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शिव पंचाक्षर स्तोत्र लिरिक्स 108 Shiva Panchakshara Stotram Lyrics 108 Voice: Puneet Kumar Publisher: A to all Music and Films Recording: Hindi Kesri A to all Studio #shivpanchaksharstotra #shivpanchaksharstotram #shivmantra शिव पंचाक्षर स्तोत्र लिरिक्स 108: पुणीत कुमार की आवाज़ में भक्ति का नया स्वरूप भगवान शिव की उपासना में शिव पंचाक्षर स्तोत्र का विशेष स्थान है। “ॐ नमः शिवाय” पंचाक्षर मंत्र पर आधारित यह स्तोत्र आध्यात्मिक ऊर्जा, शांति और आत्मबल प्रदान करता है। अब शिव पंचाक्षर स्तोत्र लिरिक्स 108 का एक नया और अनोखा रूप सामने आया है, जिसे पुणीत कुमार की प्रभावशाली और भावपूर्ण आवाज़ में प्रस्तुत किया गया है। इस नए शैली के स्तोत्र में पारंपरिक श्लोकों को आधुनिक लेकिन शांत संगीत-संयोजन के साथ गाया गया है, जिससे श्रोता गहरे ध्यान और भक्ति में सहजता से प्रवेश कर सके। पुणीत कुमार की आवाज़ में स्थिरता, करुणा और साधना का भाव स्पष्ट रूप से महसूस होता है, जो इसे सामान्य पाठ से अलग और विशेष बनाता है। 108 बार शिव पंचाक्षर स्तोत्र का जाप भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में अत्यंत शुभ माना गया है। यह न केवल मन को शांत करता है, बल्कि नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मिक संतुलन स्थापित करता है। नियमित श्रवण और जाप से मानसिक तनाव कम होता है, एकाग्रता बढ़ती है और शिव तत्व से गहरा जुड़ाव महसूस होता है। यह प्रस्तुति विशेष रूप से उन भक्तों के लिए है जो ध्यान, योग और साधना के समय शांति और स्थिरता की अनुभूति चाहते हैं। शिव पंचाक्षर स्तोत्र लिरिक्स 108, पुणीत कुमार की आवाज़ में, आज की तेज़-रफ्तार दुनिया में आध्यात्मिक ठहराव और शिव भक्ति का सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। यह नया शैलीबद्ध स्तोत्र न सिर्फ एक भक्ति गीत है, बल्कि शिव चेतना से जुड़ने का एक अनुभव है। हर हर महादेव। ॥ श्रीशिवपञ्चाक्षरस्तोत्रम् ॥ नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय, भस्माङ्गरागाय महेश्वराय । नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय, तस्मै न काराय नमः शिवाय ॥1॥ मन्दाकिनी सलिलचन्दन चर्चिताय, नन्दीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय । मन्दारपुष्प बहुपुष्प सुपूजिताय, तस्मै म काराय नमः शिवाय ॥2॥ शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्द, सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय । श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय, तस्मै शि काराय नमः शिवाय ॥3॥ वसिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्य, मुनीन्द्रदेवार्चितशेखराय। चन्द्रार्क वैश्वानरलोचनाय, तस्मै व काराय नमः शिवाय ॥4॥ यक्षस्वरूपाय जटाधराय, पिनाकहस्ताय सनातनाय । दिव्याय देवाय दिगम्बराय, तस्मै य काराय नमः शिवाय ॥5॥ पञ्चाक्षरमिदं पुण्यं यः पठेच्छिवसन्निधौ । शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते ॥