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The Vision: In this creation, we wanted to capture the ultimate state of Bhakti (devotion). The artwork depicts Hanuman Ji not in his warrior form, but in his most powerful state—deep meditation. You’ll notice the name of Lord Ram circling him in a golden glow; this represents the "Infinite Sound" that resonates within a true devotee. The Composition: We designed the music to mirror this visual. The steady, traditional percussion played by the companions in the image inspired our rhythmic arrangement, while the ethereal light surrounding Hanuman Ji is reflected in the ambient, celestial layers of our melody. Every beat and every brushstroke were chosen to help you immerse yourself in the divine presence of the Sankat Mochan. Original Synthetic voice AI Composition edited by The Infinite Sound. All rights reserved. #theinfinitesound #hanumanchalisa #shreehanumanchalisa #hanumanji #jaishreeram #bhakti #spirituality Lyrics: ॥ दोहा ॥ श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि । बरनऊँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि ॥ बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार । बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार ॥ राम-राम, राम-राम... ॥ चौपाई ॥ जय हनुमान ज्ञान गुन सागर । जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥ १ ॥ राम दूत अतुलित बल धामा । अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा ॥ २ ॥ राम-राम... राम-राम... महाबीर बिक्रम बजरंगी । कुमति निवार सुमति के संगी ॥ ३ ॥ कंचन बरन बिराज सुबेसा । कानन कुंडल कुंचित केसा ॥ ४ ॥ राम-राम... राम-राम... हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै । काँधे मूँज जनेऊ साजै ॥ ५ ॥ शंकर सुवन केसरीनंदन । तेज प्रताप महा जग बंदन ॥ ६ ॥ बिद्यावान गुनी अति चातुर । राम काज करिबे को आतुर ॥ ७ ॥ प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया । राम लखन सीता मन बसिया ॥ ८ ॥ राम-राम... राम-राम... सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा । बिकट रूप धरि लंक जरावा ॥ ९ ॥ भीम रूप धरि असुर सँहारे । रामचंद्र के काज सँवारे ॥ १० ॥ राम-राम... राम-राम... लाय सजीवन लखन जियाये । श्रीरघुबीर हरषि उर लाये ॥ ११ ॥ रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई । तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥ १२ ॥ राम-राम... राम-राम... सहस बदन तुम्हरो जस गावैं । अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं ॥ १३ ॥ सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा । नारद सारद सहित अहीसा ॥ १४ ॥ यम कुबेर दिगपाल जहाँ ते । कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते ॥ १५ ॥ तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा । राम मिलाय राजपद दीन्हा ॥ १६ ॥ राम-राम... राम-राम... तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना । लंकेस्वर भए सब जग जाना ॥ १७ ॥ जुग सहस्र जोजन पर भानू । लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥ १८ ॥ राम-राम... राम-राम... प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं । जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥ १९ ॥ दुर्गम काज जगत के जेते । सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥ २० ॥ राम-राम... राम-राम... राम दुआरे तुम रखवारे । होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥ २१ ॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना । तुम रक्षक काहू को डर ना ॥ २२ ॥ आपन तेज सम्हारो आपै । तीनों लोक हाँक तें काँपै ॥ २३ ॥ भूत पिसाच निकट नहिं आवै । महाबीर जब नाम सुनावै ॥ २४ ॥ राम-राम... राम-राम... नासै रोग हरै सब पीरा । जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥ २५ ॥ संकट तें हनुमान छुड़ावै । मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥ २६ ॥ राम-राम... राम-राम... सब पर राम तपस्वी राजा । तिन के काज सकल तुम साजा ॥ २७ ॥ और मनोरथ जो कोई लावै । सोइ अमित जीवन फल पावै ॥ २८ ॥ राम-राम... राम-राम... चारों जुग परताप तुम्हारा । है परसिद्ध जगत उजियारा ॥ २९ ॥ साधु संत के तुम रखवारे । असुर निकंदन राम दुलारे ॥ ३० ॥ अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता । अस बर दीन जानकी माता ॥ ३१ ॥ राम रसायन तुम्हरे पासा । सदा रहो रघुपति के दासा ॥ ३२ ॥ राम-राम... राम-राम... तुम्हरे भजन राम को पावै । जनम जनम के दुख बिसरावै ॥ ३३ ॥ अंत काल रघुबर पुर जाई । जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई ॥ ३४ ॥ राम-राम... राम-राम... और देवता चित्त न धरई । हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ॥ ३५ ॥ संकट कटै मिटै सब पीरा । जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥ ३६ ॥ राम-राम... राम-राम... जय जय जय हनुमान गोसाईं । कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ॥ ३७ ॥ जो सत बार पाठ कर कोई । छूटहि बंदि महा सुख होई ॥ ३८ ॥ जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा । होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥ ३९ ॥ तुलसीदास सदा हरि चेरा । कीजै नाथ हृदय महँ डेरा ॥ ४० ॥ राम-राम... राम-राम... ॥ दोहा ॥ पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप । राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप ॥ राम... राम... राम... राम...