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• कीर्तन :- नेह लग्यो मेरो स्याम सुंदरसों । नेह लग्यो मेरो स्याम सुंदरसों ॥ टेक ॥ आयो वसंत सबहि बन फूले खेतन फूली है सरसों ॥ में पीरी भई पियाके विरह सों निकसत प्राण अधरसों ॥ कहो जाय बंसीधर सों ॥ १ ॥ फागुन में सब होरी खेलत हें अपनेअपने बरसों । पियके वियोग जोगन व्है निकसी धूरि उडावत करसों ॥ चली मथुरा की डगर सों ॥२॥ ऊधो जाय द्वारका में कहियो इतनी अरज मेरी हरि सों ॥ बिरह व्यथा से जियरा डरतहें जबतें गये हरि घरसों ॥ दरस देखन कोंहों तरसों ॥ ३॥ सूरदास मेरी इतनी अरज है कृपासिंधु गिरिधरसों ॥ गहेरी नदीयां नाव पुरानी अबकें ऊबारो सागरसों ॥ अरज मेरी राधाबरसों ॥४॥ • कीर्तन गान :- पू.पा.गो.श्री रसार्द्ररायजी महोदय । • सारंगी वादन :- अर्पित मांडवीय ।