У нас вы можете посмотреть бесплатно The Myth of 1947– गोरे गए, पर काले अंग्रेज़ों ने हमें गुलाम बना लिया?| OSHO Inspired Hindi Pravachan или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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क्या 1947 सच में आज़ादी थी… या केवल सत्ता का हस्तांतरण? इस गहन और बेचैन कर देने वाले प्रवचन में हम 1947 की स्वतंत्रता को बाहरी घटना नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक दर्पण की तरह देखते हैं। प्रश्न यह नहीं कि अंग्रेज़ गए या नहीं। प्रश्न यह है — क्या गुलामी भी गई? क्या व्यवस्था बदली, या केवल चेहरे बदले? क्या हम सच में स्वतंत्र हैं, या बस नई मानसिक जंजीरों में बंधे हैं? यह प्रवचन बाहरी राजनीति से अधिक भीतर की चेतना पर चोट करता है। यह भीड़, सत्ता, भय, पहचान, राष्ट्रवाद और आंतरिक स्वतंत्रता के बीच के सूक्ष्म अंतर को खोलता है। यह कोई ऐतिहासिक निर्णय नहीं देता — यह तुम्हें तुम्हारे भीतर ले जाता है। यदि तुम सच में जानना चाहते हो कि आज़ादी क्या है… तो यह वीडियो तुम्हारे लिए है। 🕊 मुख्य विषय: स्वतंत्रता बनाम मानसिक गुलामी सत्ता परिवर्तन और चेतना भीतर की क्रांति मौन और साक्षीभाव 1947 का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण ⚠️ AI Assisted Creative Disclaimer: यह वीडियो ओशो की शैली से प्रेरित एक रचनात्मक प्रस्तुति है। इसमें प्रयुक्त वाणी, भाव और अभिव्यक्ति ओशो के दर्शन को सम्मानपूर्वक नमन करते हुए एक कलात्मक पुनर्सृजन है। यह ओशो के वास्तविक शब्दों या आधिकारिक प्रवचनों का शाब्दिक रूपांतरण नहीं है। इस वीडियो में उपयोग की गई आवाज़ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) द्वारा निर्मित है और इसे केवल आध्यात्मिक व चिंतनशील उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। हम ओशो की विरासत का गहरा सम्मान करते हैं। यदि यह प्रवचन तुम्हें भीतर तक छू गया हो, तो इसे केवल साझा मत करो — पहले स्वयं के भीतर उतरकर देखो। #OshoInspired #HindiPravachan #InnerFreedom #1947Myth #SpiritualAwakening #OshoHindiSpeech