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राजस्थानी भगवद् गीता – चौथा अध्याय (ज्ञानकर्मसंन्यास योग) इस अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को बताया कि कैसे ज्ञान और कर्म का मेल ही मोक्ष का मार्ग है। श्रीकृष्ण समझाते हैं कि यह योग केवल त्याग नहीं, बल्कि विवेकपूर्ण कर्म और आत्मज्ञान का संगम है। वे कहते हैं कि सच्चा त्याग वही है जिसमें मनुष्य अपने स्वार्थों को छोड़कर धर्म के अनुसार कर्म करता है और ज्ञान के आलोक में जीता है। मुख्य संदेश – परमात्मा का जन्म और कर्म दिव्य हैं। केवल भक्ति और विश्वास से ही मनुष्य जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो सकता है। ज्ञान से अज्ञान का नाश होता है, जैसे अग्नि से लकड़ी जलकर भस्म हो जाती है। जो ज्ञानवान है, वही सच्चे कर्मयोगी और संन्यासी हैं। ✨ पहली बार राजस्थानी भगवद गीता का यह दिव्य ज्ञान राजस्थानी भाषा में AI और एनीमेशन के माध्यम से प्रस्तुत किया जा रहा है। 🔹 निरीक्षण – पंडित कैलाश जी जोशी 🔹 अनुवाद – नंदकिशोर जी नेक 🔹 एनीमेशन – सिल्वर कैनवास मीडिया & एनीमेशन स्टूडियो 🔹 संगीत – सुनील त्रिवेदी 🔹 रिकॉर्डिंग – शुभम् रिकॉर्डिंग स्टूडियो आइए, इस अध्याय से हम सीखें कि ज्ञान और कर्म का समन्वय ही जीवन का सच्चा योग है और आत्मा को परम शांति की ओर ले जाता है। 🙏 जय श्री कृष्णा! #krishna #motivation #bhagwatgeeta #hinduscripture #geetainmarwari #srimadbhagvadgeeta #srimadbhagvadgeeta #short #shortsyoutube #trendingshorts #viralvideo #viralshort #rajastahni #hinduscripture #bhagwatgeetashlok