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🙏 जय श्री गणेशयह शक्तिशाली श्री गणेश चालीसा सुनने से सभी विघ्न दूर होते हैं, घर में सुख-समृद्धि आती है और बुद्धि का विकास होता है।हर सुबह और गणेश चतुर्थी पर इस गणेश चालीसा को सुनें और भगवान गणपति का आशीर्वाद पाएं। 🌺 यह भजन सुनने से:✨ मन शांत होता है✨ काम में सफलता मिलती है✨ घर में सुख-समृद्धि आती है✨ गणपति बप्पा की कृपा मिलती है 🔔 रोज सुनें और गणपति बप्पा का आशीर्वाद पाएँGanpati Bappa Morya 🙏 👍 Like | Share | Subscribe for more Bhakti Videos #ganeshchalisa #ganpatibhajan #ganeshbhajan #ganpati #bhaktisong #hindubhajan #ganeshji #morningbhajan #viralbhajan #bhakti ganesh chalisaganesh chalisa fastganesh chalisa powerfulganpati bhajanganesh ji bhajanganesh aartiganpati songmorning bhajanbhakti songganesh mantraganesh chalisa superhitganpati bappa moryahindu devotional songsviral bhajanbhajan 2026 श्री गणेश चालीसा 🙏 जय गणपति सदगुण सदन, कविवर बदन कृपाल। विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल॥ जय जय जय गणपति गणराजू। मंगल भरन करन शुभ काजू॥ जय गजवदन सदन सुखदाता। विश्व विनायक बुद्धि विधाता॥ वक्रतुंड शुचि शुण्ड सुहावन। तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन॥ राजित मणि मुकुट उर माला। स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला॥ पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूला। मोदक भोग सुगन्धित फूला॥ सुन्दर पीताम्बर तन साजित। चरण पादुका मुनि मन राजित॥ धनि शिवसुवन षडानन भ्राता। गौरी लालन विश्व-विख्याता॥ ऋद्धि सिद्धि तव चंवर डुलावैं। मूषक वाहन सोहत द्वारैं॥ कहौं जन्म शुभ कथा तुम्हारी। अति शुचि पावन मंगलकारी॥ एक समय गिरिराज कुमारी। पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी॥ भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा। तब पहुंच्यो तुम धरि द्विज रूपा॥ अतिथि जानि कै गौरी सुखारी। बहुविधि सेवा करी तुम्हारी॥ अति प्रसन्न ह्वै तुम वर दीन्हा। मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा॥ मिलहि पुत्र तुहि बुद्धि विशाला। बिना गर्भ धारण यहि काला॥ गणनायक गुण ज्ञान निधाना। पूजित प्रथम रूप भगवाना॥ अस कहि अन्तर्धान रूप ह्वै। पलना पर बालक स्वरूप ह्वै॥ बनि शिशु रुदन जबहि तुम ठाना। लखि मुख सुख नहिं गौरि समाना॥ सकल मगन सुख मंगल गावहिं। नभ ते सुरन सुमन वर्षावहिं॥ शंभु उमा बहु दान लुटावहिं। सुर मुनिजन सुत देखन आवहिं॥ लखि अति आनन्द मंगल साजा। देखन भी आये शनि राजा॥ निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं। बालक देखन चाहत नाहीं॥ गिरिजा मन मृदु विनय सुनायी। बालक देखि शनिहि दिखरायी॥ देखत ही शनि दृष्टि प्रकासा। बालक सिर उड़ि गयो अकासा॥ गिरिजा गिरी विकल ह्वै धरनी। सो दुख दशा गयो नहिं वरनी॥ हाहाकार मच्यो कैलासा। शनि कीन्ह्यो लखि सुत को नाशा॥ तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो। काटि चक्र सो गज सिर लायो॥ बालक के धड़ ऊपर धारयो। प्राण मन्त्र पढ़ि शंकर डारयो॥ नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे। प्रथम पूज्य बुद्धि निधि वर दीन्हे॥ बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा। पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा॥ चले षडानन भ्रमि भुलाई। रची बैठि तुम बुद्धि उपाई॥ चरण मातु-पितु के धर लीन्हे। तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हे॥ धनि गणेश कहि शिव हिय हरषे। नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे॥ तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई। शेष सहस मुख सके न गाई॥ मैं मतिहीन मलीन दुखारी। करहुं कौन विधि विनय तुम्हारी॥ भजत रामसुन्दर प्रभुदासा। जग प्रयाग ककरा दुर्वासा॥ अब प्रभु दया दीन पर कीजै। अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै॥ श्री गणेश यह चालीसा, पाठ करै कर ध्यान। नित नव मंगल गृह बसै, लहै जगत सम्मान॥ दोहा: संवत अपन सहस्त्र दश, ऋषि पंचमी दिनेश। पूरण चालीसा भयो, मंगल मूर्ति गणेश॥