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Raag- Kedar Taal- Jhaptaal शरण प्रतिपाल गोपाल रति वर्धिनी । देत पिय पंथ कंथ सन्मुख करत , अतुल करुणामयी नाथ अंग अर्द्धिनी ॥१॥ दीन जन जान रसपुंज कुंजेश्वरी रमत रसरास पिय संग निश शर्दनी । भक्ति दायक सकल भव सिंधु तारिनी करत विध्वंसजन अखिल अघमर्दनी ॥२॥ रहत नन्दसूनु तट निकट निसि दिन सदा गोप गोपी रमत मध्य रस कन्दनी । कृष्ण तन वर्ण गुण धर्म श्री कृष्ण की कृष्ण लीलामयी कृष्ण सुख कंदनी ॥३॥ पद्मजा पाय तू संगही मुररिपु सकल सामर्थ्य मयी पाप की खंडनी । कृपा रस पूर्ण वैकुण्ठ पद की सीढी जगत विख्यात शिव शेष सिर मंडनी ॥४॥ पर्योपद कमल तर और सब छांडि के देख दृग कर दया हास्य मुख मन्दनी । उभय कर जोर कृष्णदास विनती करें करो अब कॄपा कलिन्द गिरि नन्दिनी ॥५॥ You can follow us on our Social Media. Instagram: / muditajamariya Facebook Page: / events