У нас вы можете посмотреть бесплатно || Shiv Tandav || || रावण रचित शिव तांडव || || રાવણ રચિત શિવ તાંડવ || или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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पोजिटिव उर्जा का संचार करवा दे ऐसा जूनागढ़ में महाशिवरात्रि के पर्व पे आयोजित महाकुम्भ की एक ज़लक के साथ गुजरात की प्रसिध्ध गायिका निधि धोलकिया के स्वर में रावण रचित संस्कृत शिव तांडव स्त्रोत्रम के साथ मिक्स में काठियावाडी चारणी शिव तांडव का संकलन | ॥ अथ रावण कृत शिव तांडव स्तोत्र ॥ जटाटवीग लज्जलप्रवाहपावितस्थले गलेऽवलम्ब्यलम्बितां भुजंगतुंगमालिकाम्। डमड्डमड्डमड्डम न्निनादवड्डमर्वयं चकार चंडतांडवं तनोतु नः शिवः शिवम ॥1॥ जटा कटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिंपनिर्झरी । विलोलवी चिवल्लरी विराजमानमूर्धनि । धगद्धगद्ध गज्ज्वलल्ललाट पट्टपावके किशोरचंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं ममं ॥2॥ धरा धरेंद्र नंदिनी विलास बंधुवंधुर- स्फुरदृगंत संतति प्रमोद मानमानसे । कृपाकटाक्षधारणी निरुद्धदुर्धरापदि कवचिद्विगम्बरे मनोविनोदमेतु वस्तुनि ॥3॥ जटा भुजंगपिंगल स्फुरत्फणामणिप्रभा- कदंबकुंकुम द्रवप्रलिप्त दिग्वधूमुखे । मदांध सिंधुरस्फुरत्वगुत्तरीयमेदुरे मनो विनोदद्भुतं बिंभर्तु भूतभर्तरि ॥4॥ शैल श्रृंग सम विशाल, जटाजूट चंद्र भाल, गंगकी तरंग माल, विमल नीर गाजे, लोचन त्रय लाल लाल, चंदन की खोरी भाल, कुमकुम सिंदूर गुलाल, भृकुटी वर साजे, मुंडन की कंठमाल, विहसत हरदय खुशाल, स्फटिक जाल रुद्रमाल, हर दयाल राचे, बम बम बम डमरू बाज, नाद वेद स्वर सुसाज, शंकर महाराज आज तांडव नाचे ... (३) "१" सहस्र लोचन प्रभृत्य शेषलेखशेखर प्रसून धूलिधोरणी विधूसरांघ्रिपीठभूः । भुजंगराज मालया निबद्धजाटजूटकः श्रिये चिराय जायतां चकोर बंधुशेखरः ॥5॥ ललाट चत्वरज्वलद्धनंजयस्फुरिगभा निपीतपंचसायकं निमन्निलिंपनायम् । सुधा मयुख लेखया विराजमानशेखरं महा कपालि संपदे शिरोजयालमस्तू नः ॥6॥ कराल भाल पट्टिकाधगद्धगद्धगज्ज्वल द्धनंजया धरीकृतप्रचंडपंचसायके । धराधरेंद्र नंदिनी कुचाग्रचित्रपत्रक प्रकल्पनैकशिल्पिनि त्रिलोचने मतिर्मम ॥7॥ नवीन मेघ मंडली निरुद्धदुर्धरस्फुर त्कुहु निशीथिनीतमः प्रबंधबंधुकंधरः । निलिम्पनिर्झरि धरस्तनोतु कृत्ति सिंधुरः कलानिधानबंधुरः श्रियं जगंद्धुरंधरः ॥8॥ सनकादिक सुर समाज, प्रमुदित मन देवराज, पाणिनि मुनि मन विभराज, रीद्धिसिद्धि दानी, प्रथम विष ओंमकार, वर्ण सर्व मुनि उच्चार, अक्षर स्वर निराकार, वैखरी सुबानी, कुचुटुतुपु नाम धार, वर्ग वर्ग को प्रचार, ब्रह्मको विचार सार, सर्व मान्य साचे, बम बम बम डमरू बाज, नाद वेद स्वर सुसाज, शंकर महाराज आज तांडव नाचे ... (३) "२" प्रफुल्ल नील पंकज प्रपंचकालिमच्छटा विडंबि कंठकंध रारुचि प्रबंधकंधरम् स्मरच्छिदं पुरच्छिंद भवच्छिदं मखच्छिदं गजच्छिदांधकच्छिदं तमंतकच्छिदं भजे ॥9॥ अगर्वसर्वमंगला कलाकदम्बमंजरी रसप्रवाह माधुरी विजृंभणा मधुव्रतम् । स्मरांतकं पुरातकं भावंतकं मखांतकं गजांतकांधकांतकं तमंतकांतकं भजे ॥10॥ जयत्वदभ्रविभ्रम भ्रमद्भुजंगमस्फुर द्धगद्धगद्वि निर्गमत्कराल भाल हव्यवाट् धिमिद्धिमिद्धिमि नन्मृदंगतुंगमंगल ध्वनिक्रमप्रवर्तित प्रचण्ड ताण्डवः शिवः ॥11॥ दृषद्विचित्रतल्पयोर्भुजंग मौक्तिकमस्रजो- र्गरिष्ठरत्नलोष्टयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः । तृणारविंदचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः समं प्रवर्तयन्मनः कदा सदाशिवं भजे ॥12॥ अद्धुत अति धटित धाट, विघटित सुधटित कपाट, तांडव को करत नाट, जोगिराट भ्राजे, जय जय जय जपत देव, वंद्त पद महादेव, “राम-कृष्ण” करत सेव, साम्ब तुं निवाजे, अकथ अलख अति अनूप, निरखत सुर नमत भूप, शंकर हर विश्वरूप, रूद्र रूप राचे, बम बम बम डमरू बाज, नाद वेद स्वर सुसाज, शंकर महाराज आज तांडव नाचे ... (३) "३" कदा निलिंपनिर्झरी निकुजकोटरे वसन् विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरःस्थमंजलिं वहन् । विमुक्तलोललोचनो ललामभाललग्नकः शिवेति मंत्रमुच्चरन् कदा सुखी भवाम्यहम् ॥13॥ निलिम्प नाथनागरी कदम्ब मौलमल्लिका निगुम्फनिर्भक्षरन्म धूष्णिकामनोहरः । तनोतु नो मनोमुदं विनोदिनींमहनिशं परिश्रय परं पदं तदंगजत्विषां चयः ॥14॥ प्रचण्ड वाडवानल प्रभाशुभप्रचारणी महाष्टसिद्धिकामिनी जनावहूत जल्पना । विमुक्त वाम लोचनो विवाहकालिकध्वनिः शिवेति मन्त्रभूषगो जगज्जयाय जायताम् ॥15॥ इमं हि नित्यमेव मुक्तमुक्तमोत्तम स्तवं पठन्स्मरन् ब्रुवन्नरो विशुद्धमेति संततम् । हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नांयथा गतिं विमोहनं हि देहना तु शंकरस्य चिंतनम ॥16॥ धुतुतु धुतुतु तुरिय बाज, तुंही तुंही तुंही करत गाज, शंखनाद शृंग वाद्य, विविध वाद्य घेरी, ता तताक ता तताक, बजत ताल तक तताक, थरकत लरकत लखात, मंद मंद भेरी, अमरी गण सुमन जाल, बरखत हरखत खुशाल, मुनिजन मानस विशाल, अमित मोद माचे, बम बम बम डमरू बाज, नाद वेद स्वर सुसाज, शंकर महाराज आज तांडव नाचे ... (३) "४" पूजाऽवसानसमये दशवक्रत्रगीतं यः शम्भूपूजनमिदं पठति प्रदोषे । तस्य स्थिरां रथगजेंद्रतुरंगयुक्तां लक्ष्मी सदैव सुमुखीं प्रददाति शम्भुः ॥17॥ ॥ इति शिव तांडव स्तोत्रं संपूर्णम् ॥ Concept & Directed By Shailesh Narvaiya Music By Ravi Vyas (Vyas Brother's Studio)-Rajkot Singer Nidhiben Dholkia Videography Kashyap Patel (Studio Light & Shade)-Rajkot Videography Mahashivratri Junagadh Mohit Vaja Keyboard Bhargav Changela Editing By Parth Patel (Studio Light & Shade)-Rajkot Produced By Kathiawar Group-Gondal Copyright & Publishing: Kathiawar Group Thanks For watch, Like, Comment, Share & Subscribe........