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अथ द्वितीयोऽध्यायः ~ सांख्ययोग | आत्मा अमर है | Bhagavad Gita Chapter 2 Hindi आत्मा अमर है #BhagavadGita #GitaChapter2 #SankhyaYoga #गीता #सांख्ययोग #AtmaAmarHai #KrishnaUpdesh #GitaGyan #SpiritualKnowledge #HinduSpirituality #SanatanDharma #BhagwatGitaHindi #ShriKrishna #MotivationalGita #SpiritualWavesBhaktiDhaara भगवद्गीता का द्वितीय अध्याय “अथ द्वितीयोऽध्यायः – सांख्ययोग” सम्पूर्ण गीता का हृदय माना जाता है। यही वह अध्याय है जहाँ से भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को जीवन, आत्मा और कर्तव्य का वास्तविक ज्ञान प्रदान करते हैं। इस अध्याय में गीता का मूल दर्शन छिपा हुआ है, जो आज के मानव जीवन के लिए भी उतना ही प्रासंगिक है जितना महाभारत काल में था। Bhagavad Gita Chapter 2 is known as Sankhya Yoga, the chapter of divine wisdom and self-realization. In this chapter, Lord Krishna explains the eternal truth of life — the immortality of the soul (Atma). श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि मनुष्य जिस शरीर को अपना मानता है, वह नश्वर है। शरीर जन्म लेता है, बढ़ता है, रोगी होता है और अंततः नष्ट हो जाता है। लेकिन आत्मा — न जन्म लेती है, न मरती है और न ही कभी नष्ट होती है। “न जायते म्रियते वा कदाचित्…” यह श्लोक आत्मा की अमरता का उद्घोष करता है। सांख्ययोग का मुख्य उद्देश्य है — तत्वज्ञान के माध्यम से आत्मबोध। जब मनुष्य यह समझ लेता है कि वह शरीर नहीं, बल्कि आत्मा है, तब उसके भीतर से भय, शोक, चिंता और मोह स्वतः समाप्त होने लगते हैं। अर्जुन युद्धभूमि में अपने स्वजनों को देखकर विचलित हो जाते हैं। उनका मन करुणा, मोह और भ्रम से भर जाता है। वे युद्ध न करने का निर्णय लेने लगते हैं। उसी समय भगवान श्रीकृष्ण उन्हें यह दिव्य ज्ञान प्रदान करते हैं कि — कर्तव्य से भागना धर्म नहीं है। विवेक और समत्व के साथ कर्म करना ही सच्चा योग है। This teaching forms the foundation of Karma Yoga, which is later explained in upcoming chapters. भगवद्गीता अध्याय 2 हमें सिखाता है कि — • सुख और दुःख अस्थायी हैं • लाभ और हानि क्षणिक हैं • जीवन का उद्देश्य केवल भोग नहीं, बल्कि धर्म है • कर्म करते समय फल की आसक्ति छोड़नी चाहिए यही समत्व भाव मनुष्य को स्थिर और शांत बनाता है। आज के समय में जब मनुष्य तनाव, चिंता, अवसाद और भय से घिरा रहता है, तब Gita Chapter 2 Sankhya Yoga एक दिव्य प्रकाश की तरह मार्ग दिखाता है। यह अध्याय हमें सिखाता है कि बाहरी परिस्थितियाँ हमारे वश में नहीं होतीं, लेकिन हमारा दृष्टिकोण हमारे वश में अवश्य होता है। जब हम आत्मा के स्वरूप को समझ लेते हैं, तब संसार की समस्याएँ छोटी लगने लगती हैं। सांख्ययोग केवल धार्मिक ज्ञान नहीं है, बल्कि यह life management philosophy है। यह हमें सिखाता है कि — • कठिन समय में धैर्य कैसे रखें • अपमान और प्रशंसा में संतुलन कैसे बनाएँ • कर्तव्य निभाते हुए आसक्ति कैसे छोड़ें • आत्मबल कैसे बढ़ाएँ भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को बताते हैं कि जो व्यक्ति इंद्रियों पर संयम रखता है, मन को स्थिर करता है और बुद्धि से निर्णय लेता है — वही स्थितप्रज्ञ कहलाता है। स्थितप्रज्ञ पुरुष संसार में रहते हुए भी संसार से प्रभावित नहीं होता। यह अध्याय मनुष्य को भीतर से मजबूत बनाता है। यदि आप अपने जीवन में — ✔ मानसिक शांति ✔ आत्मविश्वास ✔ भय से मुक्ति ✔ आध्यात्मिक जागृति ✔ सकारात्मक ऊर्जा चाहते हैं, तो Bhagavad Gita Chapter 2 Hindi को श्रद्धा और एकाग्रता से अवश्य सुनें। इस वीडियो में प्रस्तुत सांख्ययोग का ज्ञान न केवल आत्मा को जागृत करता है, बल्कि जीवन को सही दिशा भी देता है। यह पाठ विद्यार्थियों, गृहस्थों, साधकों और हर उस व्यक्ति के लिए उपयोगी है जो जीवन में सत्य और स्थिरता की खोज कर रहा है। 🌸 Spiritual Waves Bhakti Dhaara का उद्देश्य है — सनातन ज्ञान को सरल, शुद्ध और भावपूर्ण रूप में आप तक पहुँचाना। यदि यह दिव्य ज्ञान आपके हृदय को स्पर्श करे, तो कृपया वीडियो को Like करें, अपने प्रियजनों के साथ Share करें और Channel को Subscribe करें। यह ज्ञान जितना बाँटा जाएगा, उतना ही बढ़ेगा। 🙏 श्रीकृष्ण कृपा आप सभी पर बनी रहे। ⚠️ Legal Copyright Disclaimer Copyright Disclaimer: This video is created strictly for spiritual, educational and devotional purposes only. All Sanskrit shlokas belong to the sacred scripture Bhagavad Gita. The voice-over, explanation, presentation style, audio arrangement and visual composition are original creations of Spiritual Waves Bhakti Dhaara. Any unauthorized reproduction, re-upload or commercial use of this content is strictly prohibited under copyright law.