У нас вы можете посмотреть бесплатно बालाघाट पुलिस का मुमकिन करने वाला अभियान:विद्यांजली। बिना खून हवा हदय और बिना शिक्षा के शरीर मरा हुआ или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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बालाघाट पुलिस सरकारी स्कूल में दुल्हन की तरह सजा रही है। नक्सल मुक्त गांवों में लाई बूंदी से आगे निकला गणतंत्र उत्सव-संस्कृति और शिक्षा की क़सम खाई फिर लाई बूंदी के साथ मिठाई। विद्यांजलि की ज्योति जंगल के दूरस्थ गांवों में उजाला फैला रही है बैगा जनजाति में बदलाव ला रही है सायर गांव जहाँ कई कई सालों पहले तिरंगा फहराने वाले को तिरंगे में लिपटकर घर जाने की धमकी दी जाती थी फिर जी शिक्षक तिरंगा फहराते थे। नक्सल मुक्त होने के बाद बालाघाट पुलिस अधीक्षक श्री आदित्य मिश्रा सर के एकल विद्यालय:विद्यांजली अभियान के तहत बालाघाट से व्यापारी मेहुल टांक जी और पुलिस गणतंत्र का उत्सव मनाने बैगा समुदाय के बीच पहुंचे। महिलायें कटोरा लेकर बैठी थीं कि लाई बूंदी मिलेगी लेकिन इस बार तो कुछ और मिला। पहले क़सम खिलाई गई। जिसमें बच्चों के सिर पे हाथ रखके डेली स्कूल भेजने की कसम खाई और फिर दूसरे पड़ोसी गांव टेमनी से बैगा जनजाति बच्चों को ले जाकर तीन घंटे जनजाति और राष्ट्रीय विचारों के नृत्य गीत सुनाये गए। तत्काल बदलाव दिखा जब दूसरे गांव के बच्चों को टिफिन, बैट बाल, तीन-तीन सौ नगद रुपए इनाम पाते देखा तो सायर गांव की एक बच्ची ने कविता सुनाई। बदलाव लाने के लिए तीन कुर्सी थी तो पुलिस ने अतिथियों के अलावा बैगा समुदाय के लिए भानुप्रताप सिंह बैगा जी को मुख्य अतिथि बनाकर बैठाया और ख़ुद स्कूल की पट्टी में बैठकर बदलाव के माहौल का जश्न मनाते रहे। जब गाँव के बुजुर्ग ख़ुशी ने नृत्य करने लगे तो पुलिस व्यापारी शिक्षक भी साथ होकर बच्चों को कंधे में बैठाकर नृत्य करते नजर आए।