У нас вы можете посмотреть бесплатно ॐ जय शिव ओंकारा | केदारनाथ धाम दर्शन के साथ | भगवान शिव की दिव्य आरती | Lord Shiva Aarti или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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ॐ जय शिव ओंकारा भगवान शिव की सबसे प्रसिद्ध और पावन आरती है। यह आरती शिव से जुड़े लगभग हर शुभ अवसर पर श्रद्धा और भक्ति के साथ गायी जाती है। इस वीडियो में आप इस दिव्य आरती का मधुर गायन सुनेंगे, जिसके साथ केदारनाथ धाम के मनोहारी और पवित्र दृश्य प्रदर्शित किए गए हैं। हिमालय की गोद में स्थित यह ज्योतिर्लिंग, भगवान शिव का अत्यंत दिव्य धाम है। केदारनाथ मंदिर के दर्शन के साथ जब यह आरती गूंजती है, तो ऐसा अनुभव होता है मानो स्वयं बाबा केदार भक्तों को अपने समीप बुला रहे हों। दीपक की ज्योति, आरती के पवित्र शब्द और केदारनाथ के दिव्य दृश्य — यह वीडियो आपको भक्ति, शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देगा। आप इसे प्रातः पूजा, संध्या आरती, महाशिवरात्रि, सावन मास या ध्यान के समय अवश्य सुनें। 🔱 यह केवल एक आरती नहीं, बल्कि बाबा केदारनाथ से जुड़ने का एक दिव्य अनुभव है। Om Jai Shiv Omkara – the most sacred aarti of Lord Shiva, beautifully overlaid with divine visuals from Kedarnath Temple. Experience peace, devotion, and the spiritual presence of Baba Kedarnath. 🕉️ हर हर महादेव 🕉️ ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ एकानन चतुराननपञ्चानन राजे। हंसासन गरूड़ासनवृषवाहन साजे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ दो भुज चार चतुर्भुजदसभुज अति सोहे। त्रिगुण रूप निरखतेत्रिभुवन जन मोहे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ अक्षमाला वनमालामुण्डमाला धारी। त्रिपुरारी कंसारीकर माला धारी॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ श्वेताम्बर पीताम्बरबाघम्बर अंगे। सनकादिक गरुणादिकभूतादिक संगे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ कर के मध्य कमण्डलुचक्र त्रिशूलधारी। सुखकारी दुखहारीजगपालन कारी॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ ब्रह्मा विष्णु सदाशिवजानत अविवेका। प्रणवाक्षर मध्येये तीनों एका॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ लक्ष्मी व सावित्रीपार्वती संगा। पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा। भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ जटा में गंगा बहत है, गल मुण्डन माला। शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी। नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ त्रिगुणस्वामी जी की आरतीजो कोइ नर गावे। कहत शिवानन्द स्वामी, मनवान्छित फल पावे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥