश यही हो आता है अभी देखिए क्या क्या मिरे आगे गो हाथ को जुम्बिश नहीं आँखों में तो दम है रहने दो अभी साग़र-ओ-मीना मिरे आगे हम-पेशा ओ हम-मशरब ओ हमराज़ है मेरा 'ग़ालिब' को बुरा क्यूँ कहो अच्छा मिरे आगे -------------------- Simplified Version ( DJV4 Team X Majaal) : लगे दुनिया खेल बचकाना सा मेरे आगे, चलता रहता दिन-रात तमाशा मेरे आगे... !! ना ताज़ों तख़्त मेरे लिए है बात कोई बड़ी, अजूबा मसीहे का लगे बौना मेरे आगे.... !! दुनिया के तरीके बहुत मुबारक हो उन्हें, ये हकीकत फकत सपना है मेरे आगे... !! जुनूँ यूँ की - निगल जाऊँ रेगिस्ता बिन डकारे , प्यास ये की - गटक जाऊँ समंदर मेरे आगे .. !! न सोच तू की - क्या हाल है मेरा तेरे पीछे? तू देख ये - की क्या है तेरा रंग मेरे आगे.... !! कभी लगता था, ऊपरवाला हरदम मेरे पीछे, अभी लगने लगा की - वो भी क्या मेरे आगे...!! खबर अंदाज़े बयां की पड़ी ग़ालिब पीछे, यूँ तो इनदिनों वो भी लगता क्या मेरे आगे... !! बुरे की इंतिहा से रह गुज़र भला हुआ हूँ, बुरा भी इसीलिए लगे भला मेरे आगे... !! ईमाँ में ही पाया है ईश्वर और अल्ला, मंदिर मेरे पीछे, काबा मेरे आगे... !! आशिक़ी में बेवफाई भी कबूल करी, मजनूँ को कहती 'बुरा', लैला मेरे आगे... !! जीना मरना, मरना जीना सिखाता है, आई फिर से वहीँ तमन्ना मेरे आगे...!! जिन्हे लगता है, ग़ालिब को है पहचान लिया, देखिएगा क्या क्या आता है मेरे आगे...!! जिंदगी नाम जिंदादिली का मेरे देखे, मुर्दे में भी कुछ है जिन्दा मेरे आगे... !! सोचता भी, दिखता भी हू-ब-हू मेरे जैसा, दो दाद 'ग़ालिब' को उम्दा मेरे आगे... !!